जीने की राह / माता के समान होती हैं औषधियां

Medicines are like mother
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Medicines are like mother

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पं. विजयशंकर मेहता

पं. विजयशंकर मेहता

May 22, 2020, 08:26 AM IST

कितनी औषधियां बाजार में आ गई हैं कि मनुष्य भ्रम में पड़ गया। किसे लें, किसे न लें? कोरोना से बचना तो सबको है, इसलिए बचाव के तरीकों पर काम करना पड़ेगा। एक आदर्श आहार भी औषधि होता है। सबसे अच्छा और आदर्श आहार दूध को माना गया है, क्योंकि उसमें छह औषध पदार्थ संतुलित मात्रा में होते हैं- पानी, प्रोटीन, खनिज, चीनी, चर्बी और विटामिन। इसलिए दूध को और खासकर गाय के दूध को जीवन से जोड़ लीजिए। शास्त्रों में तो औषधि को माता कहकर संबोधित किया गया है। ‘शतं वो अम्ब धामानि सहस्रमुत वो रुह:। अधा शतक्रत्वो  यूयमिमं मे अगदं कृत।।” हे माताओं, तुम्हारी शक्तियां सैकड़ों हैं और तुम्हारी वृद्धि भी हजारों प्रकार की है। हे शत सामर्थ्य धारण करने वाली औषधियों, तुम मेरे इस रुग्ण पुरुष को निश्चय ही रोगमुक्त करो। यह वेदवाक्य निराला है। इसलिए इस समय जो भी औषधि बताई गई हो, इसी श्रद्धा से लीजिएगा क्योंकि अब सारे दौर धीरे-धीरे गुजर रहे हैं, नया रूप लेते जा रहे हैं। लॉकडाउन में परिवारों में जो अपनापन आरंभ हुआ था, उसका अजीरण सा हो गया है। अब लोगों को लगता है बहुत दिन अपनों के साथ रह लिए, अब चलें बाहर। सच तो यह है कि अपने आपको समझा लें कि पुराना दर्द ही नए दर्द की दवा है..। लॉकडाउन खुले या और आगे बढ़े, अब जीवन ऐसा होगा कि टोटियां भी खोल ली जाएं और फर्श भी साफ करते चलना है।

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