मैनेजमेंट फंडा / गेम्स के जरिये गंभीर संदेश देना एक कला है

Giving serious messages through games is an art
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Giving serious messages through games is an art

एन. रघुरामन

एन. रघुरामन

May 23, 2020, 05:44 AM IST

क ल्पना कीजिए, आपका भाई काम के अवसर के लिए पड़ोसी राज्य गया है। अब सरकार ने सीमाओं पर लॉकडाउन कर दिया है और आपको चिंता है कि उसे घर वापस कैसे लाएं। आप क्या करेंगे? नजदीकी बस डिपो जाकर राज्यों के बीच चलने वाली बस तलाशेंगे, जहां पहले ही बहुत भीड़ है? या सीमा पार करने का कोई अनधिकृत, खतरनाक तरीका तलाशेंगे? या किसी ट्रक वाले को उसके साथ जाने के लिए पैसे देंगे?

आप जवाब दें, इससे पहले मैं ऐसा ही एक और सवाल पूछना चाहता हूं। फिर से कल्पना कीजिए, आप घरों में काम करते हैं और चार लोगों के परिवार को पालने की जिम्मेदारी है, जबकि बचत शून्य है। सरकार ने लॉकडाउन की घोषणा की है। अचानक आपका बेटा सीने में दर्द और बुखार की शिकायत करता है। अब आपके पास ये विकल्प हैं- क्या आप अपने मालिक से 3000 रुपए की सैलरी लेने 12 किमी चलकर जाएंगे? या क्या आप उधार देने वाले से 6000 रुपए 10 फीसदी ब्याज पर उधार लेंगे? या आप उन पैसों में से 4500 रुपए बेटे का कोविड-19 टेस्ट करवाने पर खर्च करेंगे, क्योंकि आपने महामारी के लक्षणों के बारे में पड़ोसियों से या वॉट्सएप पर काफी सुना है? या बेटे का घरेलू उपचार करेंगे?

हम सभी जानते हैं कि गरीबों के लिए लॉकडाउन कितना मुश्किल रहा है, लेकिन कोरोना से बचने से जुड़े इस आसान लेकिन झकझोरने वाले गेम से आप खुद को उन गरीबों की जगह रखकर देख सकते हैं और उनका दर्द समझ सकते हैं।  चेन्नई के एनजीओ ‘येन उड़ान’ ने 29 अप्रैल को एक वीडियो गेम लॉन्च किया जो लॉकडाउन के दौरान गरीबों की हकीकत दिखाकर आंखें खोल देगा। गेम को एक्सआर लैब्स के सहयोग से लॉन्च किया गया है और यह महसूस करवाता है कि लॉकडाउन के दौरान जरूरतमंद किस दौर से गुजर रहे हैं। ‘सर्वाइव कोविड’ नाम के इस साधारण लेकिन असरदार गेम को ब्राउजर में covid.xrlabs.cloud पर जाकर खेल सकते हैं। 

एक्सआर लैब्स एक स्टार्टअप है जो ऑग्मेंटेड रियलिटी और वर्चुअल रियलिटी के इस्तेमाल के लिए जाना जाता है और ह्यूंडई, अपोलो टायर्स, लूव्र अबु धाबी जैसी बहुराष्ट्रीय कंपनियों की मदद करता है। साथ ही टेक्नोलॉजी को कई सार्थक तरीकों से इस्तेमाल करता है। इस तरह के ज्ञान के साथ इसके संस्थापक श्रीवत्सन जयशंकर और थिरूकुमारन सरवनन इस मौजूदा परिस्थिति में कुछ सार्थक योगदान देना चाहते थे और ज्यादा प्रायोगिक स्वरूप में जागरूकता फैलाना चाहते थे। तब एक्सआर लैब्स ने यह गेम बनाने के लिए वेदिका अग्रवाल से हाथ मिलाया, जो एनजीओ येन उड़ान की संस्थापक हैं। 

जब आप दिए गए विकल्पों में से एक को चुनते हैं तो ब्राउजर नतीजों पर ले जाता है। नतीजे ऐसे हो सकते हैं- 1. ‘कोविड-19 का जोखिम 10% बढ़ गया’ या 2. ‘आप बच गए’। अगर आपका पहला नतीजा है तो यह खेल जारी रखने या वापस जाने का विकल्प देगा और अगर दूसरा नतीजा है तो स्क्रीन पर तुरंत नजर आएगा, ‘लाखों लोग पीड़ित हैं और आप पेमेंट ऑप्शन के माध्यम से कोई भी राशि दान कर सकते है।’ ‘सर्वाइव कोविड’ आसान बहुविकल्प प्रश्नों पर आधारित है और एक विकल्प चुनने से तीन महत्वपूर्ण पहलुओं पर असर पड़ता है- पैसा, कोविड-19 का जोखिम और बचे हुए दिन। जैसे-जैसे खिलाड़ी आगे बढ़ता है, सवाल जटिल होते जाते हैं और उसे समाज के वंचित तबके के व्यक्ति के रूप से सही विकल्प चुनना होता है। 

सवालों के लिए डेटा वेदिका ने दिया है, जो जमीनी हकीकत से वाकिफ थीं। तीनों ने मिलकर सवाल तैयार किए और 10 दिन में गेम बनाकर इसे वेबसाइट के रूप में लाने का फैसला लिया ताकि यह ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचे। इसके जरिये अमेरिका, यूरोप और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के अलावा अन्य देशों से, जहां भारतीय रहते हैं, लोग दान दे रहे हैं। 

फंडा यह है कि गंभीर मुद्दों के बारे में गेम्स के माध्यम से सिखाना निश्चित रूप से एक कला है। जैसे आपके इलाज के लिए दवा कंपनियां कड़वी दवाओं को मीठी परत के साथ बनाती हैं।

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