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पर्दे के पीछे:सुर ना सजे, क्या गाऊं मैं, सुर के बिना जीवन सूना

4 महीने पहलेलेखक: जयप्रकाश चौकसे
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संजय लीला भंसाली ‘बैजू बावरा’ की पटकथा लिखते हुए धुनों का सृजन भी कर रहे हैं। अपनी दो फिल्मों के बाद भंसाली ने अपनी फिल्मों का संगीत भी रचना प्रारंभ कर दिया। खबर है कि वे इस फिल्म मेें दीपिका पादुकोण और रनवीर कपूर को लेना चाहते हैं। सांवरिया के निर्माण के समय ऐसा कुछ घटा कि रनवीर कपूर आहत हो गए। भंसाली की सफलतम फिल्म ‘हम दिल दे चुके सनम’ का संगीत दरबार सिंह ने रचा था। संजय भंसाली फिल्म ‘देवदास’ में पारो और चंद्रमुखी को साथ-साथ नचाते हुए प्रस्तुत कर चुके हैं। बैजू बावरा में भी ऐसा कुछ कर सकते हैं। फिल्म संगीत में लोक संगीत और शास्त्रीय संगीत दोनों का उपयोग किया जाता है। इतना ही नहीं, विदेशी धुनों की प्रेरणा से भी गीत रचे जाते हैं। पंकज राग की किताब ‘धुनों की यात्रा’ फिल्म संगीत पर लिखी श्रेष्ठ किताब है। किताब में विदेश से प्रेरणा लेकर रची गई धुनों का भी विवरण है। सभी संगीतकारों ने देश-विदेश से प्रेरणा ली है। सचिन देव बर्मन ने फिल्म ‘मेरी सूरत तेरी आंखें’ के लिए मधुर गीत रचा- पूछो न कैसे मैंने रैन बिताई..। सचिन देव बर्मन ने कहा कि इस धुन की प्रेणा उन्हें काजी नजरुल इस्लाम की रचना से मिली थी। नौशाद शास्त्रीय संगीत से प्रेरणा लेते रहे और शंकर-जयकिशन पश्चिम की सिम्फनी से से प्रेरित रहे। एक संगीतकार ने इस आशय की बात की कि शंकर-जयकिशन को शास्त्रीय संगीत का ज्ञान नहीं है। इसका जवाब शंकर-जयकिशन ने फिल्म ‘बसंत बहार’ के संगीत से दिया। सोहराब मोदी की ‘राजहठ’ में भी उन्होंने शास्त्रीय धुनें प्रस्तुत कीं। दरअसल, बरसात (1949) से ‘जोकर’ (1970) तक शंकर-जयकिशन छाए रहे। नौशाद का रुझान शास्त्रीय संगीत प्रेरित धुनों के साथ लोक गीतों की ओर था, परंतु दबंग फिल्मकार ए.आर.कारदार ने नौशाद को पश्चिमी सिम्फनी से प्रेरणा लेने के लिए कहा। आजकल इस तरह के दबंग फिल्मकार नहीं हैं। वर्तमान समय का फिल्म संगीत एक संगीत कंपनी द्वारा रचे ‘गीत बैंक’ पर ही निर्भर करता है। लता मंगेशकर, मो. रफी, मन्ना डे, आशा भोसले, गीता दत्त और मुकेश ने विलक्षण कार्य किया। के.एल.सहगल और सुरैया गाने वाले सितारे थे। हमारे यहां संगीत की शिक्षा देने वाले घराने हुए हैं। मैहर घराने का अपना गौरवमय इतिहास रहा है। उस्ताद अलाउद्दीन खान, रविशंकर विश्व विख्यात हुए हैं। बनारस के बिस्मिल्ला खान को अमेरिका के विश्व विद्यालय ने परिसर में रहकर छात्रों को शहनाई वादन का प्रशिक्षण देने की प्रार्थना की। मुंहमांगा पारिश्रमिक देने का प्रस्ताव भी दिया गया। बिस्मिल्ला खान ने सब कुछ नकार दिया। अरसे पहले किशोर वय के गायकों की प्रतियोगिता आयोजित की गई थी। पड़ोस के दुश्मन दोस्त देश से आया हुआ प्रतियोगी फायनल में पहुंचा। पुरस्कार की राशि बड़ी थी। उसने फायनल में गाने से इनकार कर दिया। वह अपने ही ग्वालियर घराने के किशोर से प्रतियोगिता नहीं करना चाहता था। संगीत घरानों में भाईचारा होता है। वे सुरों से शपथबद्ध हैं। संगीत क्षेत्र में राजनीतिक बंटवारे का कोई प्रभाव नहीं है। भला सरहदों के बावजूद सरहदों के बाहर जाते इंद्रधनुष को तोड़ा जा सकता है? यह अत्यंत दुखद है कि संगठित अपराध जगत में भी घराने होते हैं। उनका भाईचारा और प्रतिबद्धता अत्यंत शक्तिशाली  होती है। बकौल मारियो पुजो के कोरलीन घराना सबसे सशक्त रहा है। संगीत घराने सृजन करते हैं, अपराध घराने हत्या करते हैं। राजनीतिक क्षितिज पर संकीर्णता की शपथ लेने वाले घरानों का भी उदय हुआ है। घरानों की अदायगी को खयाल और ठुमरी में बांटा गया है। शाहजहां को ध्रुपद गायकी पसंद थी। तानसेन ने आगरा घराना कायम किया। राज कपूर और मुकेश एक ही संगीत पाठशाला में पढ़े और गुरु भाई रहे। राज कपूर को भैरवी तो गुरु दत्त को शिवरंजनी प्रिय रही। बिमल राय कल्याणी और यमन ठाठ पसंद करते थे। वर्तमान के संगीतकार ‘भूषण राग’ गाते हैं। संगीत को रिकॉर्ड करने में कम्प्यूटर जनित ध्वनियों के प्रवेश से वादक प्रजाति संकट में आ गई है।

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