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जयप्रकाश चौकसे का कॉलम:आजकल सितारों की आत्मकथाएं प्रकाशित हो रही हैं और सचित्र होने के कारण वे देखी जरूर जा रही हैं

15 दिन पहले
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जयप्रकाश चौकसे, फिल्म समीक्षक - Dainik Bhaskar
जयप्रकाश चौकसे, फिल्म समीक्षक

एम.एस. सथ्यू ने अनिल कपूर को ‘कहां-कहां से गुजर गया’ में प्रस्तुत किया परंतु फिल्म सफल नहीं रही। बड़े भाई बोनी कपूर ने दक्षिण भारत के फ़िल्मकार के. बापू को उन्हीं की फिल्म के हिन्दी संस्करण के लिए अनुबंधित किया और नायिका पद्मिनी कोल्हापुरी के साथ फिल्म ‘वो सात दिन’ सराही गई। प्रेम प्रताप पटियाले वाले नामक पात्र को सराहा गया। परंतु अवाम में जुनून नहीं जागा। ‘मिस्टर इंडिया’ की सफलता ने अनिल कपूर को सितारा बना दिया।

अनिल को अमिताभ बच्चन के समकक्ष खड़े करने के प्रयास में ‘जंग’ बनाई गई। अनिल अमिताभ के समान लोकप्रियता अर्जित नहीं कर पाए। परंतु उन्हें डैनी बॉयल की फ़िल्म ‘स्लमडॉग मिलेनियर’ में संचालित कौन बनेगा करोड़पति कार्यक्रम की भूमिका अवश्य मिल गई।

अनिल के जीवन का निर्णायक मोड़ यह था कि उन्हें सितारा बनने के पहले सुनीता से प्रेम हो गया था जो शरीर को चुस्त बनाए रखने का प्रशिक्षण देती थीं। विवाह के पश्चात सुनीता ने अपने निवास स्थान में संस्था स्थापित की अनिल कपूर से नियमित कसरत कराई और गैर कपुराना भोजन कराया। नतीजतन अनिल, उम्र के सातवें दशक में भी चुस्त-दुरुस्त बने हुए हैं और उन्होंने विविध भूमिकाएं अभिनीत कीं। अनीस बज्मी की ‘वेलकम’ सीरीज में मजनू की यादगार भूमिका कर चुके हैं।

उनकी फिल्म ‘1942 ए लव स्टोरी’ सराही गई। बोनी, शबाना आजमी और संजीव कुमार अभिनीत फिल्म ‘हम पांच’ बना चुके थे। शबाना ने ही जावेद अख्तर और शेखर कपूर से उनकी भेंट कराई और सतीश कौशिक भी मिले। सतीश कौशिक ने ‘रूप की रानी चोरों का राजा’ और ‘प्रेम’ जैसे हादसे दिए। मनोरंजन जगत में सतीश कौशिक उस दीवार की तरह रहे जिस पर हर वर्ष नया कैलेंडर लगाया जाता है। ‘मि. इंडिया’ में सतीश ने कैलेंडर नामक पात्र अभिनीत किया था।

एक दौर में अरुणा ईरानी के भाई इंद्र कुमार ने अनिल कपूर और माधुरी दीक्षित के साथ सफल फिल्में रचीं। अनिल कपूर ने श्री देवी के साथ भी कुछ फिल्में अभिनीत कीं। यश चोपड़ा की महत्वाकांक्षी फिल्म ‘लम्हे’ में श्री देवी ने दोहरी भूमिका अभिनीत की। अनिल ने ‘लम्हे’ में दुविधाग्रस्त पात्र को कुशलता के साथ अभिनीत किया।

अभिनय के साथ ही अपनी जीवन-यात्रा में भी कर्तव्य का पालन करते हैं। श्री देवी की मृत्यु के बाद उन्होंने जाह्नवी और खुशी को सहारा दिया। अनिल के जीवन रूपी जहाज का लंगर सुनीता हंै। इसी कारण लहरों के थपेड़े वे आसानी से सह लेते हैं। अनिल कपूर के पिता सुरिंदर कपूर अत्यंत हंसमुख व्यक्तित्व थे। ‘मुग़ल-ए-आज़म’ के निर्माण के समय वे के.आसिफ के सहायक रहे। इसी कारण बोनी कपूर ने ‘मुग़ल-ए-आज़म’ के रंगीन संस्करण में रुचि ली।

एम.एस. सथ्यू की फिल्म ‘कहां-कहां से गुजर गया’ को अनिल कपूर जी रहे हैं। इस तरह एक फिल्म का टाइटल एक कलाकार की अभिनय यात्रा का नक्शा बन गया। गौरतलब है कि अनुराग कश्यप अनिल कपूर बनाम अनिल कपूर वेब सीरीज ‘एके बनाम एके’ के नाम से बना चुके हैं। यह संभव है कि अनिल अब अपने समकालीन ऋषि कपूर की तरह अपनी जीवन यात्रा सतीश कौशिक को सुनाएं और वे इसे लिखें। आजकल सितारों की आत्मकथाएं प्रकाशित हो रही हैं और सचित्र होने के कारण वे देखी जरूर जा रही हैं।

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