प्रभु प्राप्ति का सबसे विलक्षण मार्ग शरणागति है: मंदाकिनी

Rajnandgaon News - युग तुलसी मानस मर्मज्ञ रामकिंकर महाराज की शिष्या दीदी मां मंदाकिनी ने राम कथा समापन के अवसर पर विभीषण शरण गति के...

Jan 16, 2020, 07:46 AM IST
Rajnandgaon News - chhattisgarh news asylum is the most unique path to attain god mandakini
युग तुलसी मानस मर्मज्ञ रामकिंकर महाराज की शिष्या दीदी मां मंदाकिनी ने राम कथा समापन के अवसर पर विभीषण शरण गति के रहस्य को खोला। उन्होंने ने बताया कि राम किंकर महाराज ने जिस वैज्ञानिक विश्लेषण विभीषण के संदर्भ में किया और उसे जीव का प्रतीक बताया वह शाश्वत रूप से सही है। क्योंकि भगवान की सारी लीलाएं शाश्वत हैं, जो निरन्तर घटित होते रहती है। उसे देखने के लिए दिव्य दृष्टि चाहिए।

युग तुलसी ने विभीषण को केवल त्रेतायुग का पात्र ही नहीं बताया, उसके वर्तमान स्थिति को उसके पूर्वजन्म से जोड़ते हुए बताया कि वह पूर्व जन्म में राजा प्रताप भानू के सचिव थे, और उसका नाम धर्म रूचि था। त्रेतायुग में प्रताप भानु रावण बने तो उसके सचिव रहे धर्म रूचि विभीषण बनकर उसके छोटे भाई के रूप में पैदा हुए। उसने बाल्यकाल में भगवान की काफी तपस्या की। उन्होंने भगवान से उनके दर्शन व वरदान में भक्ति व प्रीति मांगी थी। सीताहरण के पश्चात हनुमान श्रीराम आज्ञा से सीता माता को खोजने लंका तब विभीषण से उनका मिलन हुआ। तब तक प्रपत्ति योग का उदगम विभीषण के जीवन में नहीं हुआ था। प्रभु से वरदान प्राप्त होने के बाद भी उन्हें शरणागति की प्राप्ति नही हो रही थी हनुमान के मिलन के पश्चात ही उनका प्रभु चरणों की ओर आसक्ति हुई और शरणागति की ओर प्रवृत्त हुए।

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