जब आप में समर्पण का भाव आ जाएगा तो भूल नजर नहीं आएगी: सम्यग्दर्शना

Rajnandgaon News - भास्कर न्यूज || राजनांदगांव जैन बगीचे में गुरुवार को अपने नियमित प्रवचन में साध्वी सम्यग्दर्शना श्रीजी ने कहा...

Sep 13, 2019, 07:45 AM IST
भास्कर न्यूज || राजनांदगांव

जैन बगीचे में गुरुवार को अपने नियमित प्रवचन में साध्वी सम्यग्दर्शना श्रीजी ने कहा कि समर्पण का भाव हमें तार देता है। एकलव्य के समर्पण भाव ने उसे श्रेष्ठ धनुर्धर बना दिया।

गुरु के प्रति समर्पण भाव के चलते बिना कुछ पूछे उसने अंगूठा काटकर गुरु को दे दिया। समर्पण भाव की शक्ति गुरु की शक्ति से ज्यादा होती है। जो नास्तिक होते हैं वह परमात्मा और गुरु की मूर्ति को नहीं मानते, वो उसे पत्थर की मूर्ति मानते हैं किंतु आस्तिक उसे प्रत्यक्ष भगवान और गुरु मानते हैं। गुरु के वियोग से गुरु का विलय कभी नहीं होता। समर्पण भाव में इतनी शक्ति होती है कि वह गुरु को सामने ला सकती है। एकलव्य के समर्पण भाव ने उनके गुरु को उन तक खींच लाया। समर्पण भाव वाले व्यक्ति पर गुरु की कृपा हमेशा बरसती है। समर्पण भाव वालों को ही आशीर्वाद मिलता है और वही इसे ग्रहण कर सकता है। देने का काम गुरु नहीं करता बल्कि वह बरसाता है, देने का काम माता-पिता नहीं करते बल्कि वह बरसाते हैं, बस आप लेने के लायक हों। प्रेम का भाव गहरा होता है तो समर्पण का भाव पैदा होता है।

समर्पण भाव परमात्मा से प्रत्यक्ष दर्शन कराएगा

हम चित्र देखकर यह आंकलन कर लेते हैं कि चित्र वाली लड़की हमारी बहू या प|ी बनने लायक है या नहीं। जब फोटो देखकर यह आंकलन कर लेते हैं तो फिर परमात्मा या गुरु की मूर्ति तो प्रत्यक्ष हमारे सामने होती है फिर यह मूर्ति क्यों नहीं हमें परमात्मा साकार करा पाएगी। समर्पण का भाव पैदा करो। यह भाव हमें परमात्मा से प्रत्यक्ष दर्शन कराएगा। गुरु को साथ में देखकर किसी के शक्ति की तुलना नहीं करनी चाहिए बल्कि गुरु के प्रति समर्पण भाव की तुलना करनी चाहिए। समर्पण भाव के अभाव में हमारी सारी शक्तियां पानी में बह जाएगी। समर्पण भाव से परमात्मा के स्वरूप को प्राप्त कर पाएंगे।

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