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चुप्पी मन में है, बीमारी मन में है तो इलाज भी मन में होगा

4 महीने पहलेलेखक: बी के शिवानी
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प्रतीकात्मक फोटो।
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हमारे जीवन में बहुत सारी गलत मान्यताएं बन गई है जिसके कारण मन बेवजह बार-बार दुखी हो जाता है। हम देखते हैं कि इन दिनों हमारा शरीर बार-बार बीमार हो रहा है, रिश्ते टूट रहे हैं कमजोर पड़ रहे हैं, लेकिन इस सबके बीच हमारा मुनाफा बढ़ रहा है। आज तो यही हो रहा है ना? हम ही इस पर रोज लिखते-पढ़ते हैं। यही नहीं हम अपने आसपास ऐसा ही तो देखते हैंं। डिप्रेशन रेट इतना बढ़ गया, युवावस्था में हार्टअटैक आने लग गया है। हम ही रोज सुनते सुनाते हैं कि तलाक की घटनाएं बढ़ रही हैं। आज हमारे बच्चे ड्रग्स, शराब, स्मोकिंग की तरफ युवावस्था में आकर्षित क्यों होते जा रहे हैं? क्योंकि वे अंदर से दुखी है। ये सब कुछ हो रहा है फिर साथ-साथ हम कहते हैं कि प्रॉफिट बढ़ गया, तो सवाल तो खड़ा हो गया न? ये हरेक को बैठकर अपने आप से पूछना पड़ेगा कि मुझे अपने लिए और अपने परिवार के लिए क्या चाहिए।  आज बच्चे दर्द में हैं वो अपने माता-पिता से आकर बात भी नहीं कर सकते हैं। क्योंकि जैसे ही बात करेंगे तो वह बेवजह गुस्से में प्रतिक्रिया देंगे। फिर हमने बाहर काउंसलर तैयार कर दिए, साइकोलॉजिस्ट बनाए गए। बच्चे उनके पास जाकर काउन्सलिंग कर रहे हैं। बीस साल पहले या दस साल पहले ऐसा कोई सिस्टम नहीं था कि बाहर जाकर उनकी काउंसलिंग कराई जाए। ये सब फायदे हो रहे हैं गुस्सा करने की कीमत पर। बच्चे हमसे बात करने के बजाय अपनी दिक्कत लेकर किसी अजनबी के पास जाकर, उसको वही पैसे देकर जो हमने कमाए थे अपनी दिक्कत का समाधान ढूंढऩे जा रहे हैं। फिर भी हम रुककर नहीं सोच रहे हैं कि क्या हम सही दिशा में चल रहे हैं? चुप्पी मन में है, बीमारी मन में है तो इलाज भी मन में ही है। लेकिन इलाज करने वाला भी मन ही है।  शांति और प्यार हमारी पहली पूंजी है। ईमानदारी दूसरी। या यूं कहें कि शांति की अहमियत पहली है और ईमानदारी का नंबर उसके बाद आता है। हम दूसरी पूंजी को इसलिए अहमियत नहीं देते क्योंकि पहली पूंजी कहीं बाकी ही नहीं है। प्रेम, पवित्रता, सुख, शांति, शक्ति, ज्ञान और आनंद ये आत्मा के सात गुण है। ईमानदारी तो दूर की बात है। प्राथमिक रंग होंगे तो उनको मिलाकर हम दूसरे रंग बना सकते हैं। अगर प्राथमिक ही नहीं होगा तो बाकी बातें कोई काम नहीं करेंगीे। जहां शांति नहीं है, गुस्सा है, फायदा ज्यादा चाहिए तो आप ईमानदारी का इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं। फिर मैं कहूंगा कि गलत तरीका अपनाओ, जल्दी-जल्दी काम करो क्योंकि हमें जल्दी-जल्दी मुनाफा चाहिए।  खुशी नहीं है तो हमने सोचा कि खुशी दूसरी जगह है। रास्ते में कोई आया तो मैं कुछ भी करने के लिए तैयार हो जाती हूं। मूल्य इसलिए काम नहीं कर रहे क्योंकि आत्मा के जो प्राथमिक मूल्य हैं उसका हम इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं। अब हमने सोचा कि मूल्य हमें बाहर से मिलेंगे। मुझे प्यार, खुशी और शांति चाहिए तो परमात्मा ने आकर बताया कि मैं शांत स्वरूप आत्मा हूं।

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