पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

Install App
  • Hindi News
  • Db original
  • Columnist
  • Management Funda: Being Self reliant For Different People Means Different, What Does It Mean For You To Be Self reliant?

एन. रघुरामन का कॉलम:मैनेजमेंट फंडा: अलग-अलग लोगों के लिए आत्मनिर्भर होने का मतलब अलग-अलग, आपके लिए आत्मनिर्भर होने के क्या मायने हैं?

15 दिन पहले
  • कॉपी लिंक
एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु

आज 10 से 15 हजार रुपए देने के बावजूद एम्बुलेंस कहीं नजर नहीं आ रही हैं और मरीज मेडिकल मदद न मिलने से पहले ही मर जा रहे हैं। कम से कम बड़े शहरों में तो यही हो रहा है, जहां कोरोना मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं। एम्बुलेंस का इंतजार करते हुए सांस न आने से मरने वाले मरीजों के बारे में सुनकर शहरी लोगों के मन पर भयानक असर हुआ है और उनका सिस्टम पर से भरोसा उठ रहा है। बेंगलुरु की फोर्सजीडब्ल्यू (फेडरेशन ऑफ रेसीडेंट वेलफेयर एसोसिएशंस, कम्युनिटीज एंड एस्टेबिलिशमेंट ऑफ ग्रेटर व्हाइटफील्ड) की 62 बिल्डिंगों के 25 हजार सदस्यों को महसूस हुआ कि इमरजेंसी की स्थिति में सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं पर निर्भर रहना महंगा पड़ सकता है। इसलिए बुधवार से उन्होंने खुद की दो एम्बुलेंस शुरू की हैं, जिनमें उनके खुद के चिकित्सा सहायक-सह-ड्राइवर हैं और डॉक्टर बुलाने की सुविधा भी है। यह सब केवल रहवासियों के लिए है। अगर आप सोच रहे हैं कि इसमें बहुत खर्चा हुआ होगा तो जवाब सुनकर आप चौंक जाएंगे क्योंकि इसका खर्च केवल 50 रुपए प्रतिमाह प्रति परिवार है। सदस्यों की बड़ी संख्या के कारण कीमत इतनी कम है वरना वेंटीलेटर और अन्य सुविधायुक्त एक एम्बुलेंस लीज पर लेने का खर्च दो लाख रुपए प्रतिमाह तक है।

ये एम्बुलेंस नई नहीं हैं बल्कि एक सर्विस प्रोवाइडर की थीं। जब फोर्सजीडब्ल्यू ने इन्हें खरीदा तो उन्होंने इसमें वेंटीलेटर व अन्य सुविधाएं लगवाईं। फोर्सजीडब्ल्यू ने 3 चिकित्सा सहायक नियुक्त किए हैं, जो एम्बुलेंस चलाएंगे भी। ये तीन शिफ्ट में काम करेंगे और 24 घंटे उपलब्ध रहेंगे। एक डॉक्टर भी नियुक्त किया है जो ऑनलाइन उपलब्ध होगा। रहवासियों के लिए टोल-फ्री नंबर भी है, जहां 24/7 हेल्पडेस्क एम्बुलेंस सेवा उपलब्ध कराएगी। एक बार में दो लोगों की क्षमता वाली ये एम्बुलेंस तभी भेजी जाएंगी जब अस्पताल में बेड कंफर्म होगा। ये सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं का विकल्प नहीं हैं, बल्कि बचाव का एक तरीका है। इसी शहर में लोहे-स्टील का बिजनेस करने वाले 49 वर्षीय संजय गरग 28 जून को कोरोना पॉजीटिव पाए गए, लेकिन बेड की कमी के कारण उन्हें 5 अस्पतालों ने भर्ती करने से मना कर दिया। उन्होंने इलाज के लिए एक दोस्त की पहचान का इस्तेमाल किया। अब ठीक हो चुके संजय यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि उनकी जैसी स्थिति किसी और की न हो। इसलिए उन्होंने 42 बेड का कोविड सेंटर बनाया है, ताकि किसी को भर्ती करने से इनकार न किया जाए। संजय ने सुनिश्चित किया है कि सेंटर में इनडोर गेम्स व अन्य मनोरंजन सुविधाएं हों, ताकि मरीजों का मन लगा रहे और वे अवसाद ग्रसित न हों।

एक और दिल छूने वाली कहानी पुणे की है, जहां डॉ. भाऊसाहेब जाधव ने एक अस्पताल बनाया है। कुछ ही महीने पहले उन्होंने इसे खड़ा करने में अपनी पूरी बचत लगा दी और इलाके के मरीजों की जरूरत को समझते हुए इसमें अत्याधुनिक मशीनें लगाईं। 42 वर्षीय ये डॉक्टर इस अस्पताल से अपनी जिंदगी बेहतर बनाना चाहते थे, लेकिन कोरोना मरीजों की बढ़ती संख्या से चिंतित होकर उन्होंने यह बिल्कुल नया, चार मंजिला अस्पताल पुणे म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन को दे दिया ताकि कोविड मरीजों का इलाज हो सके। उन्हें लगा कि वे पैसा बाद में कमा लेंगे लेकिन यह समय आशीर्वाद कमाने का है।

फंडा यह है कि अलग-अलग लोगों के लिए आत्मनिर्भर होने का मतलब अलग-अलग है। कोई खुद की देखभाल करता है, कोई दूसरों की, तो कोई पूरे शहर की। आप कैसे आत्मनिर्भर हैं?

0

आज का राशिफल

मेष
मेष|Aries

पॉजिटिव- मेष राशि के लिए ग्रह गोचर बेहतरीन परिस्थितियां तैयार कर रहा है। आप अपने अंदर अद्भुत ऊर्जा व आत्मविश्वास महसूस करेंगे। तथा आपकी कार्य क्षमता में भी इजाफा होगा। युवा वर्ग को भी कोई मन मुताबिक क...

और पढ़ें