गोधराकांड का विरोध किया तो सिंघल को डाल दिया था जेल में शहर की जनता का आक्रोश भड़का तो रातों रात ही छोड़ना पड़ा

Rajnandgaon News - स्व. प्रेम सिंघल (64)। मुझे याद है... 2002 में हुए गोधराकांड का विरोध पूरे देश में हो रहा था। इस विरोध से राजनांदगांव भी...

Dec 03, 2019, 08:46 AM IST
Rajnandgaon News - chhattisgarh news if he opposed the godhraq singhal was put in jail the city public39s anger was aroused then had to leave overnight
स्व. प्रेम सिंघल (64)। मुझे याद है... 2002 में हुए गोधराकांड का विरोध पूरे देश में हो रहा था। इस विरोध से राजनांदगांव भी अछूता नहीं था। यहां आरएसएस के स्थानीय सेवकों ने भी इसका विरोध किया, तब प्रशासन ने सभी प्रदर्शनकारियों को जेल में बंद कर दिया।

जेल में बंद होने वाले प्रदर्शनकारियों में प्रेम सिंघल, स्व. रामकृष्ण निर्वाणी और मैं (मनोज निर्वाणी) समेत अन्य स्वयं सेवक शामिल थे। जैसे ही लोगों को पता चला कि श्री सिंघल व संघ के अन्य पदाधिकारियों को जेल में डाल दिया गया तो बाहर शहरी जनता का आक्रोश फूट पड़ा। शहर बंद की नौबत आ गई। माहौल बिगड़ता देख रातोंरात सभी स्वयं सेवकों को छोड़ा गया। स्व. रामकृष्ण निर्वाणी (तत्कालीन संघ नगर वाहक) के कहने पर श्री सिंघल ने 1999 में संघ से जुड़े थे। पहले उन्हें नगर सह संघचालक बनाया गया, फिर नगर संघचालक ऐसे करते हुए वे विभाग संघ चालक के पद पर पहुंचे। श्री सिंघल काफी मिलनसार व्यक्तित्व के थे। वे दौड़ भाग भरी जिंदगी में समय निकालकर संघ से जुड़े कार्यों में भरपूर योगदान देते थे। सभी स्वयंसेवकों के घर जाना और उनका हालचाल जानने के साथ ही मदद कर उनकी दिक्कतों को दूर करना उनकी विशेष पहचान थी। विपरीत परिस्थितियों को बाद भी शहर समेत जिले में विश्व हिंदू परिषद और विद्यार्थी परिषद के गठन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

कार्यक्रम के दौरान पदाधिकारियों के साथ मंच साझा करते सिंघल (बीच में बैठे हुए)।

कार्यक्रम के दौरान पदाधिकारियों के साथ मंच साझा करते सिंघल (बीच में बैठे हुए)।

उनके ही ध्यान देने पर बना था संघ कार्यालय

उनके ही ध्यान देने पर बना था संघ कार्यालय

संघ के प्रति लगाव व निष्ठापूर्ण कार्य के कारण पूरे प्रदेश में श्री सिंघल की एक अलग ही पहचान थी। राज्य स्तर पर होने वाले संघ के बड़े कार्यक्रमों को सफलतापूर्वक पूरा करने के लिए श्री सिंघल सक्रिय रूप से योगदान देते थे। उनके ही ध्यान देने पर 2006 में कंचनबाग पटेल कालोनी में संघ कार्यालय का निर्माण पूरा हुआ। वे गायत्री परिवार से भी जुड़े रहे। उनकी व्यापारिक क्षेत्र में भी काफी पैंठ थी। उनका भरा पूरा परिवार है, उनके स्वर्गवास से सभी आहत में है। श्री सिंघल की स्वर्णिम यादें स्वयंसेवकों के दिलों में हमेशा रहेगी। वर्ष 1999 से संघ से जुड़े थे।

संघ के प्रति लगाव व निष्ठापूर्ण कार्य के कारण पूरे प्रदेश में श्री सिंघल की एक अलग ही पहचान थी। राज्य स्तर पर होने वाले संघ के बड़े कार्यक्रमों को सफलतापूर्वक पूरा करने के लिए श्री सिंघल सक्रिय रूप से योगदान देते थे। उनके ही ध्यान देने पर 2006 में कंचनबाग पटेल कालोनी में संघ कार्यालय का निर्माण पूरा हुआ। वे गायत्री परिवार से भी जुड़े रहे। उनकी व्यापारिक क्षेत्र में भी काफी पैंठ थी। उनका भरा पूरा परिवार है, उनके स्वर्गवास से सभी आहत में है। श्री सिंघल की स्वर्णिम यादें स्वयंसेवकों के दिलों में हमेशा रहेगी। वर्ष 1999 से संघ से जुड़े थे।

जैसा कि आरएसएस के मनोज निर्वाणी ने भास्कर को बताया।

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