रायपुर / सागौन बंगला व सिविल लाइन में एक ही फर्क पुराने लोगों को सागौन कभी नहीं भूलता: गुप्ता



Viral Audio of 17 min of conversation between Puneet and Feroz
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Viral Audio of 17 min of conversation between Puneet and Feroz

  • डाॅ. पुनीत गुप्ता और फिरोज सिद्दीकी के बीच हुई 17 मिनट की बातचीत का वीडियो वायरल
  • अंतागढ़ टेपकांड: फिरोज ने पुलिस को पेन ड्राइव में सौंपे कई ऑडियोे-वीडियो टेप

Dainik Bhaskar

Apr 02, 2019, 03:00 AM IST

रायपुर. कांग्रेसी नेता फिरोज सिद्दीकी ने सोमवार को पुलिस को डेढ़ जीबी की एक पेनड्राइव सौंपी है। ड्राइव में अंतागढ़ टेप कांड से जुड़े सबूत होने का दावा है। इसके साथ ही इसमें फिरोज की डॉ. पुनीत गुप्ता से बातचीत का वीडियो-ऑडियो है। इसी का 17 मिनट का वीडियो वायरल हुआ है, इसमें डाॅ. गुप्ता और फिरोज की बातचीत है। जो कथित तौर पर अंबेडकर अस्पताल में रिकाॅर्ड हुआ। वीडियो में डॉ. गुप्ता यह कह रहे हैं... कहीं इसमें हाउस का नाम आ गया, तो मेरी ऐसी-तैसी हो जाएगी।

 

मेरी औकात चींटी की तरह है... सागौन बंगला व सिविल लाइन में एक ही फर्क है, सागौन बंगला कभी पुराने लोगों को नहीं भूलता...। पुलिस ने वीडियो की जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने फिरोज को नोटिस भेज टेप कांड से जुड़ा असली मोबाइल और दूसरी चीजें मांगी थीं। इसी के बाद फिरोज ने पुलिस कंट्रोल रूम जाकर पेन ड्राइव जमा करवाई। पढ़िए वीडियो में हुई बातचीत के अंश...

 

हाउस का नाम आया तो मेरी ऐसी-तैसी हो जाएगी...मेरी औकात चींटी से भी छोटी


फिरोज- अंदर हैं क्या? अभी आए नहीं है क्या? शर्मा जी आए हैं, कहना...
पुनीत गुप्ता- इस चीज को छोड़कर तुम्हारे पास पचासों मैटर हैं, जिसमें तुम बहुत कुछ कर सकते हो।
 

फिरोज- इसमें हाउस कहीं नहीं आएगा।
पुनीत- मेरी बात मान लो तुम, कुछ आ गया न तो सबकी ऐसी की तैसी हो जाएगी। मेरे हाथ से कंट्रोल खत्म हो जाएगा। तुम समझ नहीं रहे हो, मेरी औकात एक चींटी से भी छोटी है, मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता। तुमको इंटरनली बता रहा हूं। कौन-कौन किससे, कहां-कहां मिलने गया था, मेरे पास मैसेज आ गया है? कौन क्या बोला, क्या नहीं बोला? इसको तू अच्छे से समझ ले। जबरदस्ती मेरे चक्कर में...मैं तो चला जाउंगा। मैं तुम लोगों को दोस्त मानता हूं।शेष|पेज 10

 तुम्हारे चक्कर में मैं इंवाल्व हुआ। आज तुम लोग न होते तो मैं इनवाॅल्व नहीं हुआ होता।
 

फिरोज- इन लोगों के पास है। आलरेडी ये मैटर है ना।
पुनीत- रहेगा तो फिर मेरे को मत बोलना किसका क्या होने वाला है। राजनीति में क्या होता है, ये तुम जानते हो? ऐसी की तैसी फिर धमाके से होती है। मेरे हाथ में बचाने के लिए कुछ नहीं होगा। मैं तो निकल जाउंगा किनारे। सबके साथ क्या होने वाला है फिर मेरे को मत बोलना। मैं तुमको आज भी दोस्त मानता हूं, परसों भी मानता था।
 

फिरोज- इसमें कोई संदेह ही नहीं है। संजू और मेरे को।
पुनीत- आज की स्थिति में मैं तुम्हें सिंपल चीज बता रहा हूं। तुम्हारी वर्किंग कैसे भी रही हो। मार्केट में लोग क्या बोलते हैं, मैंने कभी तुमको कुछ बोला।
 

