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जयप्रकाश चौकसे का कॉलम:संसाधनों का प्रयोग निर्माण से अधिक विध्वंस के लिए किया जा रहा है

16 दिन पहले
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जयप्रकाश चौकसे, फिल्म समीक्षक

क ई वर्ष पूर्व चीन ने भारत से हिंदी सिखाने वाले शिक्षकों को वहां आमंत्रित किया। मध्यम वर्ग के लोगों ने शिक्षकों से सीखा। वे सब शिक्षक बने और उन्होंने चीन के युवा वर्ग को हिंदी की शिक्षा दी। चीन भारत के बाजार पर कब्ज़ा जमाना चाहता था, इसलिए उसने चीन में हिंदी सिखाने वाले अनेक लोगों को प्रशिक्षित किया।

भारत में जितने लोग चीनी भाषा जानते हैं उनसे कहीं अधिक चीनी लोग हिंदी जानते हैं। चीन द्वारा भारत पर पहली बार आक्रमण के समय भी चीनी सैनिक ‘हिंदी चीनी भाई-भाई’ का नारा लगाते हुए आक्रमण करते थे। चीन में पके चीनी भोजन और भारत में खिलाए जाने वाले चाइनीज भोजन में बहुत अंतर है। हमारे देश में बने चीनी भोजन में भारतीय तड़का लगा होता है। हमारे नेता भी प्राय: समस्याओं पर तड़का ही लगाते हैं।

भारत में एकल सिनेमाघरों की संख्या कम थी। एकल सिनेमा और मल्टीप्लेक्स दोनों के स्क्रीन का कुल जमा-जोड़ 20,000 से अधिक नहीं है। कोरोना के कारण सिनेमाघर बंद हैं, परंतु मालिकों ने कर्मचारियों को वेतन दिया। हाल ही में केंद्रीय मंत्री गडकरी के प्रयास से दिल्ली में फिल्म उद्योग के प्रतिनिधियों और मंत्री ने विचार-विमर्श किया है। ज्ञातव्य है कि महाराष्ट्र में सिनेमाघर बनाने का लाइसेंस देते समय यह तय किया जाता है कि 21 वर्ष तक सिनेमाघर चलाया जाएगा।

वर्तमान में भारत के अधिकांश एकल सिनेमाघरों के मालिक उस स्थान पर अन्य व्यवसाय प्रारंभ करना चाहते हैं। फिल्म को मोबाइल पर देखने से उसका पूरा अनुभव हमें नहीं मिलता। सिनेमाघर में फिल्म देखना एक अलग ही अनुभव होता है। हालात कुछ ऐसे हैं कि लगता है कि भविष्य में शहर आए व्यक्ति को बताया जाएगा कि फलां जगह प्रकाश टॉकीज, अलका टॉकीज होता था, गोया कि शहर भ्रमण में सिनेमाघर का विध्वंस भी टूरिस्ट के लिए आकर्षण होगा।

मुंबई पर आतंकवादियों ने हमला किया था। दीवार पर लगी गोली के स्थान पर एक फ्रेम लगा दी गई है और उसे भ्रमण करने वालों को दिखाया जाता है। किसी दौर में मुंबई में 30 फिल्म स्टूडियो होते थे, अब मात्र तीन रह गए हैं।

वर्तमान में फिल्मकार वेब सीरीज बना रहे हैं। वेब सीरीज थ्रिलर होती हैं। प्रेम कथा वाली फिल्में बहुत कम बन रही हैं। सभी देशों में विज्ञान फंतासी बनाई जा रही हैं। फिल्मी करण की विकसित टेक्नोलॉजी अब उसकी कथावस्तु बन गई है। हॉलीवुड भी साउंड ऑफ म्यूजिक, माय फेयर लेडी, कम सेप्टेम्बर, समर ऑफ 42 जैसी फिल्में नहीं बनाता। सुपरमैन, स्पाइडरमैन के समान फिल्मों के पात्रों को एक ही फिल्म में प्रस्तुत किया गया। हम सभी गब्बर, मोगैंबो इत्यादि खल नायकों के पात्रों को एक ही फिल्म में प्रस्तुत कर सकते हैं। इस फिल्म में प्रेम चोपड़ा शामिल होकर अपना संवाद दोहरा सकते हैं। ‘प्रेम नाम है मेरा प्रेम चोपड़ा कहते हैं मुझे’। क्या अब पावन प्रेम भावना एक खलनायक पात्र का नाम मात्र बनकर रह गई है।

निरंतर परिवर्तन होते रहना स्वाभाविक है। समाज समुद्र में परिवर्तन की लहरें सतत चलती रहती हैं, परंतु समुद्र के तल में इस परिवर्तन का कोई प्रभाव नहीं पड़ता। समुद्र के तल में भांति-भांति के पौधे लगे हैं। जिन सीपीओं में मोती हैं वे सीपियां भी समुद्र तल में ऊंघती रहती हैं।

कुछ इस तरह की भयावह आशंका भी व्यक्त की जा रही है कि अगला युद्ध समुद्र के भीतर लड़ा जा सकता है। फ्रॉग मैन आर्मी का गठन भी कुछ देश कर रहे हैं। फ्रॉग मैन आर्मी में एक डिवीजन को राना टिग्रिना कहा जा सकता है। सबमेरीन का महत्व बढ़ जाएगा। यह दुखदाई है कि संसाधनों का प्रयोग निर्माण से अधिक विध्वंस के लिए किया जा रहा है।

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