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जहां पुरुष शिक्षक भी सेवा देने से घबराते हैं, वहां बच्चों को पढ़ा रहीं

एक वर्ष पहले
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जिले के नक्सल माद माने जाने वाले कोहका जक्के के घने जंगल में गुणवत्ता शिक्षा की अलख जल रही है। इसका श्रेय महिला शिक्षक टिकेश्वरी ठाकुर को जाता है। महिला होते हुए भी बिना किसी डर के उन्होंने नक्सल प्रभावित क्षेत्र के बच्चों को पढ़ाने में रुचि दिखाई, जहां पुरुष शिक्षक भी सेवा देने से कतराते है। दिलचस्प बात यह है कि जिस कोहका प्रायमरी स्कूल में टिकेश्वरी पढ़ाती है, वहां तक पहुंचने के लिए पक्का रास्ता नहीं है, मुख्य सड़क पर वाहन खड़ा कर तीन किलाेमीटर घने जंगलों से होते हुए पैदल स्कूल जाना पड़ता है। आदिवासी बच्चों का भविष्य उज्ज्वल हो इसलिए टिकेश्वरी ने शिक्षा के साथ ही अन्य कलात्मक गतिविधियों को अपनाया। पालकों से चर्चा कर स्कूल में बच्चों की उपस्थिति बढाई, इसका नतीजा ये रहा कि अब आदिवासी बच्चेे हायर एजुकेशन और कॉलेज तक पहुंच चुके है, इससे पहले तक यहां के बच्चों का आठवीं तक पढ़ पाना मुश्किल था।

30 वर्षीय टिकेश्वरी मूलत: अंबागढ़ चौकी की रहने वाली है पर उनका ससुराल बालोद में है। सितंबर 2013 को उनकी ज्वाइनिंग हुई, तब से लेकर अभी तक वे कोहका प्रायमरी स्कूल में सेवा दे रही है। टिकेश्वरी बताती है कि शुरुआती दिनों में वह स्कूल तक पहुंच नहीं पाई थी, जंगल ऊपर से नक्सल प्रभाव इससे थोड़ी हिचक हुई। लेकिन कुछ दिन बाद उन्होंने इसे चुनौती के रूप में स्वीकार किया। सहयाेगी शिक्षक निषाद के साथ रोजाना तीन किलोमीटर पैदल सफर कर स्कूल आने जाने लगी। बाद में इसकी आदत से हो गई। टिकेश्वरी की माने तो दिसंबर से जून तक जंगल की सघनता कम रहती है, इसलिए रास्ता आसानी से समझ आ जाता है, लेकिन जुलाई से लेकर नवंबर तक जंगल घना रहता है, रोजाना सुबह 10 से शाम 4 बजे तक कक्षा लगती है। वे इससे डेढ़ घंटे पहले ही स्कूल के लिए रवाना हो जाती है, लौटते हुए देर शाम हो जाती है। डीईओ हेमंत उपाध्याय ने कहा कि महिला शिक्षक काफी अच्छा काम कर रही है, कोहका प्राथमिक स्कूल के बच्चे पढ़ने-लिखने में काफी होशियार हैं।

नक्सल मांद में शिक्षा का अलख: रोज जंगल के रास्ते से स्कूल जाती हैं टिकेश्वरी

महिला दिवस पर िवशेष

जो काम बच्चों को पसंद, वही करवाती हैं

पढ़ाई में बच्चों का मन लगा रहे, इसलिए टिकेश्वरी बच्चों से उनके मनपसंद का कार्य करवाती है, जैसे खिलौने बनाना, खेल, चित्रकला इत्यादि। इसके अलावा प्रत्येक बच्चे का जन्मदिन स्कूल में ही मनाया जाता है। वर्तमान में स्कूल 42 बच्चे अध्ययनरत है। इसमें से 22 बालक और 20 बालिका है। बच्चों की उपस्थिति यहां बढ़ी है।

पति हैं फौज में, यहां
से मिलती है प्रेरणा


टिकेश्वरी के पति लोकेंद्र कुमार ठाकुर बीएसएफ में है। टिकेश्वरी कहती है कि उनके पति तन-मन से देश की सेवा कर रहे हैं तो फिर देश के बच्चों को भविष्य उज्ज्वल करने उनकी भी जिम्मेदारी बनती है, यही उनकी प्रेरणा है। उनकी दो साल की बेटी है, उनकी सास उनके साथ रहती है। स्कूल जाने के बाद सास बेटी संभालती है।

टिकेश्वरी ठाकुर

राजनांदगांव. कोहका प्रायमरी स्कूल में बच्चों को शिक्षा के साथ अन्य कलात्मक गतिविधियां भी सिखाई जा रही है।
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