व्यापारियों ने 1 हजार किलो प्लास्टिक किया सरेंडर, अब सामान खरीदने जाएं तो रखें थैला

Rajnandgaon News - गांधी जयंती से देशभर में पॉलीथिन और प्लास्टिक के उपयोग पर प्रतिबंध लग गया है। लोगों की दिनचर्या में ये दोनों चीजें...

Oct 03, 2019, 07:46 AM IST
गांधी जयंती से देशभर में पॉलीथिन और प्लास्टिक के उपयोग पर प्रतिबंध लग गया है। लोगों की दिनचर्या में ये दोनों चीजें आदत सी बनी हुई है। ऐसी छोटी-छोटी आदतों को अब से ही बदलनी होगी। अपने शहर को बेहतर बनाने लिए हर वर्ग और हर व्यक्ति को इसमें अहम भूमिका अदा करने की जरूरत है।

2 अक्टूबर को शहर में हुए जिला प्रशासन और नगर निगम के कार्यक्रम में शहर के व्यापारियों ने 1 हजार किलोग्राम प्रतिबंधित प्लास्टिक को सरेंडर कर दिया है। इसके अलावा व्यापारियों ने प्लास्टिक का उपयोग नहीं करने सहित इसका विक्रय भी बंद करने का संकल्प लेते हुए अपनी अहम जिम्मेदारी निभाई है। इसके बाद शहर के लोगों को जागरुकता दिखाकर प्रतिबंधित प्लास्टिक को नकारना होगा।

इसके लिए लोगों को खुद की आदतों में छोटा सा बदलाव करना होगा। इस बदलाव से शहर को प्लास्टिक मुक्त कर हम अपनी आने वाली पीढ़ी को बेहतर पर्यावरण और स्वच्छ शहर दे सकते हैं। गांधी जयंती पर शहर में जगह-जगह कार्यक्रम आयोजित किए गए, जहां युवाओं से लेकर स्कूली बच्चों और महिलाओं से लेकर बुजुर्गों ने स्वच्छता में सहभागिता दर्ज कराई और प्लास्टिक का उपयोग नहीं करने का संकल्प भी लिया।


राजनांदगांव. उत्कृष्ट कार्य करने वालों का सम्मान किया गया।

भास्कर के सर्वे में आई ऐसी रिपोर्ट, ज्यादातर लोगों ने माना प्लास्टिक का इस्तेमाल करना उनकी है आदत







सुप्रीम कोर्ट ने कहा था- परमाणु बम से भी ज्यादा खतरनाक है प्लास्टिक

2012 में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्लास्टिक बैग्स के दुष्प्रभाव किसी परमाणु बम से ज्यादा खतरनाक साबित होंगे। इन प्लास्टिक बैग्स के ज़्यादा उपयोग से हमारे नदी, तालाब बर्बाद हो रहे हैं। देखते ही देखते प्लास्टिक बैग्स के दुष्प्रभाव पूरे पर्यावरण व प्रकृति के संतुलन को बिगाड़ देंगे, जिसे संभाल पाना बस में नहीं रहेगा।


शहर में रोजना निकल रहा 16 टन कचरा इसमें 80 फीसदी सिर्फ पॉलीथिन

शहर में रोज की सफाई में 16 टन कचरा निकलता है। इसमें 80 फीसदी कचरा प्लास्टिक का ही होता है। इनमें पानी के पाउच, डिस्पोजल गिलास, प्लास्टिक के सिंगल टाइम यूज प्लेट्स के अलावा फल, सब्जी और दूध लिए जाने वाले कैरीबैग शामिल है। अन्य कचरा को आसानी से सेग्रिगेशन यूनिट में खप जाता है। लेकिन प्लास्टिक के कचरे का निबटारा चुनौती है।

प्लास्टिक के साइड इफेक्ट्स को जानिए

जमीन की उर्वेरा: जमीन में प्लास्टिक बैग्स के मिलने से जमीन की उर्वरता नष्ट हो रही है। जिले के हर हिस्से में इसका आंकड़ा लगातार बढ़ते ही जा रहा है।

अंडरग्राउंड वाटर: पानी में मिलकर प्लास्टिक बैग्स अंडरग्राउंड वाटर को दूषित और जहरीला बना रहे हैं।

कभी खत्म नहीं: प्लास्टिक के बैग नॉन-बायोडिग्रेडेबल होते हैं यानी ये प्राकृतिक रूप से विघटित नहीं होते और इन्हें विघटित होकर ख़त्म होने में लगभग 1000 साल का लम्बा समय लग जाता है। राजनांदगांव शहर में ही रोजाना 10 टन प्लास्टिक का कचरा निकल रहा है।

जानवरों की मौत: खाने की चीज़ों के साथ प्लास्टिक बैग भी निगल लेने के कारण बहुत से जानवर मर जाते हैं। गाय के अलावा डॉल्फिन्स, व्हेल्स, पेंगुइन और कछुए जैसे कई जीवों की मौत प्लास्टिक बैग के कारण होती है।

आप सिर्फ ये करें और बदल जाएगी आपके शहर की सूरत

महिलाएं : दुकानदार से कोई भी सामान खरीदें तो पॉलीथिन न मांगे। अपने थैले में ही सारा सामान रखें। ऐसा करने आप अपने आसपास की साथियों को भी प्रेरित करें।

जूट या कपड़े के थैले का इस्तेमाल करें


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