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जरूरत की खबर:कॉपर की सतह पर कोरोनावायरस ज्यादा देर नहीं टिकता, इसलिए लोग इससे जुड़े प्रोडक्ट्स ज्यादा खरीद रहे; लेकिन एक्सपर्ट्स कर रहे अलर्ट

3 वर्ष पहले
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चिली के सेंडियागो स्थित एक वर्कशॉप में कॉपर लाइन्ड फिल्टर के साथ बनाए गए 3डी प्रिंटेड मास्क। - Dainik Bhaskar
चिली के सेंडियागो स्थित एक वर्कशॉप में कॉपर लाइन्ड फिल्टर के साथ बनाए गए 3डी प्रिंटेड मास्क।
  • डॉक्टर्स अब कॉपर को वायरस फैलने से रोकने के उपाय के तौर पर उपयोग करने की सलाह देना बंद कर दिया है
  • एक्सपर्ट्स की सलाह- वायरस को नियंत्रित करने के लिए कंपनियों को प्रोडक्ट में पर्याप्त कॉपर शामिल करना होगा

कैथरीन जे वू. बात मार्च महीने की है। यूनिवर्सिटी ऑफ एरिजोना के माइक्रोबायोलॉजिस्ट माइकल डीएल जॉनसन अपना ईमेल देखते तो उसमें मैसेज का अंबार होता था। इनमें सभी लोग एक ही सवाल पूछ रहे थे कि क्या कॉपर से बने प्रोडक्ट्स से कोरोनावायरस को खतरा कम किया जा सकता है? 

डॉक्टर जॉनसन बताते हैं कि उनके पास इसको लेकर रोज 4 से 5 ईमेल आते थे। कोई पूछता था कि क्या वे कॉपर को दवा के तौर पर खाने की सलाह देते हैं? कुछ लोग पूछते थे कि कॉपर का सामान पहननें से वे बीमारी को दूर रह सकेंगे। इनबॉक्स मैसेज की बाढ़ तो कुछ वक्त में खत्म हो गई, लेकिन कोविड 19 को लेकर कॉपर की दीवानगी जारी है। बीते कुछ महीनों में मेटल वाले सामान में लोगों की दिलचस्पी बढ़ी है। 

कंपनियां भी कर रहीं विज्ञापन
कई कंपनियां कॉपर लाइनिंग्स के साथ मास्क बनाकर और उनकी जर्म मारने की खासियत बताकर प्रचार कर रही हैं। हालांकि कॉपर में कुछ एंटीमाइक्रोबायल खासियत होती हैं, लेकिन डॉक्टर जॉनसन और दूसरे एक्सपर्ट्स इन प्रोडक्ट्स की खरीदी से पहले विचार करने की सलाह देते हैं। 

पैथोजन्स के खिलाफ तांबा क्या कर सकता है?

  • डरहम यूनिवर्सिटी में माइक्रोबायोलॉजिस्ट और बायोकैमिस्ट करेरा जोको के मुताबिक, जर्म्स के कॉन्सेप्ट से पहले से ही हम पानी भरने के लिए कॉपर का इस्तेमाल कर रहे थे और उसे पीने के लिए सुरक्षित रखते थे।
  • वैज्ञानिक जानते हैं कि यह मेटल माइक्रोब्स को मारता है और ई कोली, सेलमोनेला, इंफ्लुएंजा वायरस जैसे कई चीजों के फैलने को कम करता है। कुछ सेटिंग्स में यह कोरोनावायरस को भी प्रभावित कर सकता है।
  • न्यू इंगलैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन की एक स्टडी में शोधकर्ताओं ने पाया कि लैब के हालात में कोरोनावायरस कॉपर की सतह पर कुछ घंटों से ज्यादा नहीं रह सकता। जबकि स्टेनलेस स्टील और प्लास्टिक पर यह कुछ दिन ठहर सकता है। हालांकि वैज्ञानिक सतहों को वायरस फैलने का मुख्य जरिया नहीं मानते हैं।

कॉपर क्यों जरूरी है?

