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जयप्रकाश चौकसे का कॉलम:कवियों की आत्मा का ताप है किसान आंदोलन, जानसेवा ठंड में लगी है रचनाओं की झढ़ी

10 दिन पहले
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जयप्रकाश चौकसे, फिल्म समीक्षक - Dainik Bhaskar
जयप्रकाश चौकसे, फिल्म समीक्षक

पंजाब केवल अनाज उपजाने के लिए नहीं जाना जाता, वरन साहित्य क्षेत्र में प्रतिभाशाली व्यक्तियों ने पंजाब में जन्म लिया। पंजाब में वारिस शाह का जन्म 1722 में हुआ था। उन्होंने हीर-रांझा महाकाव्य रचा। बुल्ले शाह ने ‘काफिया’ नामक काव्य लिखा। 2007 में बुल्ले शाह का 250 वां जन्म दिवस बड़े उत्साह से मनाया गया। पंजाब में जन्मे बलवंत गार्गी, संतोष सिंह वीर, खुशवंत सिंह, राजेंद्र सिंह बेदी, बलराज साहनी, साहिर लुधियानवी, अमृता प्रीतम, अवतार संधु ने महत्वपूर्ण रचनाएं कीं।

मुल्क राज आनंद ने ‘द लॉस्ट चाइल्ड’ ‘द स्वार्ड एंड द सिकल’ ‘अनटचेबल’ और ‘टू लीव्स एंड अ बड’ की रचना की। पंजाब में जन्मे लोगों ने फिल्म अभिनय क्षेत्र में लंबी पारी खेली। खेल-कूद क्षेत्र में भी पंजाब का बड़ा योगदान रहा है। मिल्खा सिंह के जीवन पर राकेश ओमप्रकाश मेहरा ने ‘भाग मिल्खा भाग’ नामक फिल्म बनाई। ओम पुरी और राज बब्बर भी पंजाब द्वारा दी गई प्रतिभाएं हैं। पंजाब के लोक गीत मुंबई फिल्म उद्योग में गूंजते रहे।

विदेशियों ने भारत पर बार-बार आक्रमण किए और पंजाब ने उन्हें रोकने के प्रयास किए। पांच नदियों वाले प्रदेश में खून भी बहुत बहा है। पंजाब में ही महान गुरु नानक सिंह ने ऐसा धर्म प्रारंभ किया जिसमें एक ग्रंथ ही पूजा जाता है। गुरु ग्रंथ साहिब में कबीर और अन्य महान कवियों की रचनाएं शामिल की गई हैं। पंजाब के महान भगत सिंह के जीवन से प्रेरित अनेक फिल्में बनी हंै। इंदौर के आनंद मोहन माथुर ने ‘भगतसिंह बिग्रेड’ नामक संस्था के माध्यम से सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए हैं। इस संस्था की शाखाएं अन्य शहरों में प्रारंभ करने के प्रयास भी किए जा रहे हैं।

भारत के विभाजन के समय पंजाब ने बड़ा दर्द सहा है। बलराज साहनी के भाई भीष्म साहनी की लिखी किताब से प्रेरित गोविंद निहलानी ने ‘तमस’ की रचना की जिसे दूरदर्शन पर दिखाया गया। मनोहर श्याम जोशी का लिखा ‘बुनियाद’ आज भी याद किया जाता है दूरदर्शन इसे बार-बार प्रसारित करता है। ‘तमस’ के दो भाग दिखाए जाने के बाद इसके प्रदर्शन को रोकने की अर्जी अदालत में लगी थी। इतवार के दिन जज महोदय ने ‘तमस’ देखा और निर्णय दिया कि इसका प्रदर्शन रोका नहीं जा सकता। अमृता प्रीतम की एक रचना में उनकी गुज़ारिश इस तरह है।

‘आज वारिस शाह से कहती हूं, अपनी कब्र में से बोलो, इश्क की किताब का नया पृष्ठ खोलो, पंजाब की एक बेटी रोई थी, तुमने लंबी दास्तान लिखी, आज लाखों बेटियां रो रही हैं, वारिस शाह तुमसे कह रही है, उठ दर्दमंदों के दोस्त, उठ देख अपना पंजाब, वन लाशों से अटे पड़े हैं, चिनाब लहू से भर गया है।’

स्मरण आता है कि रणबीर कपूर अभिनीत ‘रॉकस्टार’ फिल्म में गीत ‘कतियां करूं, कतियां करूं सारी रातें कतियां करूं’ यह भी बुल्लेशाह प्रेरित रचना है। इसी तरह शाहरुख खान अभिनीत मणिरत्नम द्वारा निर्देशित फिल्म का गीत ‘छैया छैया छैया’ भी मूल रचना के ‘थैया थैया’ का ही दूसरा रूप है। राज कपूर की फिल्म ‘बॉबी’ का गीत है ‘बुल्ले शाह यह कहता है, बेशक मंदिर-मस्जिद तोड़ो पर किसी का दिल ना तोड़ो’ ज्ञातव्य है कि अमृता प्रीतम सिंह की रचना ‘पिंजर’ पर प्रभावोत्पादक फिल्म बनी है।

पंजाब के गीत दसों दिशाओं में गूंजते हैं। ‘जागते रहो’ में पंजाबी गीत है कि ‘मैं झूठ बोलिया कि मैं कुफ्र तोलिया, देखे पंडित, ज्ञानी, ध्यानी, दया धरम दे बंदे, राम नाम जपदे खान्दे गौशाला दे चंदे कि मैं झूठ बोलिया...

आजकल चल रहे किसान आंदोलन में वारिस शाह और बुल्ले शाह की रचनाओं को गाने से किसानों की आत्मा का ताप उन्हें जानलेवा ठंड और जोर-जुल्म से बचा सकता है।

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