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भास्कर एक्सप्लेनर:कोविन पर रजिस्ट्रेशन कैसे होगा? वैक्सीनेशन साइट पर कौन-कौन होगा? कैसे लगेगी वैक्सीन? जानिए सबकुछ

5 दिन पहलेलेखक: रवींद्र भजनी
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केंद्र सरकार ने शनिवार को कहा था कि कोरोनावायरस के खिलाफ वैक्सीनेशन 16 जनवरी को शुरू होगा। मंगलवार को पुणे के सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (SII) से कोवीशील्ड और बुधवार को हैदराबाद के भारत बायोटेक से कोवैक्सिन की डिलीवरी शुरू हुई। सरकार का कहना है कि वैक्सीनेशन शुरू होने से एक दिन पहले यानी 15 जनवरी तक सभी सेंटरों तक वैक्सीन पहुंच जाएगी।

सरकार ने पहले फेज में 1.65 करोड़ वैक्सीन का ऑर्डर दिया है। 1.1 करोड़ वैक्सीन डोज का ऑर्डर सीरम इंस्टीट्यूट को कोवीशील्ड के लिए और 3.85 करोड़ वैक्सीन डोज का ऑर्डर भारत बायोटेक को कोवैक्सिन के लिए दिया है। इसके अलावा भारत बायोटेक कोवैक्सिन के करीब 16.5 लाख वैक्सीन डोज सरकार को फ्री में उपलब्ध करा रहा है। इन दोनों ही वैक्सीन को भारत के ड्रग रेगुलेटर ने 3 जनवरी को इमरजेंसी अप्रूवल दिया था।

कोवीशील्ड को ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और एस्ट्राजेनेका ने मिलकर तैयार किया है और भारत में सीरम इंस्टीट्यूट इसका प्रोडक्शन कर रही है। वहीं, भारत बायोटेक ने कोवैक्सिन को इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरलॉजी (NIV) के साथ मिलकर बनाया है। इसके फेज-3 ट्रायल्स के रिजल्ट्स अब तक नहीं आए हैं, ऐसे में इसका इस्तेमाल क्लिनिकल ट्रायल्स की ही तरह होगा। आइए जानते हैं कि इसके आगे वैक्सीनेशन का प्लान क्या है? लॉजिस्टिक्स के बाद अब किस तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है?

वैक्सीनेशन में किस तरह की चुनौतियां हैं?

  • भारत में अगली बड़ी चुनौती होगी देश के कोने-कोने तक वैक्सीन को पहुंचाना। जरूरतमंदों को वैक्सीन लगाना। फिर साइड इफेक्ट्स की निगरानी करना। केंद्र सरकार ने पूरे देश में तीन बार वैक्सीनेशन के ड्राई रन किए हैं, ताकि खामियों को पकड़ा जा सके। इसके अनुसार कुछ जरूरी बदलाव भी किए गए हैं।

सबसे पहले किसे लगेगी वैक्सीन?

  • सरकार ने पहले फेज में 3 करोड़ लोगों को वैक्सीन लगाने का फैसला किया है। इसमें हेल्थकेयर और फ्रंटलाइन वर्कर्स शामिल होंगे। फ्रंटलाइन वर्कर्स में म्युनिसपल कर्मचारी, पुलिस, होमगार्ड, सेना के जवान होंगे। इसके बाद अगस्त 2021 तक 27 करोड़ अन्य हाई-रिस्क ग्रुप के लोगों को वैक्सीनेट करने का प्लान है। इनमें 50 वर्ष से ज्यादा उम्र के लोगों के साथ ही, उन्हें भी रखा गया है जिन्हें कोरोनावायरस की वजह से जान का खतरा है।
  • स्वास्थ्य मंत्रालय ने जिन्हें कोरोना इंफेक्शन हुआ है और जिनमें उससे जुड़े लक्षण दिख रहे हैं, उन्हें वैक्सीनेशन साइट्स पर न जाने की सलाह दी है ताकि वे अन्य लोगों को इंफेक्ट न कर सकें। स्वास्थ्य मंत्रालय ने बार-बार पूछे जाने वाले सवालों पर जवाब (FAQs) जारी किए हैं। इसमें भी कोरोना वैक्सीन लगवाने को पूरी तरह से लोगों की मर्जी पर छोड़ा गया है।

कोविन (Co-WIN) क्या है?

