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न्यूयॉर्क टाइम्स से:क्वारैंटाइन के समय गलती मानने में संकोच न करें, इससे आप बुरे नहीं बनते; माफी मांगने से ताकत का एहसास होता है

3 वर्ष पहले
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  • असरदार माफी में 3 चीजें शामिल- गलती पर दुख जताना, जिम्मेदारी लेना और सुधरने की कोशिश करना
  • एक अमेरिकी महिला ने पार्टनर को चेतावनी दी कि यदि उसने पेन दोबारा गिराया तो वह तलाक दे देगी

एडम ग्रांट. कोरोनावायरस और लॉकडाउन के बीच कुछ लोग ऐसे भी हैं, वे जिन्हें प्यार करते हैं, उन्हीं को दुखी कर रहे हैं। खासकर जो क्वारैंटाइन में हैं, वे तमाम कोशिशों के बावजूद अपने करीबियों को तंग कर रहे हैं। हालात यह हैं कि एक अमेरिकी महिला ने अपने पार्टनर को चेतावनी दी कि अगर उसने अपना पेन एक बार और गिराया तो वह उसे तलाक दे देगी। साइकोलॉजिस्ट कहते हैं कि क्वारैंटाइन के समय गलती मानने में संकोच न करें, इससे आप किसी की नजर में बुरे नहीं बनते हैं। बल्कि, माफी मांगने से हमें ताकत का एहसास होता है। 

दरअसल, हम यह पता नहीं कर पाते हैं कि हमारा व्यवहार कब दूसरों को परेशान करने लगता है। हमें इस वक्त यह सीखने की जरूरत है कि इसमें कैसे सुधार सकते हैं। महामारी के पहले मीटू अभियान ने एक कोर्स में सिखाया था कि कैसे माफी न मांगे। कुछ माफियों के प्रकार इस तरह से हैं।

  • इफ-पॉलॉजी: मैं यह नहीं कहता कि यह मैंने किया है, लेकिन अगर मैंने ऐसा किया है तो इसके लिए सॉरी बोलता हूं।
  • नो फॉल्ट अपॉलॉजी: जरूर मैंने कुछ गलत किया होगा, लेकिन मुझे उस वक्त नहीं पता था कि यह गलत है।
  • प्री-पॉलॉजी: इससे पहले कोई मुझपर आरोप लगाए, मैं अपने पापों की जिम्मेदारी अपने ऊपर लेता हूं। लेकिन यहां असल पीड़ित मैं हूं। मैंने बचपन में बुरा वक्त देखा है।
  • अन-पॉलॉजी: मेरी माफी सच्ची थी, लेकिन मैंने जिस चीज के लिए माफी मांगी, वो मैंने नहीं किया, इसलिए मैं इससे इनकार करता हूं।

हम एक झूठी माफी को पहचान सकते हैं। इस बात का सबूत है कि अगर कंपनी के एग्जीक्यूटिव्स काम में गलती पर दुखी होने के बजाए हंसते हुए माफी मांगते हैं तो स्टॉक पर असर पड़ता है। आगामी तीन महीनों में उनकी कंपनी का स्टॉक रिटर्न गिर जाएगा। जहां संस्कृति में सभ्यता और समूहवाद हो, वहां माफी मांगना समस्या नहीं लगता। 

जापान में एक कंपनी ट्रेन के 20 सेकंड लेट हो जाने पर माफी मांगती है, तो वहीं कनाडा में अगर आप किसी के पैर पर पैर रख दें तो हो सकता है वो आपसे माफी मांगे। एक वैज्ञानिक के तौर पर मैं उत्सुक हूं कि हम रिश्तों में पश्चाताप और सुधार कैसे व्यक्त कर सकते हैं। माफी पर रिसर्च के बाद पता चला कि एक बेहतर माफी में तीन चीजें शामिल होती हैं।

  • 'मुझे माफ करना' यह माफी नहीं होती- अपने पुराने व्यवहार से हुए असर के लिए दुख जताएं। मुझे माफ करना अगर.., यह माफी नहीं है। इससे आप केवल संदेह जता रहे हैं कि आपने कुछ भी गलत किया है। एक गंभीर माफी बताती है कि आपके चुनावों ने किसी और पर बुरा असर डाला है। थैरेपिस्ट एस्थर पैरल कहते हैं कि इससे आप मानते हैं कि किसी गलत बात से दुख पहुंचा है, भले ही आप यह समझें कि आप सही थे। आमतौर पर हम हमारे मकसद को बचाने पर ध्यान देते हैं। इस बात से फर्क नहीं पड़ता कि हमारा इरादा किसी को दुखी करने का था, लेकिन सच्चाई यह है कि हमने दुखी तो किया है।
  • गलती न मानना अहंकार को दर्शाता है- जिम्मेदारी नहीं लेना ताकत को नहीं दर्शाता। यह अहंकार का संकेत है। कई बार हम खुद पर ध्यान न देकर दूसरों की हरकतों में गलतियां खोजने लग जाते हैं। एक्टर विल स्मिथ के मुताबिक, अगर कुछ टूट गया है तो इससे फर्क नहीं पड़ता कि यह किसकी गलती है, जब आपकी जिम्मेदारी इसे जोड़ना है। विल ने कहा, जिम्मेदारी लेने से ताकत का पता चलता है, जब आप लोगों पर इल्जाम लगाना बंद कर देते हैं। जिम्मेदारी उठाना ताकत वापस हासिल करने जैसा है।
  • भविष्य में बिगड़ी चीजों को सुधारें- बताएं कि आप भविष्य में कैसे खुद को सुधारेंगे। अगर आप यह नहीं समझा पा रहे हैं कि आप अपनी गलतियों को कैसे ठीक करेंगे या दिक्कत को रोकेंगे तो आप चीजें नहीं बदल सकते। कुछ लोग माफी मांगने की सलाह देते हैं। मेरे विचार में पहले हमने जो वादे किए हैं, उनको निभाना चाहिए। आखिरकार ईमानदारी कथनी और करनी के बराबर चलने में है। माफी तब नहीं दी जानी चाहिए, जब हम बदलने का वादा करते हैं। यह तब कमाई जानी चाहिए जब हम वादे को पूरा करते हैं।

क्योंकि माफी मांगना गलती का एहसास कराता है

  • यह तीन कदम तो उठाए जा सकते हैं। लेकिन सबसे मुश्किल है माफी मांगने के लिए तैयार होना। क्योंकि माफी मांगने का मतलब है ग्लानि और शर्म महसूस करना। इसके लिए साइकोलॉजिस्ट ने एक आसान तरीका सुझाया है। जब आप किसी को दुख पहुंचाते हैं तो अपने आदर्शों के बारे में सोचें। अगर आपको न्याय और उदारता नजर आती है तो आपको पता लगेगा कि माफी मांगने का मतलब यह नहीं है कि आप बुरे आदमी हैं।
  • यह याद रखने योग्य है कि लोग आपको अपने कामों के कारण निराश नहीं करते। ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि उनके काम करने के तरीके आपकी अपेक्षा को पूरा नहीं करते हैं। आप यह तय नहीं कर सकते कि लोग क्या करते हैं, लेकिन आप यह कर सकते हैं कि आपकी भावनाओं पर उनके काम का असर न हो।