सरकारी मदद के लिए भटक रहे मुखबिरों के परिजन, किसी ने नक्सल दहशत में जमीन छोड़ी तो कोई झोपड़ी में रहने मजबूर

Rajnandgaon News - सरकारी मदद का लालच देखकर जिन ग्रामीणों से पुलिस वाले मुखबिरी कराते थे, वे तो नक्सल हिंसा के शिकार हो गए पर परिजन को...

Bhaskar News Network

Oct 12, 2019, 07:51 AM IST
Rajnandgaon News - chhattisgarh news family of informants wandering for government help someone forced to stay in a hut if they left the land in naxal terror
सरकारी मदद का लालच देखकर जिन ग्रामीणों से पुलिस वाले मुखबिरी कराते थे, वे तो नक्सल हिंसा के शिकार हो गए पर परिजन को राहत नहीं मिली। मुखबिरी के संदेह में मारे गए ग्रामीणों के परिजन अब राहत राशि और सरकारी मदद की आस लिए भटक रहे हैं। नक्सल पीड़ित योजना के तहत नौकरी व राहत राशि पाने के लिए इन्हें न्यायालय तक लड़ाई लड़नी पड़ रही है। शुक्रवार को नक्सल पीड़ित परिवार के सदस्यों ने कलेक्टोरेट पहुंचकर कलेक्टर जेपी मौर्य को लिखित आवेदन देकर अपनी समस्या बताई। पीड़ितों ने बताया कि नक्सल दहशत की वजह से खेती-बाड़ी छोड़कर मुख्यालय में आ गए हैं। वहीं झोपड़ी बनाकर जिंदगी गुजारनी पड़ रही है। बताया कि आवास की सुविधा मिल रही और न सरकारी राहत राशि दी गई है। कुछ पीड़ितों को आधी रकम देकर चक्कर लगवाया जा रहा है। मानपुर क्षेत्र के ग्राम दोड़दे निवासी हीरे सिंह जुर्री ने कलेक्टर को बताया कि 2017 में पुलिस मुखबिरी के संदेह में बड़े भाई की नक्सलियों ने हत्या कर दी थी। कुछ दिन बाद मदनवाड़ा थाना प्रभारी ने मुझे और मेरी भाभी यशोदा जुर्री को बुलाकर कहा था कि नौकरी चाहिए या फिर पैसे। भाभी ने पैसे मांगे। इसके बाद से भाभी अपने मायके चली गई। इधर बूढ़े माता-पिता, तीन बाई और 2 बहन साथ में रह रहे हैं। परिवार को शासन की योजना का लाभ ही नहीं दिया गया। नक्सल पीड़ित प्रमाण पत्र तक नहीं बना है। हीरे सिंह ने बताया कि बीएससी स्नातक तक पढ़ाई की। इसके बाद भी नौकरी नहीं मिली।

थाना परिसर से भी भगा दिया: इसी तरह कातुलझोरा निवासी हीरोबाई ध्रुवे ने बताया कि वर्ष 2010 में मानपुर थाना प्रभारी पुत्र रामदास ध्रुवे को थाना लेकर गए थे। 20 दिन बाद पूछताछ कर छोड़ दिया था। इसके बाद से नक्सलियों के निशाने पर था। नक्सली घर से उठाकर ले गए थे। 10 दिन बाद रामदास उनके चंगुल से भाग निकला था तब से परिवार के सदस्य गांव छोड़कर मानपुर थाना परिसर में रहने लगे थे पर यहां से निकाल दिया गया तो झोपड़ी बनाकर रहने मजबूर हैं।

सरकारी मदद का लालच: कलेक्टर से कहा- पुलिस की मदद कर भारी नुकसान झेल रहे हैं हम सभी

राजनांदगांव. नक्सली पीड़ित परिवार के सदस्यों ने ज्ञापन सौंपकर कलेक्टर को अपनी समस्या बताई।

केन्द्र की राशि नहीं दी

हड़कोटोला निवासी आशाराम तारम ने बताया कि पिता रामप्रसाद तारम मानपुर थाना प्रभारी के लिए मुखबिरी करते थे। पुलिस ने गोपनीय सैनिक बनाया था पर 2009 में नक्सलियों ने मुखबिर बताकर हत्या कर दी थी। प्रशासन ने इसके एवज में एक लाख रुपए का चेक दिया था। आशाराम को छात्रावास में भृत्य की नौकरी दी है पर केन्द्र सरकार की ओर से मिलने वाली राहत राशि नहीं दी गई। बताया कि नक्सल दहशत में 5 एकड़ जमीन बेकार पड़ी है। सरकार इसके एवज में दूसरी जमीन नहीं दे रहीं है।

थाना प्रभारी गुमराह कर रहे

खैरागढ़ क्षेत्र के बोरला निवासी बिसाहिन जामबाई मंडावी ने बताया कि पति राजकुमार मंडावी को मुखबिर बताकर नक्सलियों ने 2018 में मार दिया। शासन की ओर से ढाई लाख रुपए दिए गए पर थाना प्रभारी व बैंक प्रबंधक का कहना है कि यह राशि तीन साल बाद ही निकाल पाएंगे। परिजनों ने बैंक प्रबंधन व थाना प्रभारी पर गुमराह करने का आरोप लगाया है। ग्रामीणों से आवेदन लेने के बाद कलेक्टर ने जांच कराकर जल्द राहत पहुंचाने का आश्वासन दिया है।

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