4 करोड़ का टर्फ खराब, चारों ओर जमी मिट्‌टी की परत, अफसरों की दलील- फंड नहीं मिला

Rajnandgaon News - प्रदेश के पहले अंतरराष्ट्रीय हॉकी स्टेडियम में लगा एस्ट्रोटर्फ रखरखाव के अभाव में खराब होने लगा है। पांच साल में...

Nov 11, 2019, 07:56 AM IST
प्रदेश के पहले अंतरराष्ट्रीय हॉकी स्टेडियम में लगा एस्ट्रोटर्फ रखरखाव के अभाव में खराब होने लगा है। पांच साल में एक बार भी इसकी सफाई नहीं हुई है।

इस वजह से टर्फ में चारों ओर मिट्‌टी की परत जम गई है। कुछ जगहों पर टर्फ उखड़ भी गया है। जबकि एक माह के बाद स्व. महंत राजा सर्वेश्वर दास अखिल भारतीय हॉकी टूर्नामेंट होना है। टर्फ की हालत ऐसी ही रही तो यहां टूर्नामेंट कराना मुश्किल होगा। देश की नामी टीमें एेसे खस्ताहाल टर्फ में नहीं खेलेंगी। टर्फ में पानी का छिड़काव करने लगाए गए स्प्रिंकलर भी खराब हो गए हैं।

वॉटर फिल्टर मशीन भी बंद पड़ी हुई है। खेल संगठनों की ओर से बीते वर्ष हुए टूर्नामेंट के दौरान ही टर्फ की तकनीकी रूप से सफाई कराने शासन स्तर पर पत्राचार किया गया था पर अब तक कोई पहल नहीं हुई है। प्रदेश व जिला हॉकी संघ की ओर से खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सहायक संचालक के माध्यम से संचालनालय स्तर पर संपर्क कर टर्फ की हालत बताते हुए सफाई कराने की मांग रखी गई थी।

मेंटेनेंस नहीं: मैदान में लगे स्प्रिंकलर खराब, फिल्टर मशीन बंद

राजनांदगांव.टर्फ में मिट्‌टी जमी हुई है। पानी डालते ही कीचड़ हो जाता है। खिलाड़ी फिसलकर चोटिल होते हैं।

स्वीपिंग मशीन भी नहीं

खेल संघों की ओर से मांग किए जाने पर खेल विभाग की ओर से खानापूर्ति करते हुए एक ऐसी कंपनी को सफाई का जिम्मा दे दिया गया था, जिनके पास टर्फ की सफाई के लिए स्वीपिंग मशीन ही नहीं था। कंपनी ने पानी का छिड़काव कर दो दिन तक सिर्फ सफाई का दिखावा किया पर मिट्‌टी की परत नहीं निकाल पाए। खानापूर्ति को लेकर खेल संगठनों ने आपत्ति भी की थी।

अब लगेगा 10-15 लाख

टर्फ की नियमित सफाई नहीं होने का नतीजा यह है कि अब इसकी सफाई कराने के लिए 10 से 15 लाख रुपए तक खर्च करने पड़ेंगे। इसके लिए स्पोटर्स के क्षेत्र में काम करने वाली कंपनी को सफाई का ठेका देना पड़ेगा। टर्फ की सफाई को लेकर राज्य में ऐसी कोई संस्था नहीं है। हैदराबाद, मंुबई, दिल्ली जैसे बड़े शहरों में ऐसी कंपनियां कार्यरत हैं।

अब तो उखड़ने लगी टर्फ

करोड़ों की लागत से लगाई गई यह टर्फ उखड़ने भी लगी है। खेत की तरह इसमें दरारें देखने को मिल रही है। पाइप बिछाने के चक्कर में कुछ जगहों पर टर्फ को ही नुकसान पहुंचा दिया गया है। खेल संगठनों के पदाधिकारियों का कहना है कि टर्फ की हालत खराब हो गई है। बड़ी टीमें पहले खेल मैदान की रिपोर्ट लेती हैं, इसके बाद ही मैच खेलने की सहमति देते हैं। अभी टर्फ की खस्ता हालत है।

स्पर्धा को लेकर भी संशय

हर साल दिसंबर के आखिरी सप्ताह से अभा हॉकी स्पर्धा की शुरुआत होती है पर इस बार प्रशासन की ओर से अब तक तैयारी ही शुरू नहीं की गई है। इस वजह से स्पर्धा होगी या नहीं? इस पर भी संशय की स्थिति बनी हुई है। जबकि मैच की तैयारी एक माह पहले से ही शुरू हो जाती है। अब तक तैयारी को लेकर एक बैठक तक नहीं हुई है। इसे लेकर पदाधिकारी फिक्रमंद हैं।

पत्राचार किया गया है


अफसर ध्यान नहीं दे रहे


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