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जयप्रकाश चौकसे का कॉलम:गणतंत्र प्रणाली श्रेष्ठ है, लेकिन अंधे उन्मादी लोग इसे खंडित कर देते हैं; ट्रंप भी यही कर रहे हैं

14 दिन पहले
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जयप्रकाश चौकसे, फिल्म समीक्षक - Dainik Bhaskar
जयप्रकाश चौकसे, फिल्म समीक्षक

अमेरिका में शस्त्र खरीदने के लिए कोई सरकारी आज्ञा पत्र नहीं लेना पड़ता। हमारे यहां जैसे फल सब्जी, कागज और कलम मिलते हैं वैसे ही अमेरिका में शस्त्र खरीदे जा सकते हैं। यह बात अलग है कि कुछ प्रदेशों में अवैध शस्त्र अधिकांश लोगों के पास हैं।

हमारे देश के एक प्रदेश में प्रतिदिन औसतन 5 दुष्कर्म होते हैं। हमारे यहां दिनदहाड़े चलती हुई सार्वजनिक बस में भी दुष्कर्म हुआ। एक कानून भी बनाया गया। कुछ धर्म का चोला ओढ़े लोग भी दुष्कर्म के अपराधी पाए गए और दंडित हुए। प्रकाश झा ने ‘आश्रम’ नामक वेब सीरीज इसी विषय पर बनाई है।

एक अमेरिकन फिल्म में प्रस्तुत किया गया है कि तीन नाबालिग छात्र प्राय: हिंसा करते व दुष्कर्म भी करते हैं, एक घटना के बाद उन तीन में से एक छात्र गिरफ्तार किया जाता है। एक मनोवैज्ञानिक जज से निवेदन करता है कि इस छात्र के अवचेतन में पैठी हिंसा और वासना से इसे मुक्त कर सकता है। जज, उस छात्र को सुधार का अवसर देता है।

मनोवैज्ञानिक छात्र को अपनी प्रयोगशाला में ले जाकर उसके हाथ-पैर बांधकर उसे कुर्सी पर बैठाता है। उस छात्र को निरंतर वासना की फिल्में दिखाई जाती हैं। सोने नहीं दिया जाता, पलकों पर क्लिप लगाकर उसे बार-बार दृश्य कई दिन तक दिखाए जाते हैं। इस प्रक्रिया द्वारा उसके अवचेतन में सेक्स व हिंसा के प्रति जुगुप्सा जगाई जाती है।

कुछ माह पश्चात उसे अदालत में प्रस्तुत करते हैं। एक नारी का चित्र देखते ही वह कांपने लगता है। जज टेबल पर अपने हैमर से अदालत में शांति बनाए रखने को कहता है, तो वह छात्र भय से बेहोश हो जाता है। अदालत यह स्वीकार करती है कि छात्र अब वासना से मुक्त हो गया है।

उस युवा को कोई दंड नहीं दिया जाता। वह अपने पुराने मित्रों से मिलता है। मित्र महसूस करते हैं कि यह वासनाविहीन और हिंसा से मुक्त अत्यंत भयभीत व्यक्ति है। वे उसे उबा देने वाला मान लेते हैं। एक दिन युवा के साथी एक लड़की को छेड़ते हैं, तो वह भयभीत हो जाता है।

इस फिल्म के अंत में युवा के मित्र उसे एक झील में फेंक देते हैं। एलन सिल्वर और एलिज़ाबेथ वार्ड द्वारा संकलित एवं संपादित फिल्म नोए नामक किताब में अवचेतन के अंधकार प्रेरित फिल्मों का पूरा विवरण मिलता है। ‘डबल इंडेम्निटी’ और ‘द पोस्टमैन ऑलवेज रिंग्स टुआइज’ इस श्रेणी की क्लासिक फिल्में मानी जाती हैं।

बहरहाल चुनाव में पराजित हुए डोनाल्ड ट्रंप के संचार साधन खारिज कर दिए गए हैं क्योंकि उनके भड़काने पर ही उनके चहेतों ने अमेरिकन सीनेट पर आक्रमण किया था। डोनाल्ड ट्रंप पहला पराजित प्रेसिडेंट है, जो न केवल चुनाव हारा है वरन उसने गरिमा भी खो दी है।

कई प्रयोगों के बाद गणतंत्र प्रणाली को श्रेष्ठ माना गया परंतु जब अंधे उन्मादी लोग इस तरह की गुंडागर्दी करते हैं तब आदर्श व्यवस्था खंडित हो जाती है। इस भयावह प्रवृत्ति का दोष भी नशे में गाफिल आम आदमी को जाता है। डोनाल्ड ट्रंप के खास भी इसी तरह कार्य कर रहे हैं।

नागरिकता बोध लील लिया गया है। अनुराग कश्यप भी मौजूदा हालात पर फिल्म बना सकते हैं, यह फिल्म रानी मुखर्जी अभिनीत ‘नो वन किल्ड जेसिका’ समान हो सकती है।

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