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जयप्रकाश चौकसे का कॉलम:बुरे लोगों की संगत में पड़ जाना दुर्भाग्य कहा जा सकता है, जीवन में कर्म ही निर्णायक माना जाना चाहिए

2 महीने पहले
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जयप्रकाश चौकसे, फिल्म समीक्षक - Dainik Bhaskar
जयप्रकाश चौकसे, फिल्म समीक्षक

मुख पृष्ठ पर खबर प्रकाशित हुई है कि राइट टू इन्फॉर्मेशन एक्ट के तहत एक पत्रकार को पेंशन विषयक जानकारी देने से इंकार कर दिया कि यह गोपनीय है। सरकार द्वारा दिया गया धन और रियायत गोपनीय कैसे हो सकती है? इस तरह की बात भी देखी गई है कि एक भूतपूर्व विधायक बाद में संसद के लिए चुना गया। आखिरी पड़ाव में उसे राज्यसभा में मनोनीत किया गया। उसे तीन जगह से पेंशन प्राप्त होती रही।

सांसदों को रेल यात्रा के पास मुफ्त में मिलते हैं। उसके रिश्तेदार और मित्र उस पास से यात्रा करते हैं। यात्रा के समय आम आदमी के लिए आधार कार्ड दिखाना आवश्यक है, गोयाकि फेक आधार कार्ड भी बनते हैं। फिल्म ‘जॉली एलएलबी2’ में नकली आधार कार्ड का प्रकरण प्रस्तुत किया गया था। सांसदों के लिए बने कैन्टीन में वह भोजन मात्र 10 रु. में मिल जाता है, जिसे पाने के लिए आम आदमी को 50 रु. चुकाने होते हैं।

महान साहित्यकार उदय प्रकाश की कथा ‘मोहनदास’ में एक व्यक्ति दूसरे के नाम को चुराकर उसकी पेंशन पाता है। यहां तक कि वह एक अपराध करके लापता हो जाता है तो वास्तव के मोहन दास को उसके गुनाह की सजा भी भुगतनी होती है। इस कथा से प्रेरित फिल्म भी उदय प्रकाश ने बनाई है। उन्होंने राजस्थान के महान कथा लेखक विजयदान देथा की 5 कहानियों पर भी फिल्में बनाई हैं।

दूसरी ओर हम देखते हैं कि हर सरकारी सेवक लगभग 30-40 वर्ष की सेवा करने के बाद पेंशन का हक़दार होता है। उसे प्रतिवर्ष अपने जीवित रहने का प्रमाण पत्र देना होता है। महज एक चुनाव ऐन-केन प्रकारेण जीतने पर इतना धन मिलता है और दूसरी ओर मेहनतकश व्यक्ति को अपना पसीना बहाने के बाद भी भर पेट भोजन नहीं मिलता। अनाज अपनी पीठ पर ढोने वाले व्यक्ति की कमर में कसे हुए कपड़े में चंद दाने उसके घर पहुंच जाते हैं।

चुनाव की एक जीत का सिक्का बार-बार भुनाया जा रहा है। दूसरी ओर मेहनतकश को अपना अधिकार भी नहीं मिल पाता। उनका सिक्का खोटा होने के बाद भी बाजार में चल रहा है। गोल्फ अमीर लोग खेलते हैं। मीलों फैले गोल्फ कोर्स को हरा बनाए रखने के लिए बहुत पानी देना होता है। इस खेल के लिए आवश्यक वस्तुएं मजदूर उठाकर चलता है। पी.जी वुडहाउस की एक रचना का नाम ‘द हार्ट ऑफ ए गूफ’ है खिलाड़ी की रेटिंग को हैन्डीकैप कहा जाता है। यहां सारा अवाम हैन्डीकैप जीवन जीता रहा है। सारे अन्याय को भाग्य कहा जाना भी एक पतली गली है। हाथ की रेखाओं को देखकर भविष्य बताया जाता है।

चेतन आनंद की फिल्म ‘कुदरत’ में इस तरह महिमा मंडित किया गया है, ‘खुद को छुपाने वालों का, पल-पल पीछा ये करे, जहां भी हों मिट्टी के निशां, वहीं जरूर पांव ये धरे, फिर दिल का हरेक घाव अश्कों से यह धोती है, सुख-दु:ख की हरेक माला, कुदरत ही पिरोती है। हाथों की लकीर में, ये जागती-सोती है।’ दरअसल सही समय अच्छे लोगों से मुलाकात हो जाने को सौभाग्य कह सकते हैं। बुरे लोगों की संगत में पड़ जाना दुर्भाग्य कहा जा सकता है। जीवन में कर्म ही निर्णायक माना जाना चाहिए।

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