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एन. रघुरामन का कॉलम:जब तक साइबर क्राइम काबू नहीं होता, हमें सुनिश्चित करना होगा कि चोर हमारे मोबाइल में न घुस पाएं

14 दिन पहले
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एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु। - Dainik Bhaskar
एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु।

ऐसा कहा जाता है कि सतयुग में असुर और देव लड़े थे, जबकि त्रेतायुग में भगवान राम और रावण का युद्ध हुआ, द्वापरयुग में एक ही घर के भाइयों, पांडवों और कौरवों की लड़ाई हुई और कलियुग में हम अपने आप से ही लड़ रहे हैं।

संक्षेप में कहें तो हम लगातार लड़ रहे हैं और ‘लड़ाई’ नाम की बुराई बड़ी होशियारी से दो लोकों से दो देशों और फिर हर किसी के घर में पहुंचकर हमारे अंदर तक आ गई है। इसलिए हम लगातार खुद से विचारों और कर्मों में लड़ रहे हैं। उदाहरण के लिए हम अलमारी के सामने खड़े होकर कितने मिनट बिताते हैं, यह सोचते हुए कि आज क्या पहनें? जैसे हमारे अंदर दो लोग लड़ रहे हों।

हमारे अंदर आस्था में भरोसा करने वाला कहता है, ‘आज शनिवार है, कुछ काला पहनो।’ जबकि अंदर का आधुनिक व्यक्ति कहता है, ‘ये वीकेंड है, पार्टी का समय है, तो कुछ चमक-दमक वाला पहनो। काले में तुम्हें कौन देखेगा?’ और इस तरह जिंदगी के हर पहलू में झगड़ा जारी रहता है। ज्यादा विकल्प यानी ज्यादा भ्रम।

शायद चोरों ने ज्यादा विकल्पों की चाह वाली यह कमजोरी पकड़ ली है। पहले वे हमपर सड़कों पर हमला करते थे, फिर हमारे घरों में करने लगे। हम बाहर नकली जेवर पहनने लगे और घर में सीसीटीवी लगवा लिए, जिससे चोरों में पुलिस द्वारा पकड़े जाने का डर बढ़ गया।

शायद यही कारण है कि अब उन्होंने आपके मोबाइल में सेंध लगा ली है, वह भी मीलों दूर बैठकर, शायद किसी और शहर या किसी और देश से। और दूर बैठकर यह पहुंच पाने के लिए उन्होंने योग्य आईटी इंजीनियर्स रखे हैं।

वरना आप मुंबई में हुई उस घटना को कैसे समझाएंगे, जहां बिहार और पश्चिम बंगाल के ठगों को गिरफ्तार किया गया है, जिन्होंने जानी-मानी कंपनियों के नाम से 125 नकली वेबसाइट बनाईं, एलपीजी की डिस्ट्रीब्यूटरशिप बांटीं और 10 हजार लोगों को धोखा देकर करीब 10 करोड़ रुपए ठग लिए।

उन्होंने भोले नागरिकों को आसान लोन का लालच भी दिया। छह लोगों के इस गैंग का मास्टरमाइंड एक आईटी इंजीनियर था, जिसने नकली साइट्स की मदद से हजारों को धोखा दिया। बाकी के आरोपी भी पढ़े-लिखे थे। उन्होंने लोन के ऑफर देने के लिए पटना में एक कॉल सेंटर बनाया था।

ठगों ने बजाज फिनसर्व, स्नैपडील, नापतौल, रिलायंस पॉवर और हिन्दुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड जैसी कंपनियों की नकली वेबसाइट बनाईं। ग्राहकों को डिस्ट्रीब्यूटरशिप की योग्यता पाने के लिए 50% पेमेंट करने कहा जाता था, जो 7 लाख रुपए था।

हमारे शरीर को कमजोर कर रहे कोरोनावायरस की वैक्सीन आने के बीच हमारी सरकार एक और वायरस को लेकर चिंतित है, जिसका नाम है डिजिटल लोन एप्स, जो लोगों को धीरे-धीरे आर्थिक रूप से कमजोर बना रहे हैं। आरबीआई पहले ही लोगों को निजी जानकारी साझा न करने की चेतावनी दे चुका है।

साइबर क्राइम के बढ़ते मामले देखते हुए बेंगलुरु पुलिस ने आरबीआई के सहयोग से अपने 22 कर्मचारियों के साथ एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया है, जहां बैंकों को दो घंटे के अंदर बैंक अकाउंट फ्रीज करने को कहा जाता है।

अगर बैंक प्रतिक्रिया नहीं देते हैं तो मामला नोडल अधिकारी के ध्यान में लाया जाता है और फिर तीसरे स्तर पर जाता है, जो कि खुद आरबीआई है। पैसे जल्दी वापस पाने के लिए वे धोखाधड़ी होने के पहले 24 घंटे में ही तेजी से काम करते हैं, जिसे वे ‘गोल्डन आवर्स’ कहते हैं, जैसा कि मेडिकल के क्षेत्र में होता है।

फंडा यह है कि जब तक हमारी एजेंसियां साइबर क्राइम के इस वायरस को काबू में नहीं कर लेतीं, हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि चोर हमारे मोबाइल फोन में न घुस पाएं।

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