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छींक भी आ जाए तो गुरुजनों को तत्काल बताते हैं विद्यार्थी
अक्सर लोग अपनी बीमारी को छिपाते रहते हैं। इस चक्कर में एक छोटी सी बीमारी बड़ा रूप ले लेती है और इंसान को जान तक गंवानी पड़ जाती है। छात्र-छात्राएं भी कई तरह की बीमारियों से घिरे रहते हैं पर संकोचवश ये किसी से शेयर नहीं करते। विशेषकर बालिकाएं अपनी तकलीफों काे छिपाती हैं। इस वजह से आगे चलकर इन्हे बड़ा नुकसान उठाना पड़ जाता है। इसलिए करमतरा स्थित शासकीय किसान उच्चतर माध्यमिक शाला प्रबंधन ने एक नई पहल की है। कक्षावार स्वास्थ्य सहयोगियों की टीम बना दी गई है जो एक छींक भी आने पर तत्काल शिक्षक-शिक्षिकाओं को अलर्ट करते हैं। इससे समय पर इलाज हो जाता है और बीमारी बढ़ती नहीं। टीम में शामिल विद्यार्थियों को स्वास्थ्य जागरूकता के प्रति प्रशिक्षित भी किया गया है।
9 नवमीं से लेकर कक्षा 12 वीं तक 375 बच्चे अध्ययनरत हैं। प्रत्येक कक्षा में 10 बालक और 10 बालिकाओं की टीम बनाई गई है जो कि कक्षा में अध्ययनरत अपने सहपाठियों के सेहत पर नजर रखते हैं। बीमार होने पर अगर कोई छात्र और छात्राएं स्कूल नहीं आते हैं तो इन्हे स्वास्थ्य सहयोगी टीम की ओर से चिह्नांकित किया जाता है। ज्यादातर छात्रों में आंखों में तकलीफ की शिकायत पाई जाती है।
टीम कर रही मदद
इसी तरह बालिका टीम भी मददगार साबित हो रही है। ये छात्राओं की शारीरिक तकलीफों को सीधे शिक्षिकाओं को शेयर करती हैं। शिक्षिकाओं के माध्यम से इलाज कराया जाता है। बालिका टीम सहपाठियों की झिझक भी दूर कर रहीं हैं। प्राचार्य राजेश शर्मा ने बताया कि इस टीम के बनने से विद्यार्थियों की स्वास्थ्य संबंधित समस्याएं दूर हो रहीं हैं। वहीं अंधविश्वास के खिलाफ भी यह टीम काम कर रही है। अक्सर पालकों के जागरूक नहीं होने की वजह से बच्चे जादू-टोना से इलाज की बात करते हैं।
इलाज कराया गया
स्कूल में टीम बनाने का असर यह हुआ कि बीते माह 15 बच्चे ऐसे पाए गए जिन्हें कमजोरी की शिकायत थी। दरअसल स्वास्थ्य सहयोगी टीम ने इन विद्यार्थियों पर नजर रखी जो आए दिन दोपहर के बाद कमजोरी लगने की चर्चा सहपाठियों के बीच करते थे। इन विद्यार्थियों की सूची बनाने के बाद स्कूल में ही शिविर लगाया गया और विद्यार्थियों को कैल्श्यिम की गोली खिलाई। इन्हे हरी सब्जियां और पौष्टिक भोजन करने की सलाह दी गई। फिलहाल इन विद्यार्थियों में चक्कर आने की शिकायत नहीं है।
नशे में लिप्त बच्चों को सुधार रहे: यह टीम नशे की गिरफ्त में आ चुके विद्यार्थियों को भी सही रास्ते पर लाने काम कर रही है। अगर कोई भी छात्र व छात्राएं नशा करते हुए पकड़ में आते हैं तो तत्काल शिक्षक-शिक्षिकाओं तक खबर पहुंच जाता है। शिक्षक ऐसे बच्चों को समझाइश देते हैं ताकि बच्चे नशे की आदी होने बच सकें।
राजनांदगांव. करमतरा स्कूल में कक्षावार स्वास्थ्य सहयोगी बनाए गए हैं।