700 लोगों ने भरा संकल्प पत्र, कहा- मृत्यु के बाद हमारी आंखें दूसरों को दुनिया दिखाएगी

Rajnandgaon News - नेत्रदान में पूरी आंख नहीं िनकाली जाती, कॉर्निया का ट्रांसप्लांट होता है भास्कर न्यूज | राजनांदगांव/कवर्धा/...

Bhaskar News Network

Sep 15, 2019, 07:45 AM IST
Rajnandgaon News - chhattisgarh news 700 people filled the pledge saying after death our eyes will show the world to others
नेत्रदान में पूरी आंख नहीं िनकाली जाती, कॉर्निया का ट्रांसप्लांट होता है

भास्कर न्यूज | राजनांदगांव/कवर्धा/ बालोद

जिले में 25 अगस्त से 8 सितंबर तक नेत्रदान पखवाड़ा मनाया गया। इस दौरान ऐसे 39 लोगों का चिन्हांकन किया गया, जो किसी ने किसी दुर्घटना में अपनी एक आंख खो चुके है। इसके अलावा एक व्यक्ति की दोनों आंखों की रोशनी चली गई है। इन मरीजों का इलाज के लिए स्वास्थ्य विभाग योजना बना रहा है। पखवाड़े भर में करीब 700 लोगों ने संकल्प पत्र भरकर कहा कि मृत्यु के बाद उनकी आंखों से दूसरे लोग दुनिया देख पाएंगे।

नेत्रदान पखवाड़े के दौरान स्वास्थ्य विभग बालोद व कवर्धा जिले में एक भी दृष्टिहीन को दुनिया नहीं दिखा सका। इन 15 िदनों में किसी का भी काॅर्निया ट्रांसप्लांट नहीं किया गया। बालोद जिले में 53 व कवर्धा जिले में 18 लोग दृष्टिहीन हैं। जिस बालोद जिले में नेत्रकांड में हुआ वहां पखवाड़े में सिर्फ औपचारिकता निभाई गई। 2011 को सितंबर में 300 लोगों का मोतियाबिंद ऑपरेशन किया गया था। इसमें से 49 लोगों की आंखें संक्रमण के कारण खराब हो गई थी। कवर्धा जिले में तो मोतियाबिंद के 68 मरीज मिले हैं, यहां एक भी नेत्र रोग विशेषज्ञ नहीं है। यहां के मरीजों को ऑपरेशन के लिए राजनांदगांव, बिलासपुर व रायपुर जाना पड़ता है।

किसी न किसी दुर्घटना में 39 लोगों की एक आंख की रोशनी गई, पखवाड़े के दौरान किया चिन्हांकन


राजनांदगांव जिला

700 लोगों ने लिया संकल्प पत्र

01 व्यक्ति है दृष्टिहीन

1873 मरीजों की जांच की जा गई, 05 नेत्र चिकित्सक है जिले में

156 लोगों की अांखों का आॅपरेशन किया गया

65 स्कूलों में नेत्र परीक्षण किया गया

5749 बच्चों की आंखों की जांच की गई

191 बच्चों में दृष्टि दोष पाए गए

39 लोग अंधत्व से पीड़ित हैं जिले में

छूटे मरीजों का भी हाेगा ऑपरेशन

156 मरीजों का ऑपरेशन हुआ: नोडल अधिकारी डॉ. एमके भुआर्य के मुताबिक पखवाड़े के दौरान 156 लोगों का नेत्र ऑपरेशन किया गया। जो लोग छूट गए हैं, उनका चिन्हांकन किया जा रहा है। ऑपरेशन मेडिकल कॉलेज अस्पताल में कराया जाएगा।

लोग हो रहे जागरूक, नेत्रदान भी हुआ: पखवाड़े के दौरान लोगों को जागरूक करने के लिए शहर समेत जिले भर में रैलियां निकाली गई। जगह-जगह पम्फ्लेट बांटे गए। बीते कुछ वर्षों में जिेल में नेत्रदान को लेकर लोगों में जागरूकता आई है।


कवर्धा जिला

30 लोगों ने नेत्रदान का शपथ पत्र भरा

18 लोग हैं दष्टिहीन

2342 लोगों की आंखों की जांच हुई, इसमें 421 बच्चे भी शामिल

68 मरीज जांच में मोतियाबिंद के मिले

186 लोगों को चश्मे बांटे गए

221 जगहों पर शिविर लगाए गए, जहां डाॅक्टरों ने आंखों की जांच की। परामर्श भी दिया।

14 नेत्र सहायक अधिकारियों ने दी सेवाएं

नेत्रदान के लिए कोई नया प्रयास नहीं

अनुबंधित अस्पतालों में कराया जाएगा इलाज: अंधत्व निवारण के नोडल अधिकारी डॉ. संजय खरसन ने बताया कि नेत्र रोगियों को चिन्हांकित किया गया है। ऑपरेशन योग्य नेत्र रोगियों का इलाज अनुबंधित अस्पतालों में कराया जाएगा।

औपचारिकता में निपटा नेत्रदान पखवाड़ा: जिले में नेत्रदान पखवाड़े की औपचारिकता निभाई गई। नेत्रदान के लिए 30 लोगों से घोषणा पत्र भरवाया गया। गांवाें में शिविर लगाकर ऑपरेशन योग्य नेत्र रोगियों को चिन्हांकित किया गया।


बालोद जिला

495 लोगों ने नेत्रदान का शपथ पत्र भरा

53 लोग हैं दृष्टिहीन

45 मरीज मोतियाबिंद के मिले

65 जगह शिविर लगाए गए जिले में

33 जगह जागरूकता रैली निकाली गई

29 डाॅक्टरों ने अपनी सेवाएं दी

02 नेत्र चिकित्सक, 27 नेत्र सहायक अधिकारी हैं जिले में

1406 लोगों की आंखों की जांच की गई

जिले में बांटे गए थे 500 संकल्प पत्र

ऑपरेशन के लिए मरीजों को दिया समय: मोतियाबिंद के 45 मरीजों का इलाज 18 सितंबर के बाद किया जाएगा। मरीजों को आॅपरेशन के लिए एक निश्चित समय दिया जाएगा। सीएमएचओ की अनुमति से बालोद जिला अस्पताल में ऑपरेशन होगा।

जिले में जागरूकता की कमी : जिले में 8 नगरीय निकाय क्षेत्र व 421 ग्राम पंचायत क्षेत्र होने के बावजूद नेत्रदान के लिए 500 आवेदन वितरित किए गए। वहीं सिर्फ 65 जगह शिविर लगाए। जागरूकता को लेकर रैली कम निकली।

भास्कर नाॅलेज

यह है नेत्रदान का तरीका






उम्र की कोई सीमा नहीं: यदि कोई व्यक्ति अपनी आंख दान करने का वचन देता है तो उन्हें केवल उसकी मृत्यु के बाद ही प्राप्त किया जाता है। इसमें उम्र का काेई सीमा नहीं है। 80 साल की उम्र के बाद कई बार आंख दान के लिए अनुपयोगी हो सकती है।

इसकी खरीदी-बिक्री है अपराध: नेत्रदान समाजसेवा का पूरी तरह से स्वैच्छिक कार्य है, जिसके लिए दानदाता या उसके परिवार को कोई पैसा नहीं दिया जाता है, क्योंकि अंगों की बिक्री या खरीद गैर-कानूनी है।

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