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जिले में 6 गोसेवा संस्था, हर साल अनुदान फिर भी मवेशियों की देखरेख में कोताही

एक वर्ष पहले
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{मवेशियों को पालने में संस्थाएं कर रही मनमानी

जिले में पंजीकृत छह गोसेवा संस्था व गोशाला का संचालन किया जा रहा है। सालाना शासन से लाखों रुपए का अनुदान, सुविधा लेने के बाद भी संस्थाएं मवेशियों की देखरेख में कोताही बरत रही है। गोशाला में चारा पानी से लेकर चिकित्सीय सुविधा का भी अभाव देखा जा रहा है। इसके बाद भी पशु चिकित्सा विभाग के अधिकारी कार्रवाई करने ध्यान नहीं दे रहे है। जबकि गाइडलाइन के मुताबिक विभाग के अफसरों को गोशाला का निरीक्षण करना है, लेकिन यहां अधिकारी निरीक्षण के नाम पर कोताही बरत रहे हैं।

जानकारी के मुताबिक गोशाला संचालकों को मवेशियों के संख्या के आधार पर हर साल अनुदान दिया जाता है, इसके अलावा जरूरत पड़ने पर जमीन भी उपलब्ध कराई जाती है। राजनांदगांव में भी ऐसा ही हुआ है, यहां करोड़ों रुपए कीमत की शासकीय भूमि का आवंटन गोसेवा संस्था को की गई है, ताकि घुमंतू मवेशियों की देखभाल की जा सके। लेकिन यहां ऐसा हो नहीं रहा है। अनदेखी की जा रही है।

इधर, शहरी सड़कों पर मवेशी राज: पंजीयन के लिए गोसेवा संस्था को नियमावली का पालन करना होता है, तय फार्मेट में जानकारी शासन को देनी पड़ती है। गोशाला में घुमंतू मवेशियों को रखा जाना है, उनकी सेवा की जानी है। इसके अलावा पुलिस द्वारा बरामद किए गए मवेशियों को भी इन्हीं संस्थानों में रखना है, लेकिन संस्थान ऐसा नहीं कर रही है। यदि करती तो राजनांदगांव की सड़कों पर मवेशी राज नहीं होता। इस ओर ध्यान देने की जरूरत है।

कम्प्यूटर ऑपरेटर लगा रहा इंजेक्शन

राजनांदगांव| बीते एक मार्च को दिग्विजय स्टेडियम के बाजू में संचालित गौशाला पिंजरा पोल में मवेशियों की देखरेख में लापरवाही बरतने के मामले का खुलासा हुआ था। इस दौरान पता चला था कि मवेशियों के मृत होने पर पोस्टमार्टम तक नहीं कराया जाता। चार माह से यहां पशु चिकित्सा विभाग के डॉक्टर झांकने नहीं आए हैं। गायों को इंजेक्शन लगाने का काम कंप्यूटर ऑपरेटर द्वारा किया जा रहा है। यहां तक की गोसेवक मवेशी छोड़ने आते है तो उन मवेशी की जिम्मेदारी लेने से संस्थाकर्मी आनाकानी करते है। इस मामले की लिखित शिकायत भी की गई थी। जिसके बाद रायपुर से अधिकारियों की टीम गोशाला का निरीक्षण करने पहुंची थी। विभागीय अफसर जांच के नाम पर खानापूर्ति कर रहे हैं।

{कार्रवाई नहीं कर रहा पशु चिकित्सा विभाग

{गोसेवा संस्थान में मवेशियों की देखरेख में लापरवाही बरती जा रही है?

-हम समय-समय पर निरीक्षण करते है, शहर के नजदीकी संस्थानों में चिकित्सीय सेवा भी उपलब्ध कराई जाती है।

{कार्रवाई क्यों नहीं करते?

-गोसेवा संस्थान को अनुदान गठित सहकारी समिति की ओर से दिया जाता है, ऑडिट भी वहीं के अधिकारी करते है, हम सीधे कार्रवाई नहीं कर सकते।

{स्टेडियम के बगल में संचालित गोशाला मामले में जांच के नाम पर खानापूर्ति की जा रही है?

-चूंकि मामला गंभीर था, इसलिए डायरेक्टर कार्यालय को जानकारी दे दी गई थी, अधिकारी निरीक्षण से पहले हमें जानकारी नहीं दी थी, बाद में पता चला।

{जांच में क्या पता चला?

-निरीक्षण करने वाले अधिकारी को जांच में क्या मिला, इसकी जानकारी हमें नहीं दी गई है।

हम सीधे कार्रवाई नहीं कर सकते

डॉ. सत्यजीत मेश्राम, प्रभारी, उप संचालक, पशु चिकित्सा सेवाएं**

राजनांदगांव. स्टेडियम के पास स्थित गोशाला में इस तरह रखे हैं मवेशी।
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