मैनेजमेंट फंडा / ये भूगोल को इतिहास बनाने के दिन हैं

These are the days of making geography history
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These are the days of making geography history

एन. रघुरामन

एन. रघुरामन

May 21, 2020, 08:18 AM IST

इस समय जब पूरी दुनिया घरों में है और कई चीजें रुक गई हैं, ऐसे में कुछ लोग ‘भूगोल’ (पढ़ें दूरी) को ‘इतिहास’ में बदलकर मौजूदा कठिन परिस्थिति से लाभ कमा रहे हैं। वे ऐसी जगहों पर पहुंच रहे हैं जहां जाने की उन्होंने तब कल्पना भी नहीं की थी, जब सामान्य दुनिया तेज गति से चल रही थी। जी हां ‘भूगोल’ वाकई में उन लोगों के लिए इतिहास बन रहा है, जिन्होंने अपने भौतिक उत्पादों को दुकानों पर न बेचकर टेक्नोलॉजी को अपनाया। यहां इसके कुछ उदाहरण हैं- 
पहली कहानी: लगभग एक साल पहले काएरो फूड्स ने हैदराबाद में डेयरी उत्पादन शुरू किया, जिसमें आइसक्रीम भी शामिल थी। केवल कुछ दुकानों के साथ वह शहर के कुछ हिस्सों में सेवाएं दे रहा था और उसकी समय के साथ बढ़ने की योजना थी। पहले लॉकडाउन के पहले ही हफ्ते में इसने खुद को ‘फार्म टू होम’ (खेत से सीधे घर) सेवा में बदल लिया। उसने एक एप बनाया, उस पर सभी उच्च गुणवत्ता वाली सब्जियां शामिल कीं, जिन्हें वह स्थानीय किसानों से खरीदकर हैदराबाद और सिकंदराबाद के हर कोने में सप्लाई करने लगा। उसने उपलब्ध लॉजिस्टिक्स (माल ढोने की सेवाएं) की पड़ताल की और लॉकडाउन के समय में कड़ी मेहनत से बेहतर इस्तेमाल करने का प्रयास किया। 
उसने अपना काम सब्जियों तक सीमित नहीं रखा। एक बड़ी बेकरी से अनुबंध किया और वहां से अच्छी गुणवत्ता वाली ब्रेड की सप्लाई शुरू की। फिर एक निर्यातक से अंडे लेकर एप पर बेचने लगे। कुल मिलाकर कंपनी ने वह सब सप्लाई किया, जो ग्राहकों ने मांगा। उनका उद्देश्य था किसी को किसी भी चीज के लिए ‘ना’ नहीं कहना चाहिए, लेकिन क्वालिटी वाला सामान ही देना चाहिए।
दूसरी कहानी: जगदीश सुनागड़ के पिता की कर्नाटक में बीजापुर के पास 15 एकड़ जमीन है। जगदीश एमबीए हैं और उनसे यह नहीं सहा जा रहा था कि लाखों के प्याज, तरबूज, केले और भुट्‌टे बर्बाद हों और किसान हताश होकर उन्हें बिचौलियों को बेच दें। आज बसावना बागेवाड़ी हॉर्टिकल्चर फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी के सीईओ जगदीश पूरे दक्षिणी क्षेत्र में मांग और सप्लाई पर नजर रखते हैं और 22 गांवों के 1000 किसानों की फसल का प्रबंधन करते हैं। वे खुद लॉजिस्टिक्स मैनेजर बनकर किसानों को जितना संभव हो उतना फायदा दे रहे हैं। 
तीसरी कहानी: दुनियाभर में ब्लॉक प्रिंट वाले विभिन्न रंगों, चित्रों व संदेशों की डिजाइन वाले, स्किन-फ्रेंडली कपड़ों से बने फैशनेबल मास्क की मांग बढ़ी है। पिछले शनिवार, जब केंद्र ने भारत से नॉन सर्जिकल और मेडिकल मास्क के निर्यात पर लगी रोक हटा दी, तब जयपुर के टेक्सटाइल निर्यातकों के पास केवल दो दिन में ही 5 लाख मास्क की मांग आ गई। चूंकि कई वैश्विक बाजार खुल चुके हैं, इसलिए उन्हें ये मास्क कम से कम समय में चाहिए। बाजार चाहते हैं कि ये मास्क शुद्ध कॉटन से बनें और उनमें से कुछ ने ऑर्गेनिक डायिंग और प्रिटिंग की भी मांग की है। भले ही यह कम मार्जिन वाला बिजनेस है, लेकिन मात्रा बहुत बड़ी है। आने वाले दिनों में और भी ऑर्डर आ सकते हैं। उनमें से कइयों के लिए यह मुख्य टेक्सटाइल बिजनेस से हटकर काम होगा, लेकिन मास्क की मांग ने उन्हें उस ‘भूगोल’ में पहुंचा दिया जिसकी उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी। 
चौथी कहानी: एक साल पहले पेशेवर शेफ अचिंत्य आनंद ने खेती शुरू करने का फैसला लिया, क्योंकि उन्हें रेस्टोरेंट्स, होटलों को अच्छी गुणवत्ता की सब्जियां सप्लाई करने में बड़ा अवसर नजर आया। केवल 11 महीनों में ही लॉकडाउन ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया।
लेकिन लॉकडाउन के एक हफ्ते के अंदर ही उन्होंने एक वेबसाइट बनाई orders.krishicress.com और सब्जी की सप्लाई घरों में शुरू कर दी। हैदराबाद के काएरो के मालिक शरत रेड्‌डी की तरह आनंद को भी लॉजिस्टिक की समस्याएं आईं लेकिन उन्होंने भी इसके मैनेजमेंट को गहराई से समझा। इस प्रक्रिया में उन्हें अपने फरीदाबाद और छतरपुर के खेतों के आसपास के ग्राहक भी मिलने लगे, जो ऐसा ‘भूगोल’ था जहां वे फार्मिंग बिजनेस की शुरुआत के दिनों से ही सेवा देना चाहते थे। 
फंडा यह है कि तकनीक को अपनाएं, लॉजिस्टिक्स के प्रबंधन को संभालें और ‘भूगोल’ (दूरी) को इतिहास बनाएं।

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