240 मीटर के फरहद ओवरपास निर्माण की सुस्त गति अप्रैल 2018 तक पूरा होना था, दो साल बाद भी अधूरा

Rajnandgaon News - बाइपास में फरहद चौक पर बन रहा ओवरपास अफसरों के सुस्त रवैये और ठेकेदार की मनमानी से परेशानी का सबब बना हुआ है। दरअसल...

Bhaskar News Network

Oct 12, 2019, 07:55 AM IST
Rajnandgaon News - chhattisgarh news the sluggish pace of construction of 240 meter farhad overpass was to be completed by april 2018 incomplete even after two years
बाइपास में फरहद चौक पर बन रहा ओवरपास अफसरों के सुस्त रवैये और ठेकेदार की मनमानी से परेशानी का सबब बना हुआ है। दरअसल ओवरपास का निर्माण सालभर में पूरा कर लेने का निर्देश टेंडर के वक्त ही दिया गया था, लेकिन काम शुरू हुए दो साल हो गए और अब तक ओवर पास के लिए लगने वाले पिलर भी खड़े नहीं किया जा सके हैं।

अधूरे निर्माण और सुस्त गति की वजह से सबसे बड़ी दिक्कत फरहद चौक से आवाजाही में हो रही है। फरदह चौक में 6 दिशाओं से गाड़ियां आती जाती हैं, जिन्हें अधूरे निर्माण की वजह से प्रॉपर साइड नहीं मिल पा रही है। वाहनों की एक दूसरे के हिस्से को क्रास कर गुजरना पड़ रहा है। यही वजह है कि यहां आए दिन हादसे का खतरा बना रहा है। फरहद चौक में सबसे अधिक दिक्कत रात के वक्त होती है, जब 6 दिशाओं से आने जाने वाले वाहनों को रात के अंधेरे में वाहन पार करना पड़ता है। वहीं सड़क पर डंप निर्माण कार्य के मटेरियल समस्या को और भी दोगुना कर रहे हैं। लगातार इस हिस्से में छोटी -बड़ी दुर्घटनाएं सामने आ चुकी हैं। बावजूद इसके जिला प्रशासन और निर्माण एजेंसी सेतु निगम के अफसर गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं।

साइड देने में दिक्कत: फरदह चौक में 6 दिशाओं से आती-जाती हैं गाड़ियां

राजनांदगांव. बाइपास में ओवरपास का निर्माण अधूरा है। इससे लोगों की परेशानी बढ़ गई है।

सड़क पर डंप मटेरियल, गुजर रहे भारी वाहन, हादसे का खतरा

बाइपास और फरहद ओवरपास वाले हिस्से से रोजाना 2 हजार से अधिक वाहन 24 घंटे में गुजरते हैं। इसके अलावा डोंगरगांव जाने के लिए भी यह एकमात्र रास्ता है। इसके अलावा आसपास के ग्रामीण भी इसी हिस्से से होकर गुजरते हैं। सड़कों पर डंप मटेरियल और अधूरे निर्माण की वजह से सड़क के 50 फीसदी हिस्से को पहले ही रिजर्व कर आवाजाही बंद कर दी गई है, इसके चलते वन वे सड़क में पूरे समय हादसे का खतरा बना रहता हैं।

लेटलतीफी व मनमानी के बावजूद ठेकेदार पर मेहरबान अफसर

फरहद ओवरपास का काम दुर्ग के मिथलेश मिश्रा ठेकेदार को दिया गया है। इन्हें अनुबंध के दौरान कागजों में सालभर में काम पूरा करने की तो बात कही गई, लेकिन लेटलतीफी के बावजूद न तो सेतु निगम के अफसरों ने इन्हें कोई नोटिस दिया है और न ही किसी तरह की सख्ती बरती जा रही है। इसकी वजह से ठेकेदार की मनमानी जारी है और अफसरों को शहर की बड़ी समस्या से कोई सरोकार नहीं है। इनकी लापरवाही आम जनता भुगत रही है।

29 करोड़ रुपए की लागत, अब तक 50 फीसदी काम भी नहीं हुआ

बाइपास में बन रहे ओवरपास के काम की शुरुआत अप्रैल 2017 में हुई है। अनुबंध के मुताबिक अप्रैल 2018 तक इस कार्य को पूरा कर लिया जाना था, इसमें बारिश के मौसम को भी शामिल किया गया था। लेकिन 29 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाले इस ओवरपास का काम अब तक 50 फीसदी भी पूरा नहीं हुआ है। ओवरपास के लिए 25 पिलर और 25 स्लैब लगाए जाने हैं, लेकिन अब तक लगाने का काम ही पूरा नहीं हो सका है।

ड्राइंग बदलने का हवाला देकर बच रहे अफसर और ठेकेदार

ओवरपास के ड्राइंग में एक बार बदलाव किया गया था, इसी को आधार बनाकर काम की सुस्त गति से बचने का प्रयास किया जा रहा है। सेतू निगम के अफसर से लेकर ठेकेदार सभी काम धीमा होने का कारण यही बता रहें है। अफसरों का पक्ष है कि ड्राइंग बदलने की वजह से ठेकेदार को अतिरिक्त समय दिया गया है, लेकिन लंबा समय बीत जाने के बाद भी काम की गति तेज नहीं हो पाई है। सेतु निगम के अफसर भी ठेकेदार को पूरा संरक्षण देने में लगे हैं।

निर्माण स्थल में ये 3 बड़ी मुसीबत: 20 से अधिक दुर्घटनाएं घट चुकी

अंधेरा : आेवरपास निर्माण करीब 1 किमी. दूरी के दायरे में होना है। इसका मेन पाइंट फरहद चौक है। लेकिन यहां शाम होते ही अंधेरा छा जाता है। इतने बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य जारी होने के बाद भी यहां विद्युत व्यवस्था नहीं है।

संकेतक नहीं है: फरदह चौक में 6 दिशाओं से आवाजाही होती है। लेकिन किसी भी दिशा के लिए न तो संकेतक लगाए गए है, न ही ऐसी कोई व्यवस्था है, जिससे वाहनों की गति कम हो सके। इसके लिए सभी दिशाओं में मनमाने ढंग से वाहन पूरी गति में दौड़ते है।

सड़क पर मटेरियल : ठेकेदार ने निर्माण के लिए इस्तेमाल होने वाले मटेरियल सहित उपकरणों को बेतरतीब सड़कों पर फैला रखा है। इस हिस्से को अलग से हाईलाइट करने भी कोई व्यवस्था नहीं है। पूर्व में मटेरियल वाले हिस्से में वाहन घुस जाने से हादसे सामने आ चुके हैं।

नए सिरे से निर्माण शुरू करना पड़ा


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