  • यह एक इलेक्ट्रॉनिक प्लेटफॉर्म है, जिस पर वैक्सीनेशन से जुड़ा हर डेटा उपलब्ध होगा। सरकार ने जो ड्राई रन कराए थे, उसमें न केवल राज्य सरकारों की तैयारी देखी गईं, बल्कि इलेक्ट्रॉनिक वैक्सीन इंटेलिजेंस नेटवर्क (eVIN) को भी परखा गया। इस प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल वैक्सीनेशन में होता है। इसे ही रीमॉडल कर कोविन (Co-WIN) बनाया गया है और ड्राई रन के दौरान मैदानी स्तर पर इसकी फंक्शनैलिटी भी चेक की गई।
  • कोविन भारत में लगाई जाने वाली हर कोरोना वैक्सीन का पूरा डिजिटल डेटाबेस होगा। वैक्सीन लगवाने वालों को ट्रैक करने, उन्हें वैक्सीन साइट्स की जानकारी की तारीख और समय बताने, वैक्सीनेशन से पहले और बाद की प्रक्रियाओं की निगरानी करने, बूस्टर डोज के लिए फॉलो-अप करने और वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट जारी करने के लिए कोविन का इस्तेमाल होगा।
  • केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने 5 जनवरी को बताया था कि हेल्थकेयर और फ्रंटलाइन वर्कर्स की जानकारी राज्यों और जिले के अधिकारियों ने कोविन सिस्टम पर अपडेट कर दी है। बताया जा रहा है कि अब तक 79 लाख लोगों की जानकारी सिस्टम पर दर्ज हो चुकी है। इस समय ऐप्लिकेशन पर सेल्फ-रजिस्ट्रेशन की इजाजत नहीं है।
  • सरकार ने यह भरोसा दिलाया है कि वैक्सीनेशन के बाद के चरणों में भारतीय भाषाओं में कोविन एक ऐप्लिकेशन या वेबसाइट के तौर पर उपलब्ध होगा। इस पर लोग सेल्फ रजिस्ट्रेशन कर वैक्सीनेशन से जुड़ी प्रक्रिया की निगरानी कर सकेंगे। वैक्सीनेशन के पहले फेज के बाद कोई भी व्यक्ति इस पर सेल्फ रजिस्ट्रेशन कर सकेगा।
  • आधार या कोई भी किसी सरकारी फोटो आईडी का इस्तेमाल आवेदक की पहचान की पुष्टि के लिए किया जाएगा, ताकि इसका गलत इस्तेमाल न हो सके। इसके अलावा 50 वर्ष से कम उम्र के ऐसे लोगों का भी रजिस्ट्रेशन होगा, जिन्हें किसी न किसी तरह का रिस्क है। सेल्फ रजिस्ट्रेशन के लिए उन्हें किसी विशेषज्ञ के दस्तावेज पेश करने पड़ेंगे।

कैसे काम करेगा Co-WIN?

इस समय कोविन सबके लिए उपलब्ध नहीं है। पर जल्द ही सरकार यह सबको उपलब्ध कराएगी। इस पर सेल्फ रजिस्ट्रेशन इस तरह किया जा सकेगा...

