निस्वार्थ भाव से उपकार करने वाला ही साधू

Rajnandgaon News - संस्कारधानी में दासीश्याम प्रभु की 20वीं जयंती पर श्याम कुटी परिवार एवं दासीश्याम मंडल का महोत्सव मनाया जा रहा है।...

Bhaskar News Network

Aug 19, 2019, 03:00 PM IST
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संस्कारधानी में दासीश्याम प्रभु की 20वीं जयंती पर श्याम कुटी परिवार एवं दासीश्याम मंडल का महोत्सव मनाया जा रहा है। पर्व के द्वितीय दिवस रविवार पर वृंदावन से आए अनुरागकृष्ण शास्त्री (कन्हैय्या) ने श्री खाटू नरेश श्याम प्रभु के प्रादुर्भाव का विस्तृत वर्णन किया। श्यामकुटी के सत्संग हाल में वृतांत बताते हुए कहा कि बर्बरीक जी ने भगवान कृष्ण द्वारा सुहृदय नाम की प्राप्ति हुई। भगवान श्रीकृष्ण की आज्ञा से ही बर्बरीक महाराज ने संसार के श्रेष्टतम तीर्थ महिसागर संगम से गुप्त क्षेत्र अथवा स्कंध तीर्थ कहा जाता है, को धर्म के श्राप से मुक्त किया।

मगध राज के विजय ब्राम्हण की साधना को सिद्धि प्राप्त कराने के लिए सहायता की और देवी की अराधना करके अतुलित बल प्राप्त किया। उस बल का प्रयोग साधुओं के रक्षण में ही किया। बर्बरीक महाराज के उपकार करने की शैली एक महान संदेश को जन्म देती है। उपकार करने के बदले में मिलने वाली वस्तु को भी उन्होंने अस्वीकार कर दिया और कहा जो निस्वार्थ भाव से उपकार करते हैं वे ही साधु कहलाते हैं। किन्तु स्वार्थ के कारण उपकार करने वाला साधु नहीं अपितु व्यापारी होता है। उनके जीवन में बल का दर्शन, परोपकार व श्रद्धा का दर्शन भी होता है।

माता-पिता का दर्शन किया

शास्त्री ने कहा कि हमने भगवान का दर्शन न किया किन्तु अपने माता पिता का दर्शन हमने किया है। यदि माता-पिता के प्रति पूर्ण श्रद्धा भाव से सेवा भावना है तो सभी तीर्थ एवं देवी देवता दया करते हैं। यदि माता पिता का तिरस्कार करके हमने छत्तीस कोटी के देवी देवता को भी पूजा तो कोई देवी देवता अपना आशीष प्रदान नहीं करते। भक्त पुण्डरिक का देते हुए कहा कि उनके माता पिता की भक्ति से प्रसन्न होते हुए भगवान पण्डरीकनाथ प्रसन्न होकर आज भी एक ईट पर खडे होकर सब भक्तों को दर्शन दे रहे हैं।

जयंती पर्व के अवसर पर निकाली गई शोभायात्रा

जयंती पर्व पर रविवार को दासीश्याम प्रभु की शोभायात्रा श्याम कुटी रामाधीन मार्ग से होते हुए स्टेशन पारा के शक्तिधाम पहुंची। शोभायात्रा में बच्चे, युवतियां, पुरुष महिलाएं सभी अपने गुरूमाँ का गुणगान करते, श्री गुरुमां का जय-जयकार करते, गरबा नृत्य करते हुए पूरे रास्ते भर थिरकते और नृत्य करते रहे। शोभा यात्रा में पूरे रास्ते भर आतिशबाजी व पूजा आरती भी की गई।

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