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रश्मि बंसल का कॉलम:बिना संस्कार इंसान का डूबना तय है, पैसा भी उसे नहीं बचाएगा

13 दिन पहले
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रश्मि बंसल, लेखिका और स्पीकर

हर शहर में आपको कहीं न कहीं मिलेगी ‘लाला जगतमल की हवेली’। कौन थे ये शख्स? अपने समय के जाने-माने व्यापारी। इन्होंने मेहनत और शिद्दत से कारोबार बढ़ाया। फिर हर धनी इंसान की तरह एक आलीशान बंगला खड़ा किया। उसमें संगमरमर का फर्श और बर्मा की टीक का फर्नीचर लगवाया।

शहर में उनकी बड़ी वाहवाही थी। लालाजी के तीन बेटे थे, उसमें एक नालायक था, दूसरा थोड़ा आलसी। मगर लालाजी समझदार थे, सो किसी तरह परिवार बांधे रखा। उनके देहांत के बाद भाइयों में फूट पड़ गई।कारोबार का बंटवारा हो गया। एक ही घर में अलग-अलग मंज़िल पर रहने वाले भाई एक-दूसरे से अंजान जैसा व्यवहार करने लगे।

करोबार मजबूत था इसलिए चलता गया लेकिन बढ़त बंद हो गई। फिर भी लालाजी की तीसरी पीढ़ी ऐशो-आराम में पली-बढ़ी। अच्छे स्कूल-कॉलेज में दाखिला मिला। पर वहां पढ़ाई कम, टाइमपास ज्यादा किया। कुछ को शराब, सिगरेट, गांजे की लत लग गई। दुनिया की चर्चा, फालतू का खर्चा उनकी लाइफस्टाइल बन गया।

अचानक बिजनेस में एक क्राइसिस पॉइंट आया और वो डूब गया। आमदनी बंद हो गई मगर काम करने की आदत किसी को थी नहीं। कुछ जायदाद, कुछ गहने बेच-बेचकर गुजारा हुआ। हवेली के बगीचे में फूल नहीं कांटे उगने लगे। बंगले का रूप ढलने लगा और मरम्मत तक बंद हो गई। किसी ने कहा, हवेली बेचकर पैसा बांट लेते हैं। पर हकदार काफी थे और किस को कितना हिस्सा मिलेगा इसपर कोई सहमति नहीं। कुछ को ये भी डर था कि जाएंगे तो कहां? कहते थे कि लाला जगतमल ने इतना पैसा कमाया कि सात पीढ़ियां पल जाएंगी।

मगर पचास साल के अंदर सारा कबाड़ा हो गया। इसी परिवार की एक बहू ने सोचा, दल-दल में से निकलने का एक रास्ता है। मैं अपने दो बच्चों को पढ़ा-लिखाकर अपने पैरों पर खड़ा करूंगी। बड़ी मेहनत से उसने अपने लड़के और लड़की को आगे बढ़ाया, उन्हें प्रेरणा दी, उन्हें एक अलग ख्वाब दिखाया। आज एक डॉक्टर है और एक सीए। उस नरक से दूर, एक छोटे से फ्लैट में रहते हैं, मगर आत्मसम्मान के साथ।

कहानी का सत्यार्थ है कि मेहनत से जीवन संवर सकता है। मगर आने वाली पीढ़ी का भविष्य आपके वश में नहीं। जहां पैसा, वहां प्यार कहां? मेरा हिस्सा और तेरा हिस्सा का नारा जब लगा, वहां भाईचारा मरा। शायद यही भांप गए बिल गेट्स जैसे अरबपति। उन्होंने ऐलान किया है कि वे अपना पैसा-जायदाद और कंपनी बच्चों को पूरा-पूरा नहीं देंगे। ज्यादातर पैसा वो अपने जीते-जी समाज के भले के लिए खर्च कर रहे हैं। उनकी फाउंडेशन महाअभियान में जुटी हुई है, खासकर स्वास्थ्य को लेकर।

इससे दिमाग में एक ख्याल आया। लाला जगतमल क्या दे सकते थे अपने परिवार को, जो पैसों से भी बढ़कर होता है? अपने संस्कार। क्योंकि वही जीवन की आधारशिला है। पैसा न हो पर संस्कार हों, तो भी लाइफ बन सकती है। अगर पैसा है लेकिन संस्कार नहीं, तो समझो नाव में बहुत बड़ा छेद। आज नहीं तो कल डूबेगी ही।

नीरव मोदी, विजय माल्या और सुब्रतो रॉय के कारनामों के ऊपर एक डॉक्यूमेंट्री सीरीज निकली है और हर्षद मेहता स्कैम पर एक वेब सीरीज। झूठ का सहारा, लालच की हवस और दूसरों की परवाह बिल्कुल नहीं। माल्या साठवां बर्थडे मना रहे हैं, करोड़ों खर्च करके, मगर अपने एम्प्लॉयीज की सैलरी रोक दी। इस वजह से एक ने खुदकुशी कर ली।

लंदन में कोर्ट से निकलते हुए जब माल्या को रिपोर्टर्स ने घेरा तो उनके चेहरे पर कोई शर्मिंदगी नहीं थी कि महीनों आम जनता का पैसा लूटा। यही शर्म की कमी कई नेताओं में है। मगर याद रखें, आपके करोड़ों का ब्लैक मनी वो मैल है, जो आने वाली पीढ़ियों का दिल और दिमाग काला करेगा। सृष्टि के कानून से बचना मुश्किल नहीं, नामुमकिन है।

(ये लेखिका के अपने विचार हैं)

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