फिरोज- नहीं बोला....
पुनीत- बस एक ही चीज ध्यान रखना चाहिए। बॉस, बॉस ही रहेगा। गुरू, गुरू ही रहेगा। चेला, चेला ही रहेगा। इस चीज को तुम मान लेना। तुम्हारे अगेंस्ट कोई भी नहीं है। न पहले था न आगे रहेगा। जिसके बारे में बात कर रहे हो, उससे मेरी एक ही बार मुलाकात हुई है। उनकी बातों से एक ही बात समझ में आई कि दे हैव साॅफ्ट कार्नर फॉर यू। सॉफ्ट कार्नर तुम्हारे लिए हमेशा से ही रहा है।
 

फिरोज- वो तो रहा ही है, लेकिन आज नहीं है न बॉस।
पुनीत- आज भी है।
 

फिरोज- आज नहीं है। वहीं जोगी ने कह दिया कि ये लोग आए हैं, एक छोटे से केस के लिए। उस समय आप फोन नहीं किए होते, तो मेरी तो बेइज्जती हो जाती।
पुनीत- भई, मैंने बचाया न...
 

फिरोज- आपने बचाया, लेकिन जिसके लिए हमने इतना किया, वह आदमी कहता है ये लोग आए हैं। मतलब हम लोगों की श्रेणी क्या हो गई... ये लोगों की हो गई।
पुनीत- अरे यार तुम न.....
 

फिरोज- आदमी क्यों मरता है, सिर्फ इज्जत के लिए न...
पुनीत- सिंपल सी चीज समझ ले। तेरा कॅरियर बनने के पहले बिगड़ जाएगा। ये लोग आगे बढ़ जाएंगे। क्यों अपन ऐसी-तैसी कराएं। तुम समझ नहीं सकते, तुम्हें कहां-कहां से ट्रैप कर लिया गया है। तुमको बुलाने का मकसद दूसरा है। तुमको सेव कर दूंगा मैं। समझ में आया। मेरे को सेव करने वाले 50 लोग बैठे हैं।
 

फिरोज- हां सही बात है। सवाल ही नहीं उठता।
पुनीत- पावर में हैं। नहीं होते पावर में तो वही हालत मेरी भी होती।
 

फिरोज- आप बताओ, उसका मैं क्या कर सकता हूं। आप बताओ न मेरे को।
पुनीत- देखो मेरी बात मानो, राजनीति में इगो….
 

फिरोज- इगो…जैसा कुछ है ही नहीं। आप जानते हो। अपन लोग लेबर टाइप काम करते हैं।
पुनीत- ये सब कुछ थोड़ा किनारे रखो अभी, मेरी बात सुनना, जो मुझे समझ में आता है। शांत बैठो थोड़ा।
 

फिरोज- मैं शांत हूं भैया। मेरी तरफ से ऐसा कुछ भी नहीं है, जैसा आप सोच रहे हो। आपको किसी ने कुछ बोला होगा, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं है। मैं जो वहां गया था, दूसरे काम से गया था।
पुनीत- तू किसी भी काम से गया होगा, लेकिन एमआरपी मैटर है न।
 

फिरोज- मैं कुछ भी क्यों करूंगा? एमआरपी तो खुद भी नाराज है बॉस। मैं कल भी बैठा था।
पुनीत- पप्पू फरिश्ता किसी का नहीं हो सकता। मेरे को ऐसी-ऐसी बातें बोलकर गया। तुम्हारे बारे में, सबके बारे में, जिसे मैं बता नहीं सकता। मुझे सब याद है। मैंने जिसे दोस्त मान लिया फिर....(अश्लील शब्द) दुनियादारी। मैं जिसके मुंह से सुनुंगा, उस पर भरोसा करूंगा। यदि ज्यादा भरोसा कर लिया, तो मैं भी डूब जाऊंगा। ऐसी-ऐसी चीजें बोलकर गया। तुम्हारे बारे में, हेमंत के बारे में, बघेल के बारे में, जिसे मैं तुमको बता ही नहीं सकता।
 

फिरोज- ये किस टाइप का गेम है... इसका भई?
पुनीत- देखो तुम समझ लो, उसका सीधा गेम है। वह क्या कर रहा है, तुमको महसूस होता है? सीधा गेम है। मुझे शक हुआ, तो मैंने बुलाया। मुझे सब बता कर गया। मुझे सब पता है। बहुत सी चीजें मैं सीधा बोल नहीं रहा हूं। मैं तुम्हारे मुंह से सुनुंगा।
 

