3 ने छोड़ा काम, अब मदर एंड चाइल्ड केयर यूनिट दो डॉक्टरों के भरोसे, प्रसव केस रेफर

Rajnandgaon News - दिन-ब-दिन मेडिकल कॉलेज अस्पताल की हालत खस्ता होती जा रही है। अब तक मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों के भरोसे मदर एंड...

Feb 14, 2020, 07:45 AM IST
Rajnandgaon News - chhattisgarh news 3 left work now mother and child care unit relied on two doctors delivery case referrer

दिन-ब-दिन मेडिकल कॉलेज अस्पताल की हालत खस्ता होती जा रही है। अब तक मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों के भरोसे मदर एंड चाइल्ड केयर का संचालन किया जा रहा था, यह भी खतरे में आ चुका है। बदइंतजामी के कारण गायनिक डिपार्टमेंट के तीन डॉक्टर एक के बाद एक नौकरी छोड़कर जा चुके है। सिर्फ दो डॉक्टरों के भरोसे 100 बिस्तर का यूनिट चल रह रहा है, डॉक्टरों की कमी का खामियाजा गर्भवतियों को भुगतना पड़ रहा है। हर रोज थोक में प्रसव केसेज को रेफर किया जा रहा है, या फिर लामा बनवाया जा रहा है।

इतना सब कुछ होने के बाद भी मेडिकल कॉलेज अस्पताल प्रबंधन नए डॉक्टरों की ज्वाइनिंग के लिए ध्यान नहीं दे रहा है। जूनियर रेसीडेंट की कमी भी काफी खल रही है। नर्सेस है वह काम संभाल पाने में नाकाम हो रही है। जानकारी अनुसार इन दिनों अस्पताल में प्रसव के लिए आई गर्भवतियों को तरह-तरह की परेशानी बताकर रेफर या फिर दूसरे अस्पताल भेज दिया जाता है। कभी गर्भ में पल रहे शिशु के शरीर में नाल फंसने को वजह बताया जाता है तो कभी गर्भवती के ब्लड में दिक्कत को समस्या बताई जाती है। इस तरह भ्रमित करने पर परिजन डर जाते है वे खुद भी खुद निजी अस्पतालों में जा रहे है। स्टॉफ की कमी के कारण ही उपजे घटना के कारण आए दिन परिजन हंगामा कर रहे है।

24x7 सेवा देने के लिए पर्याप्त डॉक्टरों की है जरूरत

गौरतलब है कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के मद से बने मदर एंड चाइल्ड केयर यूनिट का संचालन मेडिकल कॉलेज व अस्पताल के डॉक्टर कर रहे है। क्योंकि यहां बिल्डिंग तो बनाई गई, लेकिन स्टाफ की पूर्ती के लिए अफसर ध्यान ही नहीं दे रहे है। लगातार पत्राचार के बाद भी यूनिट के स्वीकृत 84 पोस्ट पर अब तक भर्ती नहीं की गई है। मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों के काम छोड़ने व पर्याप्त स्टाफ नहीं होने के कारण अब यूनिट का संचालन खतरे में पड़ गया है। थोक में प्रसव केस यहां से रेफर हो रहे हैं।

अन्य सेवाओं पर भी ध्यान नहीं दे रहा प्रबंधन

इमरजेंसी मेडिकल सुविधा के अलावा मदर एंड चाइल्ड केयर यूनिट में पैथोलॉजी संग्रहण केंद्र, ओपीडी पर्ची काउंटर आदि की भी व्यवस्था करनी है, क्योंकि गर्भवती के साथ आए परिजनों को इन सभी कार्यों के लिए अस्पताल भवन तक दौड़ लगानी पड़ती है। मेडिकल कॉलेज अस्पताल प्रबंधन इस ओर भी ध्यान नहीं दे रहा है।

नए डॉक्टरों की भर्ती के लिए हम प्रयास कर रहे हैं


सुविधा नहीं: पांच पद रिक्त होने से ओपीडी में नहीं मिल रहे गायनिक डॉक्टर

5 पद रिक्त होने के कारण ओपीडी में नहीं मिल रहे गायनिक डॉक्टर।

हर महीने आैसत 700 प्रसव, अब कम हो गए आंकड़े

मेडिकल कॉलेज अस्पताल में महीने में करीब 700 प्रसव कराए जाते रहे। राजनांदगांव के ज्यादातर स्वास्थ केंद्र में सीजर केसेज हैंडल नहीं किए जाते ऐसे केसेज को सीधे मेडिकल कॉलेज अस्पताल में ही रेफर कर दिया जाता है। इससे अस्पताल में बर्डन बढ़ा है। यहां आने के बाद भी गर्भवतियों को रेफर किया जा रहा है, इससे काफी परेशानी हो रही है।

जानिए, गायनिक वार्ड में 2 साल में कितना बढ़ा दबाव

इलाज वर्ग 2017-18 2018-19

सामान्य प्रसव 5976 6426

सीजर प्रसव 2531 2297

गर्भपात 279 190

महिला नसबंदी 592 637

(10 मई 2019 तक की रिपोर्ट के अनुसार)

इस फोटो से समझिए अस्पताल में किस तरह है बदइंतजामी।

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