छत्तीसगढ़  / सीधे मुकाबले में बागी नहीं डाल सके बड़ी बाधा, कुछ सीटों पर ही रहा असर

The main obstacle can not be rebuffed directly in the fight
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The main obstacle can not be rebuffed directly in the fight

  • पांच साल बाद भाजपा-कांग्रेस में फिर बगावत, अब दोनों ही दल डैमेज कंट्रोल में जुटे 
  • कई सीटों पर फंसी सीटें तो कुछ जगहों पर निर्दलीय उम्मीदवार 

Oct 30, 2018, 09:16 AM IST

पी. श्रीनिवास राव / मनोज व्यास। रायपुर. भाजपा और कांग्रेस में जैसे-जैसे टिकट तय हो रहे हैं, वैसे-वैसे बागी खुलकर सामने आ रहे हैं। पिछली बार के मुकाबले दोनों दलों के लिए बागी बड़ी चुनौती बनकर उभरे हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि जोगी कांग्रेस और बसपा ने कांग्रेस व भाजपा के उम्मीदवारों को टिकट देना शुरू किया है। 

 

यही वजह है कि कई सीटों पर करीबी मुकाबले के आसार हैं, जबकि दो दर्जन से ज्यादा सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबले की स्थिति है। हालांकि पिछली बार बागियों के कारण दोनों ही दलों को बहुत ज्यादा नुकसान नहीं हुआ था। टिकटों के बंटवारे ने भाजपा-कांग्रेस ही नहीं, जोगी कांग्रेस में भी दरारें ला दी हैं। यही वजह है कि इस बार भाजपा से दो लोग खुलकर बागी हो चुके हैं। 

 

साजा से लाभचंद बाफना के खिलाफ पूर्व सांसद के समर्थक बसंत अग्रवाल ने निर्दलीय चुनाव लड़ने फॉर्म खरीद लिया है तो जांजगीर-चांपा सीट से नारायण चंदेल के विरोध में व्यास कश्यप ने बसपा ज्वॉइन कर ली है। बसपा ने कश्यप को प्रत्याशी बना दिया है। कांग्रेस में रूद्र गुरु के अहिवारा और डॉ. शिवकुमार डहरिया के आरंग से प्रत्याशी घोषित होने पर कई दावेदार घर बैठ गए हैं। 

 

भिलाईनगर से महापौर देवेंद्र यादव को टिकट देने पर बदरूद्दीन कुरैशी के समर्थक नाराज हैं। दुर्ग ग्रामीण से रमशीला साहू का टिकट कटने पर उनके समर्थकों में नाराजगी है। बिलासपुर से अमर अग्रवाल के खिलाफ पेंड्रा के भाजपा नेता पूरन छाबरिया बागी हो गए हैं। 

 

इधर, अंतागढ़ से सांसद विक्रम उसेंडी को उम्मीदवार बनाने पर दूसरा गुट नाराज है। बिल्हा और गुंडरदेही से कांग्रेस के वर्तमान विधायकों से ही बड़ी चुनौती मिलेगी। सियाराम कौशिक और आरके राय इस बार जोगी कांग्रेस से चुनाव लड़ रहे हैं। पाटन से पीसीसी चीफ भूपेश बघेल के खिलाफ पार्टी में प्रतिद्वंद्वी उभर रहे हैं। 

 

पिछले चुनाव में बगावत ने कहीं भाजपा-कांग्रेस को तीसरे नंबर पर धकेला था 


इन सीटों पर तीसरे नंबर पर रहीं पार्टियां 

  • भाजपा खुज्जी, महासमुंद और पाली तानाखार में रही तीसरे नंबर पर। 
  • कांग्रेस चंद्रपुर, जैजैपुर, पामगढ़, नवागढ़ में रही तीसरे नंबर पर। 
  • बहुजन समाज पार्टी 15 सीटों पर रही तीसरे नंबर पर। 
  • छत्तीसगढ़ स्वाभिमान मंच दस सीटों पर रहा तीसरे नंबर पर। 

 

2013 के चुनाव में इन सीटों पर हुई थी बगावत 
 

  • पिछले विधानसभा चुनाव में सबसे बड़ा उग्र प्रदर्शन रायपुर उत्तर सीट के लिए हुआ था। उस समय रायपुर उत्तर के तगड़े दावेदार सच्चिदानंद उपासने के समर्थकों ने श्रीचंद सुंदरानी को टिकट देने पर जोरदार नाराजगी जताई थी। हालांकि बाद में संगठन के मनाने पर उपासने शांत हो गए। इस सीट पर भाजपा की जीत हुई थी। 
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  • महासमुंद में 2008 में हारे उम्मीदवार पूनम चंद्राकर के मुकाबले डॉ. विमल चोपड़ा तगड़े उम्मीदवार के रूप में उभरे थे। भाजपा ने चोपड़ा के बदले चंद्राकर को मौका दिया। इससे नाराज चोपड़ा निर्दलीय ही मैदान पर उतरे और जीत हासिल की। यह छत्तीसगढ़ गठन के बाद किसी निर्दलीय की पहली जीत साबित हुई। 
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  • खुज्जी सीट पर रजिंदर पाल भाटिया ने भाजपा से बगावत कर चुनाव लड़ा। वे दूसरे नंबर पर रहे और भाजपा तीसरे नंबर पर चली गई थी। 
     
  • तखतपुर से जगजीत सिंह मक्कड़ ने भाजपा और कांग्रेस से संतोष कौशिक व शिवा माली ने बगावत कर चुनाव लड़ा। बसपा से लड़कर कौशिक तीसरे नंबर पर रहे। 
     
  • राजिम से श्वेता शर्मा ने संतोष उपाध्याय के खिलाफ निर्दलीय चुनाव लड़ा। हालांकि श्वेता ज्यादा वोट नहीं जुटा सकी और उपाध्याय की जीत हुई। 
     
  • दुर्ग ग्रामीण से भाजपा को उर्वशी साहू ने चुनौती दी थी। कांग्रेस को चंद्रपुर, जैजैपुर, पामगढ़ और नवागढ़ में जबर्दस्त चुनौती मिली थी। यहां कांग्रेस तीसरे नंबर पर थी। 

 

 

डैमेज कंट्रोल के लिए पार्टियों में इस तरह कवायद 
 

  1. भाजपा से रामप्रताप को जिम्मा : भाजपा में राष्ट्रीय संयुक्त संगठन महामंत्री सौदान सिंह और डॉ. रमन सिंह की बागियों पर सीधी नजर है। जहां-जहां पर स्थिति गंभीर है, वहां दोनों सीधे हस्तक्षेप कर रहे हैं। इसके अलावा भाजपा ने पूर्व संगठन महामंत्री रामप्रताप सिंह को डैमेज कंट्रोल की जिम्मेदारी दे रखी है। 
  2. कांग्रेस नेता अपने क्षेत्र पर रख रहे नजर : फिलहाल कांग्रेस में डैमेज कंट्रोल के लिए अलग से कोई टीम नहीं बनी है। बड़े नेता टिकट वितरण में ही व्यस्त हैं। संभवत: टिकट वितरण पूरा होने के बाद कोई टीम बने। फिलहाल टीएस सिंहदेव सरगुजा, डॉ. चरणदास महंत कोरबा, कोरिया, जांजगीर और भूपेश बघेल रायपुर व दुर्ग क्षेत्र में बागियों पर नजर रख रहे हैं। 

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