फिरोज- नहीं मेरी तरफ से तो कुछ भी नहीं है। आप ये मानकर चलो कि मेरे तरफ से एक्स, वाई, जेड कुछ भी नहीं है।
पुनीत- तो फिर तुम लोग समझ नहीं पा रहे हो कि कौन तुम्हारे कंधे पर बंदूक रखकर चला रहा है।
 

फिरोज- मोहरा तो बनाएगा कोई न कोई। मेरी नाराजगी दोनों बाप-बेटों से हैं। इनके पास जो रिकाॅर्डिंग हैं, वह मंतूराम पवार और अजीत जोगी की बातचीत की है, जिसमें कहा जा रहा है कि हमने सीएम से बात कर ली है, तुम्हें लाल बत्ती मिल जाएगी।
पुनीत- जो सॉफ्ट कार्नर हैं तुम्हारे लिए आज भी, वह किसी का नहीं हो सकता। उस समय मैंने संजीव को भी बोला।
 

फिरोज- उस समय था, नो डाउट।
पुनीत- तुमने एक चीज सुन लिया। ये मेरे साथ हमेशा होता है। सुन लेना, कैसे, मेरी प्रमोशन की फाइल चल रही है। हाउस से फोन हो गया। हाउस के अधिकारी मेरी फाइल को रोक रहे हैं, यह मुझे पता है। हाउस के अधिकारी ने मुझे कहा कि फलाने ने मुझे फोन किया है। मैंने कहा मैं क्या करूं भाई साहब? तुमको मैंने पहले भी एग्जाम्पल कोट किया है। मैं क्या करूं बता मेरे को? मैं रोड पर बैठ जाऊं, जाना बंद कर दूं या दुश्मनी पैदा कर लूं।
 

फिरोज- ये तो पारिवारिक है न।
पुनीत- पारिवारिक नहीं है। तुम्हारा भी परिवार ही है।
 

फिरोज- अपन मानते हैं न भाई, लेकिन ये लोग नहीं मानते न...
पुनीत- मेरी एक चीज सुन। किसी अधिकारी ने बोला। एक होटल में जुआ चल रहा था। बोला पुनीत को भी इनवाॅल्व कर लो, उसकी ऐसी की तैसी करनी थी हमने कर दी। अब इसमें क्या बोलोगे तुम? तुम न एग्रेसिव मैन हो।
 

फिरोज- एग्रिसिव नहीं हूं मैं।
पुनीत- मैं बता रहा हूं तेरे को। तेरा गुरू, गुरू ही रहेगा। बात मान ले मेरी तू, तेरा गुरू कोई दूसरा नहीं हो सकता। हां यह जरूर है कि आपस में लाइन आॅफ डिमार्केशन कभी नहीं बनाई इसलिए चीजें काॅमन हो गई हैं। डिमार्केशन का मतलब यह होता है कि तेरी-मेरी दोस्ती के बीच में....मैंने ये नहीं बोला कि मैं इसका रिश्तेदार हूं, वैसी यहां भी है। जहां तक मेरी समझ में आता है। भाई-भाई की आपस में नहीं जमती, मेरे भाई से मेरी कभी नहीं पटती। लड़ाई होती है हमारी।
 

फिरोज- हां सही बात है। भाई की भाई से नही पटती।
पुनीत- इसका मतलब क्या है। सोच के देख न.... तू मत कर फालतू की हरकत।
 

फिरोज- आपको जिसने भी बोला है, गलत है। मैं इस पर आगे बढ़ रहा हूं ऐसा कोई कह रहा है, तो गलत है।
पुनीत- मैं एक चीज चाहता हूं बस, तू मेरी बात मान। तेरा फ्यूचर में गेम होगा इसकी मैं गारंटी दे रहा हूं। समझ में आया। साॅल्व आउट करो न। खाया पिया तो तुमने वहीं से है।
 

फिरोज- भई एक मिनट लगता अमित को.... बोलने में कि तुम्हारी नाराजगी क्या है? मुझे दिल्ली बुलाया... कहा कि तुम आकर बात करो। मैं वहां गया।
पुनीत-  मैं मीडिएटर बन जाऊं।
 

