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आरईओ ने फसल क्षति की नजरी रिपोर्ट से अफसर संतुष्ट नहीं, दोबारा सर्वे हो रहे

एक वर्ष पहले
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बेमौसम बारिश की वजह से जिले में चना, गेहंू, उड़द, लाखड़ी, अरहर सहित अन्य दलहनी फसल चौपट हुई है। किसान लगातार क्षतिपूर्ति राशि देने की मांग कर रहे हैं पर क्षति का स्पष्ट आंकड़ा सामने नहीं आ पाया है। पटवारियों की हड़ताल की वजह से सर्वे का काम ग्रामीण कृषि अधिकारियों को दी गई थी। 9 ब्लॉक से रिपोर्ट तो आई है पर जब तक पटवारी खसरा वार रिपोर्ट नहीं देंगे, तब तक फसल क्षति का प्रकरण नहीं बन पाएगा। इसके चलते हड़ताल से लौटते ही पटवारियों को दोबारा सर्वे करना पड़ रहा है।

पटवारियों की ओर से सर्वे किए जाने से इस बात का पता चल रहा है कि ग्रामीण कृषि अधिकारियों को किसानों से चर्चा कर नुकसान की रिपोर्ट बना दी है, यानी की किसानों ने एक साथ नुकसान की जानकारी दी है। इसी आधार पर 100 प्रतिशत नुकसान बता दिया गया है। बारिश और ओलावृष्टि से इस बार किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है।

किसान कर रहे इंतजार: दरअसल आरबीसी 6-4 के तहत राजस्व शाखा की ओर से ही क्षति की फाइनल रिपोर्ट दी जाती है। इधर किसान राहत पाने के इंतजार में बैठे हैं। दरअसल नुकसान के बाद किसानों को कर्ज अदायगी की चिंता सताने लगी है। कृषि विभाग के डिप्टी डायरेक्टर जीएस ध्रुव ने बताया कि पटवारियों से अंतिम रिपोर्ट मंगाई गई है। इसके बाद फसल क्षति का आकलन तय होगा।

आप भी जानिए, इस क्षेत्र में ज्यादा क्षति

खैरागढ़, छुईखदान, गंडई, डोंगरगांव और डोंगरगढ़ क्षेत्र के किसान तो कई बार राहत राशि की मांग कर कलेक्टोरेट का चक्कर लगा चुके हैं। अफसर अब तक आश्वासन ही देते आ रहे हैं। किसानों की ओर से आरबीसी 6-4 के तहत क्षतिपूर्ति मांगी जा रही है पर पटवारियों के हड़ताल की वजह से सर्वे पर ब्रेक लग गया था। इसलिए ग्रामीण कृषि अधिकारियों को मैदान में उतारा गया था पर इनकी ओर से दी गई रिपोर्ट से कृषि विभाग के अफसर भी संतुष्ट नहीं हैं।


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