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जयप्रकाश चौकसे का कॉलम:दूरियां मिटा कर एक-दूसरे के निकट आना पहले मान्यता थी, अब संक्रमण काल में दूरी ही रख सकती है सुरक्षित

9 दिन पहले
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जयप्रकाश चौकसे, फिल्म समीक्षक

कोरोना महामारी ने भाषा तक को प्रभावित किया है। किसी का टेस्ट निगेटिव निकलने का अर्थ है कि उसे रोग नहीं है। पॉजिटिव मतलब संक्रमित होना। समय-समय पर शब्द के अर्थ बदलते रहते हैं। दाऊद के दौर में ‘भाई’ का मतलब था कि फलां अपराध जगत के लिए काम करता है। खबर इस तरह की आ रही है कि संक्रमण गांवों में प्रवेश कर रहा है।

टेस्ट के लिए आयात किए गए उपकरण निर्यात करने वाले देश का घटिया माल हैं। इसी कारण ‘निगेटिव’ लोग कुछ दिन बाद ‘पॉजिटिव’ हो जाते हैं। पहले मान्यता रही की दूरियां मिटा कर मनुष्यों को एक-दूसरे के निकट आना चाहिए। संक्रमण काल में दूरी व्यक्ति को सुरक्षित रख सकती है। गीत है ‘आंखों ही आंखों में इशारा हो गया, बैठे-बैठे जीने का सहारा हो गया’।

डिजिटल से पहले फिल्में सेल्यूलाइड पर शूट होती थीं। संपादन के बाद फिल्म को प्रयोगशाला में पॉजिटिव पर मुद्रित किया जाता था, जिसे प्रोजेक्टर द्वारा दिखाते थे। सिनेमा संसार में सेल्यूलाइड के दौर में निगेटिव-पॉजिटिव एक-दूसरे पर निर्भर करते थे।

कुछ अमेरिकन फिल्मकार आज भी सेल्यूलाइड पर ही शूटिंग करते हैं। उनका विश्वास है कि डिजिटल सीमित समय तक ही बिम्ब को सुरक्षित रख पाएगा। जबकि सेल्यूलाइड शूट फिल्में लंबे समय तक सुरक्षित रहती हैं। अपराध जगत में किसी की हत्या के ठेका देने को ‘सुपारी देना’ कहा जाता था। प्रेमियों की दुनिया में प्रस्ताव को ‘बीड़ा दिया’ जाना कहते थे। यह पान खाने वाले बीड़े से जुदा था।

यश चोपड़ा की ‘सिलसिला’ में गीत था, ‘सोने की थाली में जोना परोसा, खाए गोरी का यार बलम तरसे...’। दृश्य में दो जोड़े बैठे हैं और पति-पत्नी की मौजूदगी में उनकी पत्नी को गीत द्वारा छेड़ा जा रहा है। पारिवारिक दर्शकों को यह अभद्रता पसंद नहीं आई। फिल्म की असफलता में एक कारण यह अभद्र गीत भी रहा। प्रदर्शन पूर्व प्रचार में गीतकार का नाम दिया था, बाद में हटा दिया गया। यह उत्तरप्रदेश का लोक गीत है। बीड़ा उठाने का अर्थ युद्ध करना होता था।

मीजल्स नामक बीमारी को छोटी माता व चेचक को बड़ी माता कहा जाता था। बचपन में ही इन बीमारियों से बचे रहने के लिए टीके लगाए जाते थे। दुखद घटना है कि अभिनेत्री गीता बाली को यह टीका नहीं लगा था। राजिंदर सिंह बेदी के उपन्यास ‘एक चादर मैली सी’ से प्रेरित फिल्म की शूटिंग के लिए गीता पंजाब गई थीं, लौटने पर उन्हें बुखार आया।

चेचक ने उनके प्राण ले लिए। उस समय तक तीन चौथाई फिल्म बन चुकी थी। शम्मी कपूर ने फिल्म का निगेटिव ही जला दिया। जिन लोगों ने 12 रील देखी थीं, उनका विचार था कि यह महान रचना थी, फिल्म के निर्देशक सीएल धीर थे। उनके पुत्र ने धारावाहिक ‘महाभारत’ में अभिनय किया था। यही व्यक्ति चोपड़ा के ‘कानून’ सीरियल में वकील की भूमिका में है। इन दिनों दूरदर्शन पर इसे पुनः प्रसारित किया जा रहा है।

इन दिनों दूरदर्शन पर पुराने कार्यक्रम प्रसारित हो रहे हैं। जाने क्यों श्याम बेनेगल द्वारा बनाई नेहरू की ‘डिस्कवरी ऑफ इंडिया’ नहीं दिखाई जा रही है?

ज्ञात रहे कि सहारा के लिए श्याम बेनेगल ने ‘सुभाष चंद्र बोस’ के संघर्ष से प्रेरित 4 घंटे का डॉक्यूड्रामा रचा था। नए सीरियल का प्रचार जारी है। कहा जाता है कि चीनी भाषा में किसी शब्द के उच्चारण से उसके अर्थ बदल जाते हैं। कहने वाले का अंदाज- ए- बयां ही महत्वपूर्ण होता है। शांति वार्ता में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले को इसकी जानकारी होनी चाहिए।

बादशाह अकबर ने मनुष्य की स्वाभाविक भाषा जानने के लिए एक विवाहित जोड़े को एक गूंगे महल में रखा। यह महल आगरा से दूर घने जंगल में बना था। सभी को आदेश था कि एक शब्द भी नहीं बोलें। कुछ समय बाद उनके नवजात बच्चे के 3 वर्ष का होते ही बादशाह गूंगा महल पहुंचे। बच्चे के मुंह से सियार, कौवे इत्यादि की आवाज आई। क्योंकि मनुष्य जो भाषा सुनता है वही भाषा बोलता है।

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