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जयप्रकाश चौकसे का कॉलम:शिनजियांग प्रांत के एक छोटे से भू-भाग 'मुलान' पर बनी फिल्म विवादों में

14 दिन पहले
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जयप्रकाश चौकसे, फिल्म समीक्षक

अमेरिका की वॉल्ट डिज्नी ने ‘मुलान’ नामक कथा फिल्म बनाई है। चीन के एक क्षेत्र में अल्पसंख्यक समुदाय रहता है। इस स्थान और समुदाय की लोक कथा को ‘द बैलाड ऑफ मुलान’ कहा जाता है। फिल्म के प्रारंभ में आठ चीनी लोगों को लोक कथा एवं मुलान नामक स्थान की जानकारी उपलब्ध कराने के लिए धन्यवाद दिया है? अमेरिकी सोशल मीडिया पर चीनी लोगों को धन्यवाद दिए जाने पर ऐतराज हो रहा है। पूरी फिल्म न्यूजीलैंड में शूट की गई है। मुलान शिनजियांग प्रांत का एक छोटा सा भू-भाग है। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के प्रबल समर्थक अमेरिका में ऐसा विरोध, आश्चर्यजनक है। क्या संकीर्णता विश्वव्यापी व्याधि बन चुकी है।

ज्ञातव्य है कि हिटलर का यहूदी विरोध जर्मनी तक सीमित था। इसी नफरत से विश्वयुद्ध समाप्ति पर यहूदियों ने अपने लिए स्वतंत्र देश मांगा। जबकि सदियों से वे अनेक स्थानों पर रहे हैं। इसे पश्चिम ने समर्थन दिया और यूं इजराइल की स्थापना हुई। उस स्थान पर सदियों से रहने वाले फिलिस्तीनियों को खदेड़ दिया गया। इन लोगों ने गोरिल्ला युद्ध छेड़ा।

आधुनिक आतंकवाद का आरंभ इजरायल की स्थापना के बाद प्रारंभ हुआ। जिस भू-भाग को इजरायल का नाम दिया गया, उसका आधार एक प्राचीन ग्रंथ में दिया गया छोटा सा विवरण मात्र था। जवाहरलाल नेहरू ने मायथोलॉजी के आधार पर इजराइल स्थापना का विरोध किया था। अनेक बुद्धिजीवियों ने नेहरू का समर्थन किया कि मायथोलॉजी के आधार पर इस तरह के निर्णय न हों। तर्कसम्मत विचार का विरोध संभवत: हर काल खंड में किया गया है। वर्तमान को उसका स्वर्ण काल माना जा सकता है।

‘मुलान’ में स्थान को स्थापित करने के लिए मात्र एक विहंगम शॉट है। अभी अनेक फिल्मकार न्यूजीलैंड में शूटिंग कर रहे हैं वहां के नागरिक अनुशासित हैं। वहां शूटिंग की अनुमति मिलना सहज है। भारत में आउटडोर शूटिंग की अनुमति के लिए बड़े जतन करने पड़ते हैं। इसके लिए भी बिचौलिए होते हैं। चीन में 50,000 फिल्म स्क्रीन हैं। प्रदर्शन से भारी आय कुछ ही समय में अर्जित की जाती है। ज्ञातव्य है कि वॉल्ट डिज्नी के चीन में बने थीम पार्क में चीनी सरकार ने 5 मिलियन डॉलर का निवेश किया है।

वॉल्ट डिज्नी पंगा नहीं लेना चाहते। सोशल मीडिया का हंगामा प्रायोजित भी हो सकता है। ज्ञातव्य है कि वॉल्ट डिज्नी थीम पार्क बनाने के लिए उनकी एक टीम ने भारत का दौरा किया था। उनकी रपट भी थी कि भारत के अधिकांश लोग थीम पार्क का प्रवेश शुल्क नहीं दे सकते। अपने देश के इस अपमान से खिन्न होकर मनमोहन शेट्टी ने ‘इमेजिका’नामक थीम पार्क मुंबई में कुछ किलोमीटर दूरी पर बनाया। कोरोना के कारण इमेजिका महीनों से बंद पड़ा है, परंतु उसके रखरखाव पर भारी रकम खर्च हो रही है। सारे व्यवसाय इसी तरह ठप्प पड़े हैं। व्यवस्था को तो यह भी पता नहीं कि कोरोना के कारण हुए विस्थापन में कितने लोगों की मृत्यु हुई।

अमेरिका ने ‘लास्ट एंपरर’ फिल्म भी बनाई थी, जो चीन की एक ऐतिहासिक घटना से प्रेरित थी। एक काल्पनिक फिल्म चीन के व्यावसायिक नज़रिए को प्रस्तुत करती है। एक फिल्मकार ने चीन में शूटिंग प्रारंभ की। एक चीनी व्यक्ति ने पूंजी निवेश किया कुछ रीलें बनने के बाद अमेरिकन डायरेक्टर की मृत्यु हो गई। चीन के पूंजी निवेशक ने प्रचारित किया कि भव्य शवयात्रा शहर के प्रमुख मार्गों से होकर निकलेगी। इस घटना का विवरण देने अनेक देशों के वृत्तचित्र बनाने वाले लोग आएंगे। वृत्तचित्र के माध्यम से मार्ग पर बनी दुकानों का प्रचार पूरे विश्व में होगा।

इस तरह चीनी पूंजी निवेशक ने फिल्म में लगाई पूंजी से कहीं अधिक धन शव यात्रा के फिल्मांकन के माध्यम से कमा लिया। चीन को समझना कठिन है। स्वयंभू कूटनीतिज्ञ का ऊंट अब चीन के पहाड़ के सामने आया है। पुरानी कहावत है कि यदि ऊंट पहाड़ के पास नहीं आए, तो पहाड़ ऊंट के पास पहुंचना चाहिए। प्यासा कुएं तक नहीं पहुंच पाए तो कुएं को प्यासे के पास पहुंच जाना चाहिए।

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