फिरोज- नहीं, कोई जरूरत नहीं है। आप काहे इन लोगों के सामने झुकोगे।
पुनीत- मेरी लाइफ में झुकने का कोई काॅन्सेप्ट नहीं है। मेरी लाइफ में सिर्फ एक ही चीज है। आपस में सब मिल जुलकर चले तो दो पैसा तुम भी कमाओ, दो पैसा हम भी कमाएं।
 

फिरोज- पैसा कमाने की कभी कोई ललक कभी रही है क्या? मुझे दुख इस बात का हुआ कि ये आदमी ऐसा सोचना शुरू कर दिया।
पुनीत- मेरे विषय में सोच न... मैं कितना खून के घूंट पी रहा हूं। तू रिश्तेदार नहीं है, करीबी हो सकता है। मैं तो रिश्तेदार हूं। फिर, जब भी तकलीफ हुई है। उस आदमी की बुरी तरह से भद्द पिटी है। आज भी वह आकर पैर छूता है, माफी मांगता है। कहता है साहब बचा लो। मेरी बात मान लो....
 

फिरोज- ये आदमी नहीं सुधरेगा। चार-पांच बार हो गया। छोटे के साथ तो कई बार हो गया। आप जो कहते हो उतना ही काम करता हूं, लेकिन आज के जो… लोग आए हैं, उनके सामने बेइज्जती करते हो।
पुनीत- बिसेन को मैं 10 हजार महीने पर नौकरी पर रखा था। पीछे मकान बनाने के लिए। दस बार चक्कर काटता था, मेरे से पूछता था कि कब से नौकरी पर आ जाऊं, लेकिन देख आज कहां पहुंच गया। 2007-08 की बात कर रहा हूं। आज वह कहां पहुंच गया। एक काम के लिए नहीं बोलता। मैं उल्टा लटक जाऊंगा। इतना बूता है मेरे में। मार दूंगा मैं उसको पकड़ कर, लेकिन नहीं बोलूंगा मैं उसे। कुछ सिचुएशन होती है बॉस, जो आपका काम कराती है। मुझे परमिट करेगा, तो मैं सामने आऊंगा। मेरे को दोनों से फायदे हैं। आज 12 विधायक, 20 विधायक, 25 विधायक जो भी करोगे उनकी सहमति से करोगे तो मजा आएगा। नहीं करोगे तो स्टैंड नहीं हो पाएगी बात। आज मेरी औकात जीरो है। इसलिए देखो बॉस ऐसा है, दुनिया में हर किस्म के लोग हैं, लेकिन भरोसे करने वाले दो तीन ही मिलेंगे। एक चीज बताता हूं तेरे को। सागौन बंगला और सिविल लाइन में डिफरेंस एक ही चीज का है। सागौन बंगला पुराने लोगों को कभी भूलता नहीं है। तुमको गलतफहमी हो गई है। सिचुएशन थोड़ी सी इधर-उधर हुई है। एक काम करें, अगर तू परमिट करे, तो मैं इनको बुला लेता हूं।
 

फिरोज-  दिल्ली बुलाकर ये आदमी नहीं मिला मुझे। मैं टिकट कराकर दिल्ली गया और यह बाॅम्बे निकल गया। दुख नहीं होगा मुझे आप बताओ।
पुनीत- तू बात ऐसी करता है... मैं इकोनामी क्लास में गया। लोग तो चाहेंगे कि तुम जितने करीब जाओ तुम्हें दूर करें। तेरी क्या टेंशन है। तूने 12 हजार कि टिकट कराई यही न। उस दिन मैंने कसम खायी कि मैं इनके साथ जाउंगा, लेकिन टिकट अपने पैसे से कराऊंगा। रिलेशन खराब करने में दो मिनट लगता है। मैं बदतमीजी पर उतर जाता। धैर्य का परिचय देना पड़ता है कहीं न कहीं। आज तुम्हारे धैर्य की परीक्षा है। बहुत सारे काम करने हैं। मैंने इतनी सारी प्लानिंग कर रखी है। तुम्हें भी धैर्य का परिचय देना होगा।
 

फिरोज- इनके यहां पूरा सिस्टम बिगड़ गया है। पूरे लोग अलग हो गए हैं। आज इनके कोई साथ नहीं है। जितने भी करीबी थे, सब हट गए हैं। केवल जो पद की लालच में हैं, वही इनके साथ हैं।
पुनीत- थोड़ा धैर्य कर ले।
फिरोज- मेरे लिए कोई बात नहीं है। मैं धैर्य रखा हूं बाॅस।

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