युवा महोत्सव / रॉक बैंड में इलेक्ट्रॉनिक इंस्ट्रूमेंट के बिना 62 पारंपिक वाद्ययंत्रों के साथ प्रस्तुति; समापन आज

रिखी छत्री के दुर्ग से आए बैंड ने पारंपरिक वाद्यों के साथ परफॉर्म किया
भौंरा (लट्‌टू) चलाने की स्टेट चैंपियनशिप भी इस युवा महोत्सव में हुई, देखें आगे की स्लाइड -> भौंरा (लट्‌टू) चलाने की स्टेट चैंपियनशिप भी इस युवा महोत्सव में हुई, देखें आगे की स्लाइड ->
युवाओं के ग्रुप इस तरह मस्ती करते रहे, देवी के गीतों पर झूमते रहे युवाओं के ग्रुप इस तरह मस्ती करते रहे, देवी के गीतों पर झूमते रहे
स्थानीय खेलों का भी आयोजन हुआ अलग-अलग आयू वर्ग में फुगड़ी खेली गई स्थानीय खेलों का भी आयोजन हुआ अलग-अलग आयू वर्ग में फुगड़ी खेली गई
यह तस्वीर युवा महोत्सव के माहौल को बताने के लिए काफी है यह तस्वीर युवा महोत्सव के माहौल को बताने के लिए काफी है
बस्तर के पारंपरिक नृत्यों की प्रस्तुतियां भी हुई बस्तर के पारंपरिक नृत्यों की प्रस्तुतियां भी हुई
पारंपरिक परिधानों में युवाओं ने अपनी संस्कृति की झलक दिखाई पारंपरिक परिधानों में युवाओं ने अपनी संस्कृति की झलक दिखाई
स्थानीय ही नहीं छत्तीसगढ़ के युवाओं ने कथक जैसे मशहूर डांस फॉर्म में भी परफॉर्म किया स्थानीय ही नहीं छत्तीसगढ़ के युवाओं ने कथक जैसे मशहूर डांस फॉर्म में भी परफॉर्म किया
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  • छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में आयोजित है तीन दिवसीय युवा महोत्सव
  • लोक कला और स्थानीय खेलों के नाम रहा युवा महोत्सव का आखिरी दिन 

Dainik Bhaskar

Jan 14, 2020, 06:20 PM IST

रायपुर. छत्तीसगढ़ के रायपुर शहर में युवा महोत्सव आयोजित है। मंगलवार को इस तीन दिवसीय महोत्सव का आखिरी दिन रहा। आयोजन स्थल साइंस कॉलेज ग्राउंड में बने डोम और प्रतियोगिता जोन में कहीं कोई ग्रुप बनाकर नाचता दिखा तो कहीं सेल्फी लेने का दौर चलता दिखा। ग्राउंड में बने मुख्यमंच पर अलग-अलग रॉक बैंड ग्रुप ने अपनी प्रस्तुतियां दी। इनमें सबसे खास दुर्ग जिले के कलाकारों की प्रस्तुति रही। इस ग्रुप के बैंड में एक भी इलेक्ट्रॉनिक वाद्य यंत्र नहीं था। छोटे बड़े 62 वाद्य यंत्रों के साथ कलाकारों ने राज्यगीत अरपा पैरी के धार, सारे जहां से अच्छा जैसे गीत बजाए। रीखी छत्री के इस बैंड के बारे में उन्होंने बताया कि उनका परिवार हमेशा से ही लोककला से जुड़ा रहा, इसलिए पारंपरिक वाद्ययंत्रों को सहेजने का काम कर रहे हैं। ढ़ोलक, नगाड़ा, शहनाई के अलावा इनके पास मटके, बांस और लोहे से बने स्थानीय वाद्ययंत्रों का कलेक्शन है। 


यह प्रतियोगिताएं भी हुईं 
हारमोनियम पर धुनों की प्रस्तुति में बस्तर के देवेन्द्र सिंह, जशपुर के राजेन्द्र प्रेमी और दुर्ग के समीर शर्मा ने छत्तीसगढ़ी लोकधुनों की प्रस्तुति दी। बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के प्रियांशु पाण्डेय, बेमेतरा के रोशन कुमार, कोरिया की पूर्णिमा रजवाड़े, राजनांदगांव के ईश्वर दास महंत, सूरजपुर के मोती लाल सारथि, सरगुजा के विकास कुमार, दंतेवाड़ा के सागर कश्यप, रायगढ़ के आकाश तांडी तथा धमतरी के धर्मेन्द्र कुमार ने भी हारमोनियम पर अपनी प्रस्तुतियों से श्रोताओं का दिल जीता। राज्य स्तरीय लोकगीतों की प्रतियोगिता में राजनांदगांव और बालोद के कलाकारों ने प्रथम स्थान हासिल किया। 15 वर्ष से 40 वर्ष आयु वर्ग में 25 जिलों के दलों ने अपनी प्रस्तुति दी। इसमें राजनांदगांव जिले ने प्रथम, गरियाबंद ने द्वितीय और रायपुर जिले ने तृतीय स्थान हासिल किया। 40 वर्ष से अधिक आयु वर्ग में 15 जिलों के कलाकारों ने लोकगीत प्रस्तुत किए। इस वर्ग में बालोद के कलाकारों को पहला, कोरबा को दूसरा और सरगुजा को तीसरा स्थान मिला। 
 

हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत स्पर्धा में राजनांदगांव जिले के किशन कुमार और कोरबा के कन्हैया लाल वैष्णव अपने-अपने वर्ग में प्रथम स्थान पर रहे। कर्नाटक शास्त्रीय संगीत में 15 से 40 वर्ष आयु वर्ग में बिलासपुर की व्ही.सी.आर.एल. वैष्णवी प्रथम स्थान पर रहीं। दो वर्गों में आयोजित हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत में 15 से 40 वर्ष आयु वर्ग में राजनांदगांव जिले के किशन प्रकाश ने प्रथम, सरगुजा के  कुंदन मिश्रा ने द्वितीय और बालोद जिले की बरखा गौर ने तृतीय स्थान हासिल किया। वहीं 40 वर्ष से अधिक आयु वर्ग में कोरबा के कन्हैया लाल वैष्णव पहले, कोरिया के नंदलाल दूसरे तथा कबीरधाम जिले के जलेश चंद्रवंशी तीसरे स्थान पर रहे। तबला वादन में 15 वर्ष से 40 वर्ष आयु वर्ग में राजनांदगांव के देवेश कुमार कंवर ने प्रथम स्थान हासिल किया। सभी प्रतियोगिताओं के विजेताओं को शाम 5 बजे से  होने वाले समापन समरोह में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सम्मानित करेंगे। 

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