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अंबेडकर अस्पताल में 11 माह में हुआ 22 कराेड़ का इलाज, भुगतान केवल डेढ़ कराेड़

एक वर्ष पहले
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  • निजी अस्पतालाें से भी बार-बार वही दस्तावेज मांग रही बीमा कंपनी

रायपुर. राज्य में आयुष्मान भारत योजना शुरु होने के बाद से अंबेडकर अस्पताल को स्मार्ट कार्ड से इलाज का केवल डेढ़ करोड़ भुगतान किया गया है। बाकी साढ़े 20 करोड़ रुपए अटके हैं। स्मार्ट कार्ड से फ्री इलाज करने वाले निजी अस्पतालों के भी 15 से 20 करोड़ रुपए अटके हैं। इसे लेकर अब बीमा कंपनी जांच के घेरे में है। सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों से मरीज का इलाज होने के बाद बार-बार एक ही तरह के दस्तावेज मांगकर समय गुजारा जा रहा है। इससे अंबेडकर अस्पताल प्रबंधन परेशान है।


इलाज के पैसे नहीं मिलने से अस्पताल प्रशासन को अब दिक्कत आनी शुरू हो गई है। मरीजों के इलाज पर इसका असर पड़ रहा है। कई बार बाहर से खरीदे जाने वाले उपकरण कंपनियां इमरजेंसी में केवल डाक्टरों के फोन करने पर उपलब्ध करा देती है। लंबे समय से पेमेंट नहीं होने से अब ऐसी कंपनियां भी हाथ खड़े कर रही है। इससे मरीजों का इलाज तब शुरू किया जा रहा है जब तक कि बीमा कंपनी से पूरी तरह सहमति नहीं मिल जा रही है। जानकारों के अनुसार  पूर्व हेल्थ डायरेक्टर शिखा राजपूत तिवारी के खिलाफ जांच का मामला सामने आने के बाद स्मार्ट कार्ड व आयुष्मान भारत के माध्यम से इलाज में सामने आ रही गड़बड़ी भी उजागर हुई है। प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में 16 सितंबर 2018 से अब तक 17 हजार से ज्यादा मरीजों का इलाज किया जा चुका है। 


इतने मरीजों के इलाज के बाद अस्पताल प्रशासन ने 22 करोड़ का क्लेम किया है। इनमें 13 करोड़ की स्वीकृति मिल चुका है, लेकिन केवल डेढ़ करोड़ का भुगतान हुआ है। नौ करोड़ रुपए का क्लेम तो अब तक स्वीकृत ही नहीं किया गया है। जबकि सरकारी अस्पताल होने के नाते अंबेडकर में ज्यादा से ज्यादा मरीज आ रहे हैं। राजधानी में 100 के आसपास बड़े व मंझोले निजी अस्पताल हैं, जहां आयुष्मान से मरीजों का इलाज किया जा रहा है। उनका भुगतान भी अटका हुआ है। अंबेडकर व निजी अस्पतालों में मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना एमएसबीवाय का तीन से चार माह का भुगतान नहीं हुआ है। एमएसबीवाय में पूरा फंड राज्य सरकार दे रही है। फंड के अभाव में अस्पतालों को भुगतान नहीं हो पा रहा है। जबकि आयुष्मान में 60 फीसदी भुगतान केंद्र सरकार कर रही है। 
 

दवा का बैच नंबर व बारकोड नहीं देने पर क्लेम रिजेक्ट
अब बीमा कंपनी कैंसर के मरीजों को दी जाने वाली दवा का बैच नंबर व बारकोड मांग रही है। ऐसा नहीं करने पर क्लेम रिजेक्ट किया जा रहा है। अंबेडकर में 60 फीसदी कैंसर के मरीज आयुष्मान से इलाज करा रहे हैं। ऐसे में हर दवा का बैच नंबर व बारकोड भेजना संभव नहीं हो पाता। क्लेम रिजेक्ट होने के बाद बैच नंबर व बारकोड भेजा जा रहा है, लेकिन भुगतान नहीं हो रहा है। 


बीमा कंपनी की थी सराहना
दो माह पहले स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने केवल अंबेडकर अस्पताल में हो रहे इलाज को लेकर बीमा कंपनी के साथ बैठक रखी थी। इसमें अंबेडकर के स्टाफ पर दस्तावेज अपलोड करने का दबाव बनाया गया, साथ ही कहा गया कि बीमा कंपनी ठीक काम कर रही है। ऐसे में क्लेम रिजेक्ट अगर हो रहा है तो दस्तावेज की कमी होगी। अस्पताल के स्टाफ ने कहा कि जरूरी दस्तावेज सबमिट किए जा रहे हैं, लेकिन अधिकारी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया था।  

 

अस्पतालों का भुगतान क्यों नहीं हो रहा है, इसकी समीक्षा की जाएगी। इस संबंध में बीमा कंपनी से भी बात की जाएगी। 

भुवनेश यादव, हेल्थ कमिश्नर

 
 

अस्पतालों का नियमित भुगतान नहीं होने से मरीजों के इलाज में परेशानी हो रही है। बीमा कंपनी जबरन क्लेम रिजेक्ट कर रही है। 

डॉ. राकेश गुप्ता, अध्यक्ष अस्पताल

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