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67 सदस्यों का पूरा भंसाली परिवार चार मंजिला अपार्टमेंट में, सिर्फ फ्लैट अलग बाकी सब साथ

6 महीने पहले
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यहां चार पीढ़ियां साथ रहती हैं 14 भाइयों के परिवार में 18 बच्चे हैं
  • मिनी थिएटर, स्पोर्ट्स जोन, स्वीमिंग पूल और स्पा भी इसी में, 80 साल पहले आया परिवार बढ़ने लगा, तब आकार लिया कल्पवृक्ष ने
  • ज्वेलरी के कारोबार से जुड़े इस परिवार के सभी सदस्य परेशानी में साथ खड़े होते हैं तो कारोबार में एक-दूसरे की मदद करते हैं
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भूपेश केशरवानी | रायपुर . ऐसे समय में जब सिंगल फैमिली और ज्वाइंट फैमिली पर बहस छिड़ी है, तब राजधानी का भंसाली परिवार एक मिसाल है। 67 सदस्यों का भंसाली परिवार चार मंजिला अपार्टमेंट में रहता है, जहां फ्लैट अलग हैं, लेकिन बाकी सब साथ है। यहां चार पीढ़ियां साथ रहती हैं। 14 भाइयों के परिवार में 18 बच्चे हैं। हर वीकेंड पर सुबह के नाश्ते से लेकर रात का भोजन सब साथ करते हैं। बड़ा किचन हैं, जहां एक साथ सबका भोजन बनता है। मजेदार बात यह है कि अपार्टमेंट में ही मिनी थिएटर, स्पोर्ट्स जोन, हॉल और स्वीमिंग पूल से लेकर स्पा सेंटर, सेलून और जिम भी है।


ज्वेलरी के कारोबार से जुड़े इस परिवार के सभी सदस्य परेशानी में साथ खड़े होते हैं तो कारोबार में एक-दूसरे की मदद करते हैं। एक और रोचक बात यह है कि महिलाओं के बीच यदि किसी बात को लेकर मनमुटाव हो भी गया तो वे खुद ही उसे सुलझाती हैं। साल में तीन से चार बार टूर जाते हैं तो सब एक साथ बड़े बस में जाते हैं। शादी में भी जाना रहता है तो बड़े बस से ही सभी जाते हैं।

मुखिया पुरुष, लेकिन फैसले बुजुर्ग महिलाओं से पूछकर
भंसाली कल्पवृक्ष में वैसे तो 52 साल के कमल भंसाली और ललित मुखिया हैं, लेकिन जब फैसले लेने की बारी आती है तो घर की बुजुर्ग रतन देवी और सुशीला देवी से पूछते हैं। संजय भंसाली ने बताया कि उनके दादाजी आसकरण भंसाली 80 साल पहले रायपुर आए थे। उनके चार बेटे अनुज भंसाली, मनोहर लाल, त्रिलोकचंद और गजराज थे। सभी भाइयों का खुद का कारोबार था। सभी छोटे-छोटे मकान में रहते थे। परिवार बढ़ता गया तो एक साथ एक छत में रहने के लिए छह मंजिला मकान बनाया गया। जहां एक बड़ा किचन है, जहां शनिवार और रविवार को सभी एक साथ भोजन करते हैं। 

जब घर की बुजुर्ग हुईं बीमार तो पूरा परिवार मुंबई में
घर की बुजुर्ग छगन देवी एक बार बीमार हो गई थीं। उन्हें मुंबई के अस्पताल में भर्ती कराया गया था। करीब डेढ़ महीने तक वहां उनका इलाज चलता रहा। इस बीच घर के सभी सदस्य रायपुर छोड़कर मुंबई में डटे रहे। जब वे स्वस्थ हुईं, तब उनको लेकर रायपुर लौटे। घर के सदस्यों ने बताया कि कुछ समय के लिए कारोबार में मंदी का दौर था। सभी भाइयों ने बैठकर उपाय ढूंढा। उसके बाद से कभी कारोबार में मंदी नहीं आई। किसी भी भाई के ससुराल या अन्य रिश्तेदारी में समस्या आने पर सभी एक साथ उसका सामना करते हैं। घर की महिलाएं सहेलियों की तरह रहती हैं।

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