मैनेजमेंट फंडा / कठिन समय है, पुराने कौशल को नए अवतार की जरूरत है

Have a hard time, old skills need a new avatar
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एन. रघुरामन

एन. रघुरामन

May 20, 2020, 04:24 AM IST

मंगलवार की सुबह मैंने बेटी को तैयार होकर घर में घूमते देखा। मेरा ध्यान उसके होठों पर गया जिन पर लाल रंग की लिपस्टिक का नया कोट था। मेरी त्योरियां चढ़ी देख उसने खुद ही इतनी गहरी लाल लिपस्टिक लगाने का कारण बताया। उसने कहा, ‘मेरा एक वेबिनार है और यह रंग स्क्रीन पर बहुत गहरा नहीं दिखेगा।’ मैं कैमरा और वास्तविक परिस्थिति में अंतर करने के उसके इस नए ज्ञान से प्रभावित हुआ। इस बातचीत से मेरी जिज्ञासा जागी कि लॉकडाउन खुलने के बाद जब सभी को मास्क पहना अनिवार्य होगा, ऐसे में लिपस्टिक इंडस्ट्री का भविष्य क्या होगा? मैंने एक परिचित से बात की जो ब्रांडेड वुमन केयर इंडस्ट्री में काम करते हैं। उन्होंने बताया कि लिपस्टिक की बिक्री 80 फीसदी तक कम हो जाएगी, क्योंकि आने वाले सालों में फेसमास्क इसकी जरूरत बदल देंगे। हालांकि, उनकी कंपनी को विश्वास है कि महिलाओं का फोकस अब आंखों के मेकअप पर चला जाएगा और आइब्रो प्रोडक्ट्‌स की मांग बढ़ेगी। कुछ कंपनियां टेक्सटाइल इंडस्ट्री के साथ स्किन कलर के या पारदर्शी मास्क बनाने पर काम कर रही हैं, ताकि लिपस्टिक की सेल बढ़ा सके।
इस बात से मेरी दूसरी जिज्ञासा जागी कि अभी कुशल और प्रशिक्षित लेबर क्लास को कॅरिअर को फिर से जीवित करने के लिए अपने ज्ञान में थोड़ा बदलाव लाना होगा। मेरे दिमाग में सबसे पहले बहुभाषी ब्रजेंद्र सिंह का नाम आया जो खजुराहो में टूर गाइड हैं। उन जैसे लोगों के पास बेचने के लिए कोई उत्पाद नहीं है, बस अपना कौशल है जिसे वे पर्यटकों को बेचते हैं। चूंकि वे 76 साल के हो चुके हैं, इसलिए उन्होंने रिटायर होने का फैसला लिया लेकिन दूसरों ने नहीं। चेन्नई की राधिका विजयाथिलाकन पिछले 25 सालों से जापानी पर्यटकों की टूर गाइड हैं और उन्होंने कॉर्पोरेट मेहमानों के लिए भी कई बार अनुवाद किया है। फिलहाल पर्यटन रुकने की वजह से पर्यटक नहीं आ रहे हैं। लेकिन राधिका परेशान नहीं हैं। वे अपने कौशल का इस्तेमाल ज्योतिषियों के विचारों का जापानी में अनुवाद करने में कर रही हैं।
दरअसल जापानियों को ज्योतिष विद्या बहुत आकर्षित करती है। इसी तरह इटालियन पर्यटकों को संभालने के विशेषज्ञ एस. शांताकुमार तमिलनाडु के चमड़ा उत्पादकों, उनके खदीदारों और इटली में टेक्निकल टीम को वेबिनार से जोड़ने का काम कर रहे हैं। जो लोग फ्रेंच, जर्मन, रशियन और स्पैनिश जैसी भाषाओं में निपुण हैं वे अपने कौशल से पैसा कमा रहे हैं और विदेशी क्लाइंट्स व भारतीय व्यापारियों को अनुवाद सेवाएं दे रहे हैं।
अब राहुल, भरत, मुकेश और राहुल जूनियर का उदाहरण ही ले लीजिए, जो कम पढ़े-लिखे हैं लेकिन उनमें उद्यमशीलता है। उन्होंने एक साल पहले घर साफ करने की सेवा शुरू की थी और लॉकडाउन शुरू होने से पहले तक उन्हें ऑनलाइन ग्राहक भी मिलते थे। इस शनिवार इन चार लोगों को एक आइडिया आया और उन्होंने शनिवार को अपना स्कूटर दिल्ली के पंजाबी बाग में एक पोस्टर के साथ खड़ा कर दिया। पोस्टर पर लिखा था, ‘कार बाहर से सैनिटाइज करवाएं केवल 50 रुपए में और टू-व्हीलर 20 रुपए में।’ स्कूटर के पास उनमें से एक बंदा पीपीई किट पहने खड़ा था। उन्हें भरोसा है कि जल्द लोग उनकी सेवाएं इस्तेमाल करेंगे। चूंकि उनके पास पेस्ट कंट्रोल मशीन है, जिसे उन्होंने सैनिटाइजर स्प्रे मशीन में बदल दिया है। आज लोग अपने आसपास के माहौल और खुद को लेकर बहुत सचेत हैं। ऐसे में कई स्मार्ट लोग बदलते समय के अनुसार खुद को ढालकर नए बिजनेस अपना रहे हैं। अपनी किस्मत को दोष देने की बजाय वे समान कौशल के साथ अपना अवतार बदल रहे हैं।

फंडा यह है कि  हमें यह स्वीकार करना होगा कि आगे मुश्किल समय है। इसलिए हाथों पर हाथ रख बैठने की जगह अपना चोला बदलें, नया अवतार अपनाएं और मार्केट में कमी को पहचान कर उसी कौशल को बेचें, जो आपके पास पहले से ही है।

मैनेजमेंट फंडा एन. रघुरामन की आवाज में मोबाइल पर सुनने के लिए 9190000071 पर मिस्ड कॉल करें

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