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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:जीने की राह: जीवन की खूबी है तूफानों से टकराने की

एक वर्ष पहले
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पं. विजयशंकर मेहता - Dainik Bhaskar
पं. विजयशंकर मेहता

तूफान को रोका नहीं, मोड़ा जाता है। रोकने से जो रुक जाए, वह तूफान होता भी नहीं है। अभी बहुतों के जीवन में कई ढंग से तूफान आया है। सबसे बड़ी आंधी महामारी के साथ किसी के जीवन में बेकारी की आंधी आ गई, किसी का पारिवारिक जीवन ज्वालामुखी सा हो गया। कुल मिलाकर अलग-अलग सूरत में हर आदमी के जीवन में तूफान है। सरकार रोज आंकड़े जारी कर देती है। इन आंकड़ों के भी तीन स्तर हैं।

पहला है दरबारी आंकड़े। इसमें राजनेता, नौकरशाह मिलकर तय करते हैं कितने बीमार हुए, कितने मरे, कितने बचे। फिर दूसरे स्तर के आंकड़े हैं परिवारी। इसमें परिवार वाले ही जानते हैं कि हुआ क्या है और होना क्या चाहिए था।

तीसरा स्तर वास्तविक महामारी का है। लेकिन अब महामारी से कौन पूछे तूने कितनी तबाही की और कितनी करने वाली है? उसके भी कई रूप हो गए हैं- कम्यूनिटी स्प्रेड, सुपर स्प्रेड और अब आ सकता है अनकंट्रोल्ड स्प्रेड।

ये तकनीकी नाम हैं इस महामारी के। लेकिन, याद  रखें खून को लाल पानी कहने से खून पानी नहीं हो जाता। ऐसे ही जीवन को धक्के मिलने, तूफान से आहत होने से जीवन, जीवन न रहे ऐसा नहीं होता। जीवन, जीवन ही है व इसकी बड़ी खूबी है तूफान से टकराने की जगह या तो उसे मोड़ दें, या खुद सुरक्षित हो जाएं।

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