  • इंसानों के लिए कॉपर एक जरूरी न्यूट्रिएंट है, जो आपको आसानी से मिल जाएगा। डॉक्टर करेरा का कहना है कि कई माइक्रोब्स कॉपर पर इतने आसान नहीं होते हैं। जब कॉपर किसी कोरोनावायरस जैसे जर्म्स के संपर्क में आता है तो यह रिएक्टिव आयन छोड़ता है। यह आयन बग की बाहरी हिस्से पर हमला करते हैं और माइक्रोब के अंदर जाकर उसे कमजोर करते हैं। डॉक्टर जॉनसन ने बताया कि कॉपर माइक्रोब्स के लिए दूसरे तरीकों से भी नुकसान पहुंचा सकता है।
  • आयरन और जिंक जैसे मेटल आयन्स ज्ञात स्ट्रक्चर्स के साथ करीब 40 फीसदी प्रोटीन्स में पाए जाते हैं। इनमें से कॉपर सेल या वायरस के अंदर जाने का रास्ता बना लेता है और दूसरी धातुओं को हटा देता है। इतना ही नहीं कॉपर दूसरे मेटल्स के अंतर्गत आने वाले प्रोटीन को खत्म भी कर देता है।
  • डॉक्टर जॉनसन के मुताबिक, अगर आपके 40 फीसदी प्रोटीन्स ने काम नहीं किया तो आप भी काम नहीं करेंगे। यहां तक की हमारा इम्युन सिस्टम भी कॉपर के प्रोटेक्टिव पर्क्स को खराब करते हैं। यह देखना बाकी है कि इनमें से कौन सी स्थिति कोरोनवायरस के साथ लागू होगी और कब तक।

मेटल क्या मास्क में वायरस को कम करता है?

  • डॉक्टर जॉनसन और डॉक्टर करेरा ने कॉपर मिली हुई चीजें जैसे फेस मास्क को वायरस फैलने से रोकने के उपाय के तौर पर उपयोग करने की सलाह देना बंद कर दिया है। कपड़े या सर्जिकल मास्क जैसी लूज फिट कवरिंग्स एयर टाइट नहीं होते हैं। यह पहनने वालों को संक्रमण से सुरक्षा भी नहीं देते हैं। अगर पहनने वाला संक्रमित है तो मास्क दूसरों को बचाने में मदद करेगा।
  • 2010 में हुई एक स्टडी बताती है कि मेटल का सामान दूषित मास्क के अंदर इंफ्लुएंजा वायरस की संख्या को कम कर सकता है। वर्जीनिया टेक में एयरोसोल साइंटिस्ट लिंसे मार के मुताबिक, अगर कॉपर की फेस कवरिंग कोरोनावायरस को कम करती हैं, तो यह उन लोगों के लिए बेहतर है जो अपने मास्क को गंदा कर लेते हैं। कॉपर का एक भारी डोज आंख, नाक और मुंह में हाथों के जरिए जा रहे वायरस की संभावना को कम सकता है।

क्या मास्क में धातु की मात्रा एक समान नहीं होती?

  • सभी धातु मिले मास्क एक मात्रा में नहीं बनाए जाते हैं। निर्माताओं को उन्हें वायरस के खिलाफ सक्षम बनाने के लिए पर्याप्त कॉपर का उपयोग करना होगा।
  • डॉक्टर करेरा कहते हैं कि अगर आपके मास्क में केवल 1 प्रतिशत कॉपर है, तो इसका मतलब है कि 99 फीसदी कॉपर नहीं है। अगर मेटल और माइक्रोब नहीं मिलेंगे, तो मास्क एक आम फेस कवरिंग जितना ही फायदा देगा।

यह कितना टिकाऊं होगा?

  • इस मास्क का टिकाऊ होना भी एक मुद्दा हो सकता है। खासतौर पर तब जब कॉपर मास्क बार-बार धोएं या डिसइंफेक्ट किए जा रहे हों। डॉक्टर करेरा के मुताबिक कई आम क्लीनर्स में ऐसे कंपाउंड होते हैं जो सुरक्षित सतह से कॉपर आयन को हटा सकते हैं। इसके बावजूद इस महामारी में कॉपर एक अहम भूमिका निभा सकता है। देखा गया है कि अस्पताल में कॉपर आधारित सतहों से कुछ पैथोजन्स का ट्रांसमिशन रेट कम हुआ है।
  • सभी एक्सपर्ट्स जोर देते हैं कि आसपास मेटल होने से सफाई पर असर नहीं पड़ना चाहिए। अपने आप में कॉपर कोई दवा नहीं है। इसके असर और प्रभाव में वक्त लगता है। सतह पर वायरस को आधा करने में कॉपर को करीब 45 मिनट का वक्त लगता है।
  • डॉक्टर मार के मुताबिक, ऐसा नहीं है कि वायरस कॉपर से मिलने के तुरंत बाद ही गायब हो गया। इसलिए जब भी आप कॉपर की कोई चीज सुरक्षा के लिए खरीदें तो यह दिमाग में रखें कि वायरस के जोखिम को कम करने के लिए लोगों को हाथ धोने चाहिए। डॉक्टर करेरा कहते हैं कि कॉपर एक अच्छा चुनाव है, आप इसमें शानदार लगेंगे, लेकिन आप जैसा सोच रहे हैं, वैसा यह काम नहीं करेगा।
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