इच्छाएं पूरी नहीं होने पर प्रतिक्रिया स्वरुप क्रोध का जन्म होता है: आत्मानंद सरस्वती

Rajnandgaon News - स्थानीय जगतारिणी महिला मंडल द्वारा आयोजित श्रीमद् देवी भागवत के आठवें दिन बड़ी संख्या में उपस्थित श्रोताओं को...

Feb 15, 2020, 07:00 AM IST

स्थानीय जगतारिणी महिला मंडल द्वारा आयोजित श्रीमद् देवी भागवत के आठवें दिन बड़ी संख्या में उपस्थित श्रोताओं को कनिष्ठ शंकराचार्य स्वामी आत्मानंद सरस्वती ने कहा कि ईश्वर की प्राप्ति के लिए क्रोध पर विजय आवश्यक है। क्रोध एक प्रतिक्रिया है जिसका मूल स्तोत्र मन की इच्छाएं हैं। इच्छाओं की पूर्ति से वे शांत नहीं होती अपितु इच्छाओं का और अधिक विस्तार होते जाता है और इच्छाएं पूरी नहीं होने पर प्रतिक्रिया स्वरुप क्रोध का जन्म होता है। इसलिए इच्छाओं को नियंत्रण आवश्यक है जिससे मन की तृष्णा और क्रोध दोनों पर नियंत्रण किया जा सके। ईश्वरीय साधना के लिए यह आवश्यक है। विश्वामित्र ने वशिष्ठ के सौ पुत्रों की हत्या कर दी। लेकिन वशिष्ठ जी ने विश्वामित्र से कोई दुश्मनी नहीं की, बल्कि यज्ञ रक्षा के लिए जब वे श्रीराम और लक्ष्मण को लेने दशरथ जी के पास आए तो पुत्र मोहवश दशरथ जी तैयार नहीं हो रहे थे। उसे वशिष्ठ ने ही समझाया कि श्री राम का जन्म ही यज्ञ संस्कृति से हुआ है।

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