संग्रहालय में रखी है 11 वीं सदी के सूर्यदेव की प्रतिमा

Rajnandgaon News - आज मकर संक्रांति है। आज के दिन जगत की आत्मा कहलाने वाले प्रभु सूर्यदेव की पूजा की जाती है। शास्त्रों में इस दिन...

Jan 15, 2020, 07:46 AM IST
Rajnandgaon News - chhattisgarh news the 11th century statue of suryadev is kept in the museum
आज मकर संक्रांति है। आज के दिन जगत की आत्मा कहलाने वाले प्रभु सूर्यदेव की पूजा की जाती है। शास्त्रों में इस दिन सूर्योदय से पूर्व सूर्य देवता को जल, तिल और लाल चन्दन अर्पण करने को महत्वपूर्ण और फल प्राप्ति वाला बताया गया है। आइए इस खास मौके पर हम आपको सूर्यदेव से जुड़ी दिलचस्प जानकारी देते हैं। अविभाजित राजनांदगांव जिले में जब कवर्धा (कबीरधाम) एक ही जिला हुआ करता था प्राचीन समय में सूर्यदेव की पूजा की जाती है। इसका स्पष्ट प्रमाण कलेक्टोरेट परिसर में स्थित जिला संग्रहालय में मिल जाएगा। यहां सूर्यदेव की इकलौती प्रतिमा है, जो जिसका निर्माण 11वीं-12वीं सदी में किया गया था।

यह मूर्ति पुरातत्ववेत्ताओं को दिग्विजय स्टेडियम के पुराने भवन में मिली थी। पुराने भवन के रेक मेें बहुत सी प्राचीन मूर्तियों के बीच एक मूर्ति सूर्यदेव की थी। जानकारों की माने तो वर्षों पहले जब सिली पचराही में खुदाई हुई थी तब जिले के आला अधिकारी दौरे पर गए थे, वहां से कुछ प्राचीन मूर्तियां लेकर राजनांदगांव मुख्यालय आ गए थे, यहां उस समय संग्रहालय नहीं थी, इसलिए मूर्तियों को स्टेडियम भवन में सुरक्षित रखवा दिया गया था। संग्रहालय बनाने के बाद मूर्तियों को लाया गया।

संग्रहालय में सुरक्षित रखी गई सूर्यदेव की प्रतिमा।

साधारण पत्थर पर की गई है गजब की कलाकारी

संग्रहालय मार्गदर्शक सुरेंद्र कुमार वर्मा के मुताबिक मूर्ति 11वीं 12वीं सदी की है। मूर्ति बनाने में काले रंग के साधारण पत्थर का इस्तेमाल किया गया है। लेकिन इस पत्थर पर शिल्पकार ने जो कलाकृति उकेरी है, वह गजब की है। काफी पैने औजारों से प्रतिमा को आकार दिया गया है। सफाई इतनी की आज भी प्रतिमा में चमक है। गौरतलब है कि कवर्धा जिला मुख्यालय से 45 किमी दूर कंकालिन टीला के नाम से मशहूर सिली पचराही स्थित है। हजारों साल पुराने बेशकीमती निशानियों को समेटे है।

आश्चर्य: सारथी अरूण को नहीं अरूणी को दर्शाया

मागदर्शक वर्मा ने मूर्ति के संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि प्रतिमा में सूर्यदेव के चरणों में चरण पादुका पहनाया गया है। प्रतिमा में रथ की सारथी महिला अरूणी को दर्शाया गया है, जबकि पुराणों में सूर्यदेव के रथ सारथी अरुण को बताया गया हैं। अरुण भगवान विष्णु के वाहन गरुड़ के भाई हैं। प्रतिमा में दो भुजा है, जिसमें प्रभु ने कमल धारण किया हुआ है। अगल-बगल में दंड और पिंगल है जो भगवान यात्रा के समय को दर्ज करने का कार्य करते हैं। नीचे साथ घोड़े है, जो रथ को खींचते हैं।

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