उठाव में देरी, खरीदी केन्द्रों में संग्रहण केन्द्र जैसे हालात, चूहे खा रहे धान

Rajnandgaon News - धान खरीदी के आखिरी दौर में खरीदी केन्द्रों में अब संग्रहण केन्द्र जैसे हालात बन गए हैं। परिवहन लचर होने से...

Feb 15, 2020, 07:46 AM IST
Rajnandgaon News - chhattisgarh news delay in pickup situation like collection centers in procurement centers rats eating paddy

धान खरीदी के आखिरी दौर में खरीदी केन्द्रों में अब संग्रहण केन्द्र जैसे हालात बन गए हैं। परिवहन लचर होने से केन्द्रों में धान की ढेर लग गई है। उठाव में देरी से डंप रखे गए धान में चूहों का आतंक मचना शुरू हो गया है, वे धान को चट कर रहे हैं।

बारदाने भी खराब होने लगे हैं। समिति प्रबंधकों की मानें तो इस बार शॉर्टेज में भारी नुकसान समितियों को झेलना पड़ेगा। दूसरी ओर जगह की कमी से किसान भी धान नहीं बेच पा रहे हैं। जबकि समय कम होने से जल्द ही धान खपाने की होड़ मची है।

जिले के 117 धान खरीदी केन्द्रों में दो दर्जन से अधिक केन्द्र ऐसे हैं जहां पर आखिरी दौर में तेजी के साथ धान की छल्लियां लग रही हैं। खाली जगह पर स्टेक बनाकर धान से भरी बोरियों को रखना पड़ रहा है। इस वजह से नए धान के लिए रखने की जगह कम पड़ने लगी है। जिले के सोमनी, भर्रेगांव, सिंघोला, घुमका, उपरवाह केन्द्र से धान का उठाव बेहद कमजोर है। जबकि इन केन्द्रों में रोज सैकड़ों क्विंटल धान की खरीदी की जा रही है। आउटर के औंधी, मानपुर, कल्लूबंजारी सहित अन्य भीतरी केन्द्रों में भी यही स्थिति बनी हुई है।

रखरखाव भारी पड़ रहा

समिति प्रबंधकों ने बताया कि करोड़ों का धान समितियों में डंप होने से रखरखाव करना भारी पड़ रहा है। लंबे समय से धान रखा हुआ है। इसलिए चूहे और दीमक से नुकसान का खतरा मंडराने लगा है। बताया कि रखरखाव के नाम पर समितियों को राशि खर्च करनी पड़ रही है जबकि शॉर्टेज आने पर नुकसान भी समितियों को ही झेलना होगा। इसलिए समितियों की ओर से बार-बार पत्राचार कर जल्द उठाव की मांग की जा रही है।


फिक्र: इधर डंप धान को देखकर समिति प्रबंधक परेशान

राजनांदगांव. रामपुर खरीदी केन्द्र में धान रखने की जगह नहीं। उठाव बेहद कमजोर।

चबूतरा नहीं होने से क्षति

करोड़ों की खरीदी तो हो रही है पर कई खरीदी केन्द्र ऐसे हैं जहां पर धान को सुरक्षित रखने के लिए चबूतरे का निर्माण तक नहीं कराया गया है। इस वजह से स्टैग बनाकर रखे गए धान बारिश होते ही भीगने लग जाते हैं। निचले हिस्से में नमी आने से इनका खराब होना तय है। अब लंबे समय से डंप धान में सूखत की समस्या होने लगी है। प्रबंधकों की मानें तो उठाव में देरी होती जाएगी तो प्रति बोरा धान शॉर्टेज बढ़ता ही जाएगा। इसकी वजह से दिक्कत होगी।

किसानों को लौटा रहे

बताया गया कि रायपुर स्तर से मार्कफेड ने मिलर्स को डीओ जारी करना फिलहाल बंद कर दिया है। इसकी ठोस वजह अफसर बता नहीं पा रहे हैं। 20 फरवरी के बाद मिलर्स को उठाव करने डीओ जारी होगा। इस चक्कर में समिति प्रबंधकों की परेशानी बढ़ गई है। प्रबंधकों की ओर से जगह की कमी होने से किसानों को लौटाया जा रहा है। उन किसानों को मौका नहीं मिल रहा है जो कि पूर्व में एक बार धान बेच चुके हैं पर शेष बचे धान को बेचने टोकन ले चुके हैं।

मिलर्स को उठाव करने से मना किया गया है

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