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  • According To Me, Honesty Prepares Not Only The Future Of Today, But An Entire Generation Of Tomorrow; History Will Always Remember Honest People

एन. रघुरामन का कॉलम:मेरे हिसाब से ईमानदारी न सिर्फ आज का भविष्य, बल्कि कल की एक पूरी पीढ़ी को तैयार करती है; इतिहास ईमानदार लोगों को हमेशा याद रखेगा

13 दिन पहले
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एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु

आ ज भी कुछ किराना दुकानों पर ऐसे बोर्ड नजर आते हैं जिनपर मोटे-मोटे अक्षरों में लिखा होता है, ‘आज नकद, कल उधार’ या ‘बिका हुआ माल वापस नहीं होगा’। बाकि बोर्ड और इनमें अंतर यह होता है कि इन्हें कभी हटाया नहीं जाता। इसमें कुछ गलत नहीं है। लेकिन समस्या तब होती है जब यही दुकानदार खाने का सामान खरीदते समय थोक विक्रेता से 90 दिन का क्रेडिट (उधारी) मांगता है या दावा करता है कि उसे क्रेडिट पीरियड के दौरान सामान वापस करने की पूरी छूट होगी।

मुझे कुछ दुकानदारों के इस ‘एक-तरफा’ सिद्धांत की याद इस मंगलवार को तब आई, जब मैं अपने कुत्तों के साथ मॉर्निंग वॉक से लौट रहा था। मेरे पड़ोस की एक महिला मेरे आंगन के बाहर खड़े होकर पारिजात (हरसिंगार) के फूल तोड़कर अपने पल्लू में रख रही थीं। आपको याद होगा कि इन फूलों को तोड़ने की जरूरत नहीं पड़ती। अगर आप शाख को हिलाते हैं तो ये अपने आप गिर जाते हैं। लेकिन महिला ने गिरे हुए फूल नहीं उठाए क्योंकि शायद उन्हें लगा होगा कि ये भगवान को चढ़ाने लायक नहीं होंगे।

यह बात समझी जा सकती है। इसलिए मैं इससे परेशान नहीं होता। और इसके अलावा बचपन से ही महाराष्ट्र का निवासी होने के कारण मुझे एक मराठी भावगीत की यह पंक्ति भी याद है, ‘बहरला पारिजात दारी फुले कां पड़ती शेजारी’ यानी ‘आपका पारिजात का पेड़ हमेशा पड़ोसियों को फूल देगा।’मुझे इससे भी कोई परेशानी नहीं है कि इतने सालों से यहां रहते हुए उन्हें यह अफसोस नहीं है कि उन्होंने एक बार भी मुझसे फूल तोड़ने की अनुमति नहीं ली। लेकिन मुझे परेशानी उनके परिवार से थी, जो मेरे माली से उसी पेड़ की शाखाओं को काटने के लिए कहते रहते हैं, जो उनके घर की तरफ झुकती हैं। न जाने क्यों पूरे परिवार को बगीचों और हरियाली से बैर है और उनके घर में एक भी पेड़-पौधा नहीं है। खैर, यह उनकी मर्जी है।

इससे मुझे इंदौर की हमारी एक भास्कर पाठक, असिस्टेंट प्रोफेसर सुनीता खन्ना (शादी के बाद वाहल) का भोपाल का अनुभव याद आया। भोपाल में वे मशहूर ब्यूरोक्रेट राकेश श्रीवास्तव के पड़ोस में रहती थीं, जो इंदौर जैसे शहरों के कलेक्टर रहे हैं। सुनीता के घर के बगीचे में ढेरों फूल थे और सैर से लौटते समय श्रीवास्तव जी की बेटी कनुप्रिया ने कुछ फूल तोड़ने की इच्छा जताई। उसकी मां वंदिता ने इस इच्छा पर आपत्ति जताई और कहा कि वह ज्यादा से ज्यादा गिरे हुए फूल उठा सकती है, लेकिन किसी पौधे को नहीं छू सकती। यही ‘आज का भविष्य तैयार करना’ कहलाता है।

फिर मेरा मन जुगाली करते-करते सोमवार को आईपीएल में केकेआर और आरसीबी के बीच हुए मैच की एक घटना पर पहुंचा। जब आरसीबी के एरॉन फ्लिंच ने एक गेंद बाउंड्री की ओर मारी तो केकेआर के शुभम गिल ने उसे रोक लिया। लेकिन उनका हाथ बाउंड्री को थोड़ा छू गया, जिसका मतलब था कि यह चौका है। लेकिन उन्होंने ऐसे जताया जैसे उन्हें यह पता ही न हो। लेकिन सभी कमेंटेटर्स ने कहा, ‘उनका चेहरा बता रहा है कि उन्होंने बाउंड्री छूने की गलती की है।’ फैसला टीवी अंपायर के पास गया और कुछ मिनटों में ही फ्लिंच के पक्ष में फैसला आ गया। यह ईमानदार खेल होता अगर गिल ने अंपायर को इशारा कर बताया होता कि उन्होंने बाउंड्री छू ली है।

फंडा यह है कि मेरे हिसाब से ईमानदारी न सिर्फ आज का भविष्य, बल्कि कल की एक पूरी पीढ़ी को तैयार करती है। इतिहास ईमानदार लोगों को हमेशा याद रखेगा।

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