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जयप्रकाश चौकसे का कॉलम:औरों जैसे होकर भी हम बाइज्जत हैं बस्ती में, कुछ लोगों का सीधापन है, कुछ अपनी अय्यारी है

2 महीने पहले
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जयप्रकाश चौकसे, फिल्म समीक्षक - Dainik Bhaskar
जयप्रकाश चौकसे, फिल्म समीक्षक

सु जॉय घोष और जयंतीलाल गढ़ा की विद्या बालन अभिनीत फिल्म ‘कहानी’ में बॉब विश्वास नामक पात्र दिखावे के लिए एक प्राइवेट बीमा कंपनी में काम करता है, परंतु वह एक कॉन्ट्रेक्ट किलर है। धन मिलने पर वह अनजान व्यक्ति का कत्ल करता है। मौत का ठेका देने वाला रहस्यमय व्यक्ति उसे एक फोटोग्राफ और पूरा पता भेजता है।

यह गौरतलब है कि ‘कहानी’ में पात्र बॉब विश्वास बस के नीचे कुचलकर मर जाता है। अनुमान है कि इस नई फिल्म में उसके सुपारी किलर बनने की वजह और प्रक्रिया प्रस्तुत की जा सकती है। ज्ञातव्य है कि शरलॉक होम्स नामक जासूसी पात्र रचने वाला ऑर्थर कानन डॉयल जब छात्र था, तब एक शिक्षक देरी से आने वाले छात्र के जूते में लगे कीचड़ से अनुमान लगा लेते थे कि यह उस क्षेत्र से आया है, जहां सुबह बारिश हुई थी। शिक्षक अपनी विचार प्रणाली को ‘थ्योरी ऑफ डिडक्शन’ कहता है।

इस एक विचार प्रणाली में हर एक संभावना को तर्क के आधार पर नकारते हुए सत्य तक पहुंचा जाता था। भारत में भी इसी तरह की प्रणाली को नेति कहते हैं। क्या यह सत्य है, यह नहीं हो सकता। इसी तरह तर्क द्वारा खारिज करते हुए सत्य तक पहुंचा जाता है। एक उपन्यास से प्रेरित फिल्म ‘यंग शरलॉक होम्स’ में उसके लड़कपन से युवा होने तक के सफर का वर्णन है। सुजॉय घोष की फिल्म में अभिषेक बच्चन अभिनय कर रहे हैं। अत: यह बॉब विश्वास के लड़कपन की कथा नहीं होकर उसके सुपारी लेने वाले कातिल होने के सफर का विवरण होे सकती है।

यह बड़ा कंपकंपा देने वाला यथार्थ है कि माता की पूजा में सुपारी को बादाम और काजू इत्यादि के साथ रखा जाता है। पवित्र सुपारी न जाने कैसे कत्ल करने का ठेका बन गई। बारात लेकर आया दूल्हा मुख्य द्वार पर रखा नारियल तोड़ता है। नारियल मनुष्य के सिर का प्रतीक है। उसका तोड़ा जाना क्या वधू पक्ष के आत्मसम्मान को झुका देना माना जाना चाहिए? विवाह की रस्में ऐसा संकेत देती हैं मानो युद्ध में लड़ रहा वधू का पक्ष, वर पक्ष का गुलाम है। जय-पराजय हमारी सदियों से चली आ रही परंपरा की तरह प्रस्तुत की जाती रही, जबकि विवाह का आधार प्रेम और परस्पर सम्मान होता है।

सुजॉय घोष की फिल्म में चित्रांगदा अभिनय कर रही हैं। क्या वे बॉब विश्वास की प्रेमिका रही हैं या बॉब काल्पनिक प्रेम में खुद को बहलाते हुए कत्ल की सुपारी लेने वाला बन गया? प्राय: जासूस पात्र के सहयोगी के माध्यम से मासूमियत और जिज्ञासा अभिव्यक्त होती है। शरलॉक होम्स अपने सहयोगी वॉटसन से कहते हैं- इट्स सो सिंपल वॉटसन।

बाबू देवकीनंदन खत्री का जासूस पात्र अय्यार कहलाता था जो भांति-भांति के वेश धारण करता है। निदा फाजली की पंक्तियां हैं- औरों जैसे होकर भी हम बाइज्जत हैं बस्ती में, कुछ लोगों का सीधापन है, कुछ अपनी अय्यारी है। वर्तमान हालात देखकर आभास होता है मानो अवाम को लखलखा सुंघा दिया गया है या प्राचीन किताबों के गलत अनुवाद की अफीम चटा दी गई है। बहरहाल, अवाम सो रहा है या जाग रहा है, वह नहीं जानता।

यह कड़वा यथार्थ शैलेंद्र रचित ‘जागते रहो’ का गीत ताजा करता है- जिंदगी एक ख्वाब है, ख्वाब में सच है क्या और भला झूठ है क्या, मय का एक कतरा पत्थर को होठों पर पड़ा, उसके सीने में दिल धड़का और उसने यह कहा, सब सच है। इस गीत के लिए लगाए गए सैट की दीवारों पर ‘कबीर’ नामक फिल्म के पोस्टर लगे हैं। इस तरह फिल्मकार और गीतकार अपना सृजन, ऊर्जा की गंगोत्री से कबीर को आदरांजली दे रहे हैं।

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