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बेटियों के जन्म पर घोरदा पंचायत परिवार करेगी 3200 रुपए की एफडी, 20 साल बाद उच्च शिक्षा के लिए मिल सकेगी मदद
राजनांदगांव। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर डोंगरगांव ब्लाक के ग्राम पंचायत घोरदा ने अनूठा निर्णय लिया है। गांव में बेटी का जन्म होते ही उसके नाम 3200 रुपए का फिक्स डिपॉजिट किया जाएगा। ये डिपॉजिट 20 साल के लिए किया जाएगा। ताकि बेटी जब बड़ी हो तो उसकी उच्च शिक्षा या शादी में इस रुपए से उसे मदद मिल सके। जिले में पहली बार किसी पंचायत ने बेटियों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए ऐसा निर्णय लिया है।
ऐसा पहल करने वाले पंचायत प्रतिनिधियों ने खुद को पंचायत परिवार बताया है, जो गांव की हर बेटी के लिए दूरगामी सोच लेकर ऐसा निर्णय लिया है। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर पंचायत में रविवार को विशेष ग्राम सभा का आयोजन किया गया था, इसमें पंचायत प्रतिनिधियों सहित ग्रामीण भी मौजूद थे।
सरपंच मालती साहू ने इस प्रस्ताव को ग्राम सभा में रखा, जिसके बाद सभी ने एक राय से अपनी सहमति दर्ज कराई। पंचायत परिवार में सरपंच सहित सभी पंचों को शामिल किया गया है। इसके अलावा गांव की गरीबी रेखा समिति,अामीन माता महिला समूह और गांव के कोटवार ने भी अपनी सहभागिता इस पहल में देने सहमति दी और कहा यह सराहनीय है।
हम भी साथ हैं: आमीन माता महिला समूह व कोटवार भी जुड़े
पंचायत परिवार अपने मानदेय से देंगे 2500 रुपए, शेष राशि समितियां देंगी
घोरदा सरपंच मालती साहू ने बताया कि इस व्यवस्था के लिए हर बेटी के जन्म पर पंचायत की ओर से 2500 रुपए, गरीबी समिति की ओर से 500 रुपए, महिला समिति और ग्राम के कोटवार की ओर से 100-100 रुपए की रकम जुटाई जाएगी। इसके बाद कुल 3200 रुपए पर जन्म लेने वाली बेटी के लिए 20 साल की अवधि पर फिक्स डिपॉजिट किया जाएगा। पंचायत परिवार और समिति सदस्य खुद के मानदेय से ये रकम जुटाकर रखेंगे। 8 मार्च से इस निर्णय को लागू कर दिया गया है। इसके बाद से गांव में जन्म लेने वाली हर बेटी को इसका लाभ मिलेगा।
दूसरे पंचायतों में भी ऐसी पहल, बदलेगी तस्वीर
सरपंच मालती साहू ने बताया कि वे चाहती है कि बेटियों के भविष्य को बेहतर बनाने के लिए ऐसी पहल हर पंचायत में हो। अगर छोटे स्तर पर ही ऐसे बदलाव के लिए पंचायत प्रतिनिधियों व ग्रामीण एक साथ सामने आते हैं, तो हर बेटी को एक दिन बेहतर भविष्य की गारंटी लेकर जन्म लेगी। वहीं आर्थिक तंगी की वजह से बेटियों को सुनिश्चित भविष्य नहीं दे पाने वाले परिवारों को भी हिम्मत मिलेगी। ऐसी पहल हर गांव में हो तो कोई भी बेटियों को बोझ नहीं समझेगा। एक छोटी शुरुआत से समाज को बड़े सुधार की दिशा में लेकर जा सकते हैं।
गांव की कोई भी बेटी थोड़े से पैसों के अभाव में पढ़ाई करने से वंचित न हो
ग्रामीणों ने बताया कि खासकर ग्रामीण इलाकों में आज भी बेटियों की उच्च शिक्षा को लेकर स्थिति चिंताजनक है। कई ऐसा भी परिवार है जो चाहकर भी बेटी को स्कूल के बाद उच्च शिक्षा देने का खर्च नहीं उठा पाता। वहीं परिवार की आर्थिक स्थिति या किसी घटना के चलते भी बेटियों की शादी के लिए कर्ज तक लेना पड़ जाता है। ग्रामीणों ने बताया कि इस तरह के कई उदाहरणों को उन्होंने करीब से देखा है। इसी स्थिति को बदलने के लिए पंचायत स्तर पर ऐसा निर्णय लिया गया है। ताकि गांव की कोई भी बेटी थोड़े से पैसों के अभाव में पढ़ाई से वंचित न हो।