खुद के खर्चे पर नेशनल स्पर्धा तक पहुंचे खिलाड़ी

Rajnandgaon News - इंसान यदि कुछ ठान ले तो उसे पूरा करके ही दम लेता है। इसका सटीक उदाहरण हैं राहुल साहू। उम्र 28 साल। ग्राम फरहद में रहने...

Jan 20, 2020, 07:46 AM IST
Rajnandgaon News - chhattisgarh news players reach national competition at their own expense
इंसान यदि कुछ ठान ले तो उसे पूरा करके ही दम लेता है। इसका सटीक उदाहरण हैं राहुल साहू। उम्र 28 साल। ग्राम फरहद में रहने वाले राहुल अभावों के चलते खुद स्टेट प्रतियोगिता से आगे नहीं बढ़ पाए। इसी से सबक लेते हुए राहुल ने आठ साल पहले 2011 में निशुल्क तीरंदाजी (आर्चरी) कैंप की शुरुआत की। ताकि अभावों के कारण दूसरे खिलाड़ियों का उनके जैसा हश्र न हो।

आज उनके सिखाए तीरंदाज नेशनल प्रतियोगिता में निशाना साध रहें हैं। राहुल के पास न तो ग्राउंड है न ही जरूरी खेल संसाधन, फिर भी कोच राहुल द्वारा समय-समय पर उपलब्ध कराए गए आर्थिक मदद और खुद के खर्च पर खिलाड़ियों ने नेशनल स्पर्धा तक सफर तय किया है। हाईटेक धनुष नहीं होने के कारण खिलाड़ी इंटरनेशनल प्रतियोगिता में शामिल नहीं हो पाए हैं। कोच राहुल एक होटल व्यवसायी है। ग्राम फरहद चौक में उनकी एक छोटा सा होटल है। भास्कर से चर्चा में राहुल ने बताया कि आर्थिक दिक्कतों के कारण उन्हें दो स्टेट टूर्नामेंट खेलकर ही संतुष्ट होना पड़ा। उन्होंने हार नहीं मानी।

अभावों में आगे बढ़े, अब फ्री कैंप में तैयार कर रहे नेशनल प्लेयर

जिले से चुन-चुन कर यहां खिलाड़ी लाए, दे रहे ट्रेनिंग

राहुल ने जिले के अंबागढ़ चौकी, छुरिया, समेत अन्य ब्लॉकों के गांवों से खिलाड़ी चुने और उन्हें नि:शुल्क प्रशिक्षण दिया। ज्यादातर खिलाड़ी गरीब और किसान परिवार से हैं। कॉलेज और स्कूल से मिलने वाली छात्रवृत्ति से अपने लिए धनुष व खेल के लिए जरूरी सामान खरीदते हैं। वर्तमान में कैंप में 25 से 30 खिलाड़ी प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। प्रशिक्षण देने वालों में अजेंद्र कुमार टांडेकर भी है, जो कि सीनियर खिलाड़ी हैं।

राजनांदगांव. खिलाड़ी तीरंदाजी की ट्रेनिंग करते हुए।

जानिए, नेशनल खेल चुके खिलाड़ियों के बारे में

खुर्सीटीकुल (अं. चौकी) निवासी कपिल राजपूत 4 साल से प्रशिक्षण ले रहें है। चार बार नेशनल खेल चुके है। पिता मधुसूदन राजपूत किसान है। सत्यम महोबिया तीन साल से प्रैक्टिस कर रहे है, 2 नेशनल खेल चुके है। पिता रमेश महोबिया की वेल्डिंग की दुकान है। सिंघोला निवासी रश्मि साहू पांच साल से प्रैक्टिस कर रही है, 9 बार नेशनल खेल चुकी हैं। पिता महेंद्र साहू किसान हैं। सिंघोला निवासी पार्वती साहू अभी तक 8 नेशनल खेल चुकी है। पिता याज्ञवल साहू प्राइवेट इलेक्ट्रीशियन हैं। राजनांदगांव के तरूण उइके 3 नेशनल व 6 स्टेट मैच खेल चुके हैं। पिता केशवराम उइके किसान हैं। ग्राम कंटेगाटोला (छुरिया) निवासी नीलम कोड़ापे 2 नेशनल और 2 स्टेट में भाग ले चुकी हैं। पिता देवीलाल कोड़ापे किसान हैं।

2010 में साई ने खोली थी आचर्री, फिर बंद किया

भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) की ओर से साल 2010 में राजनांदगांव में तीरंदाजी कैंप की शुरुआत की थी। इसी कैंप में ही राहुल ने तीरंदाजी सीखी थी। बाद में यह कैंप बंद कर दिया गया, रायपुर शिफ्ट कर दिया गया। खिलाड़ियों ने बताया कि खेल एवं युवा कल्याण विभाग से यदि उन्हें ग्राउंड और संसाधन उपलब्ध कराए तो खिलाड़ी और अच्छा प्रदर्शन करेंगे।

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