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जयप्रकाश चौकसे का कॉलम:अगर देश को फिल्म मान लें तो अवाम फिल्म के भीड़ दृश्य में अभिनय करने वाला नज़रअंदाज़ किए जाने वाला पात्र बना है

4 दिन पहले
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जयप्रकाश चौकसे, फिल्म समीक्षक

फि ल्म की सफलता का श्रेय प्राय: सितारों और संगीतकारों को दिया जाता है। चरित्र कलाकारों के काम प्रशंसित नहीं होते। कुछ लोग अत्यंत छोटी भूमिकाओं में गहरा प्रभाव उत्पन्न करते हैं। मसलन अमिताभ बच्चन अभिनीत ‘कुली’ में कलाकार एक दृश्य में मात्र दो शब्द बोलता है ‘मी जातो’। यह उसके पात्र के मृत्यु पूर्व बोला गया संवाद है।

छोटी भूमिकाओं में देव आनंद की सभी फिल्मों में रशीद खान ने अभिनय किया। राज कपूर की ‘श्री 420’ में वह रद्दी सामान बेचने व महंगी चीजों को गिरवी रखने का व्यवसाय करता है। नरगिस अभिनीत पात्र अपनी महंगी किताबें गिरवी रखने आती है और राज कपूर अपनी ईमानदारी के लिए खुद को मिला गोल्ड मैडल गिरवी रखने आता है। रशीद खान का संवाद है ‘क्या बुरा वक्त आया है कि विद्या और ईमान गिरवी रखे जा रहे हैं।’ संभवत: विद्या और ईमानदारी गिरवी रखने वालों के वंश के लोग व्यवस्था संचालित कर रहे हैं।

‘श्री420’ में ललिता पंवार अपने फुटपाथ पर उम्र गुजार देने वाले साथियों के साथ घर के पैसे जमा कराती है। ‘तुम्हारा अपना मकान’ पूछे जाने पर वह कहती है कि साथियों के घर ही कहीं वह कोने में पड़ी रहेगी। ऋषिकेश मुखर्जी ने बाद में उन्हें अपनी फिल्म ‘अनाड़ी’ और ‘मेम दीदी’ में लिया। इसी तरह नाना पालसीकर ‘जिस देश में गंगा बहती है’ में एक बूढ़े डाकू की भूमिका में थे। एक सदस्य पूछता है कि फलां-फलां लोगों का राज आया, हम डाकुओं का कब आएगा? पालसीकर का जवाब है कि ‘डाकुओं का दबदबा कब नहीं था?’

आजकल यह काम व्यवस्था कर रही है। मुमताज ने अपना कॅरिअर भीड़ के सीन में खड़े होकर शुरू किया फिर वें अपने दौर की शिखर नायिका बनीं। विजय आनंद की फिल्म ‘तेरे मेरे सपने’ में देव आनंद, विजय आनंद अभिनीत पात्र एक छोटे कस्बे में डॉक्टर है। देव आनंद साधनों के अभाव से तंग आकर महानगर में धन कूटने चला आता है, जहां धन और ख्याति के पीछे भागते हुए वह अपनी पत्नी को अनदेखा करने लगता है। विजय आनंद उससे मिलने आते हैं और बैठक की सारी बत्तियां बंद कर देते हैं। विजय आनंद का संवाद है, ‘डॉक्टर आनंद कमरे में अंधेरा रहने दो क्योंकि वह उजाले में विजय आनंद की बात सह नहीं सकेगा।’ इसी फिल्म के बाद विजय आनंद ने अभिनय करना प्रारंभ किया और देव आनंद ने निर्देशन करना।

नतीजा यह हुआ कि आनंद बंधुओं की फिल्म निर्माण संस्था दीवालियेपन की कगार तक पहुंच गई। राज कपूर ने मात्र 22 वर्ष की वय में फिल्म निर्माण संस्था प्रारंभ की और देव आनंद ने पांचवी फिल्म में अभिनय के बाद ही ‘नवनिकेतन’ फिल्म निर्माण संस्था गठित की। क्रिकेट में 12वें खिलाड़ी को क्षेत्र रक्षण के लिए बुलाया जा सकता है परंतु उसे बल्लेबाजी या गेंदबाज़ी का अधिकार नहीं होता। आज अवाम भी जीवन के क्रिकेट में 12वें खिलाड़ी जैसी है। अगर देश को फिल्म मान लें तो अवाम फिल्म के भीड़ दृश्य में अभिनय करने वाला नज़रअंदाज़ किए जाने वाला पात्र बना है। इसी तरह भाषा में कर्ता और क्रिया के साथ अन्य शब्दों का महत्व भी होता है।

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