  • ऐप फ्री में डाउनलोड होगा। वेबसाइट पर जाकर भी रजिस्ट्रेशन कर सकेंगे। इस पर वैक्सीन से जुड़े हर डेटा को रिकॉर्ड किया जाएगा। यह एक तरह से डिजिटल ट्रैकर का काम करेगा।
  • किसी को वैक्सीन लगवानी है तो वह खुद भी रजिस्टर कर सकता है।
  • Co-WIN प्लेटफॉर्म पर 5 मॉड्यूल हैं- एडमिनिस्ट्रेटर, रजिस्ट्रेशन, वैक्सीनेशन, वैक्सीन लगवाने वाले की पुष्टि और रिपोर्ट।
  • एडमिनिस्ट्रेटर मॉड्यूल वैक्सीनेशन सेशन कंडक्ट करने वाले एडमिनिस्ट्रेटर्स के लिए है। इस मॉड्यूल में वो सेशन क्रिएट कर सकते हैं। वैक्सीनेटर और मैनेजर को तैनात किया जाएगा।
  • रजिस्ट्रेशन मॉड्यूल उन लोगों के लिए है, जो खुद को वैक्सीनेशन के लिए रजिस्टर्ड करना चाहते हैं। सर्वेयर्स या स्थानीय प्रशासन भी इसमें डेटा अपलोड कर सकता है।
  • वैक्सीनेशन मॉड्यूल में वैक्सीन लगवाने वाले की जानकारी और वैक्सीनेशन स्टेटस अपडेट होगा।
  • वैक्सीन लगवाने वाले की पुष्टि (बेनेफिशियरी एनॉलेजमेंट) के लिए मॉड्यूल वैक्सीन लगवाने वाले को SMS भेजेगा और वैक्सीनेशन के बाद QR को बेस्ड सर्टिफिकेट्स भी जारी करेगा।
  • रिपोर्ट मॉड्यूल में रिपोर्ट्स तैयार होंगी कि कितने वैक्सीन सेशन हुए? कितने लोगों को वैक्सीन लगी? और कितने लोग ड्रॉप आउट रहे?

सेल्फ रजिस्ट्रेशन के दौरान क्या करना होगा?

  • सरकार ने बार-बार कहा है कि कोविन पर सेल्फ रजिस्ट्रेशन का विकल्प रहेगा। पर अब तक यह उपलब्ध नहीं है। जल्द ही भारतीय भाषाओं में ऐप या वेबसाइट के जरिए कोविन प्लेटफॉर्म सबको उपलब्ध होगा। इस पर कोई भी व्यक्ति रजिस्ट्रेशन करवा सकता है।
  • अगर आप हेल्थकेयर या फ्रंटलाइन वर्कर हैं तो आपका रजिस्ट्रेशन सरकार के अलग-अलग स्तर पर किया जा रहा है। आपको इसके लिए रजिस्ट्रेशन करने की जरूरत नहीं है। अगर आप इस कैटेगरी में नहीं आते हैं तो आपको यह साबित करना होगा कि आप हाई-रिस्क ग्रुप में हैं, जिन्हें प्रायोरिटी ग्रुप में रखा गया है।
  • इस स्थिति में आधार या किसी अन्य फोटो आईडी के जरिए आपकी उम्र 50 वर्ष से अधिक है या नहीं, यह साबित करना होगा। अगर आप 50 वर्ष से अधिक उम्र के हैं तो पहचान पत्र से यह साबित हो जाएगा। अगर आप 50 वर्ष से कम उम्र के हैं, पर आपको हाई ब्लड प्रेशर या डाइबिटीज जैसी कोई बीमारी है तो आपको विशेषज्ञ से इसे साबित करना होगा। यह दस्तावेज भी आपको सेल्फ-रजिस्ट्रेशन के समय पेश करना होगा।

क्या हम वैक्सीन चुन सकते हैं?

  • नहीं। केंद्र सरकार ने साफ किया है कि अगर आप वैक्सीन लगवा रहे हैं तो आपके पास कोई विकल्प नहीं होगा। केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने कहा कि किसी भी देश में इस तरह का विकल्प नहीं दिया जा रहा है। ऐसे में भारत में दिए जाने की संभावना बिल्कुल नहीं है।
  • वैसे, नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) डॉ. वीके पॉल ने कहा कि भारत में जो वैक्सीन लग रही हैं, वह दुनिया में सबसे सेफ है। घबराने की कोई जरूरत नहीं है। इन्हें हजारों लोगों पर आजमाया गया है और किसी भी तरह का कोई गंभीर साइड इफेक्ट नहीं दिखा है।
  • इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) के डायरेक्टर जनरल डॉ. बलराम भार्गव ने कहा कि पहले और दूसरे डोज के बीच अधिकतम 28 दिन का अंतर रखा जाएगा। वैक्सीन का असर दूसरा डोज लगने के 14 दिन बाद स्पष्ट दिखाई देगा।

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