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भास्कर एक्सप्लेनर:20 साल पहले अल-कायदा के आतंक से कांपा था अमेरिका, तालिबान से उसके रिश्ते दुनिया के लिए कितना बड़ा खतरा?

7 दिन पहलेलेखक: जयदेव सिंह

अमेरिका के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हमले को आज 20 साल पूरे हो गए हैं। 11 सितंबर 2001 को 19 आतंकियों ने चार कॉमर्शियल प्लेन हाइजैक किए। इनमें से दो प्लेन वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के नॉर्थ और साउथ टावर से टकरा दिए गए। वहीं, तीसरा प्लेन पेंटागन पर क्रैश किया गया था। इस हमले में 93 देशों के 2 हजार 977 लोग मारे गए थे। हमला अल-कायदा नाम के आतंकी संगठन ने किया था।

बीस साल बाद अल-कायदा फिर से चर्चा में है। इसकी वजह है तालिबान। वही तालिबान जो इस वक्त अफगानिस्तान की सत्ता पर काबिज है। इस तालिबान के अल-कायदा से सालों पुराने रिश्ते हैं। ये रिश्ते आने वाले वक्त में दुनिया के लिए नया खतरा बन सकते हैं। ऐसा कई एक्सपर्ट कह रहे हैं।

अल-कायदा कैसे बना? इसकी अमेरिका से दुश्मनी की क्या कहानी है? अल-कायदा के सरगना ओसामा बिन लादेन की मौत के बाद अल-कायदा का क्या हुआ? इस वक्त उसकी क्या स्थिति है? तालिबान का अल-कायदा को लेकर क्या स्टैंड है? आइए जानते हैं...

कैसे बना अल कायदा?
अल-कायदा का अरबी में मतलब ‘आधार’ होता है। 1980 के दशक में अफगानिस्तान पर सोवियत संघ का कब्जा था, उस दौर में सोवियत संघ को अफगानिस्तान से बाहर निकालने के लिए कई संगठन बने। इन संगठनों को अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA और पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI का समर्थन था। इनमें से एक अल-कायदा भी था। ओसामा बिन लादेन ने इसका गठन किया था। उसे सोवियत संघ के खिलाफ लड़ रहे मुजाहिद्दीनों का भी समर्थन था।

अमेरिका से दुश्मनी की कहानी क्या है?
लादेन सऊदी अरब के एक अमीर बिजनेसमैन का बेटा था। उसके पास परिवार की काफी संपत्ति थी। 1991 के खाड़ी युद्ध के दौरान अमेरिका ने सऊदी अरब में अपनी सेना की तैनाती की थी। उस वक्त लादेन ने वहां से अमेरिकी सेना को वापस बुलाने की मांग की थी। यहीं से अमेरिका और लादेन के बीच रिश्तों में अनबन शुरू हुई। 1996 में बिन लादेन ने अमेरिका के खिलाफ युद्ध का ऐलान कर दिया।

इसे तब गंभीरता से लिया गया जब अल कायदा ने केन्या के नैरोबी और तंजानिया के दार-ए-सलाम के अमेरिकी दूतावास पर हमला किया। 7 अगस्त 1998 को हुए इन हमलों में 200 से ज्यादा लोग मारे गए थे। 2000 में यमन में अल-कायदा के आत्मघाती हमले में 17 लोग मारे गए। इसके बाद 11 सितंबर 2001 को अल कायदा ने अमेरिका के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हमला किया।

इस हमले के बाद ही अमेरिका ने अफगानिस्तान में कार्रवाई शुरू की। जहां अल-कायदा का सरगना ओसामा छिपा हुआ था। अमेरिकी कार्रवाई के चलते अफगानिस्तान से तालिबान राज खत्म हो गया, लेकिन ओसामा पकड़ में नहीं आया। लंबे समय तक लादेन तालिबानी प्रभाव वाले इलाकों में छुपा रहा। अक्सर उसके अफगानिस्तान-पाकिस्तान सीमा से लगे इलाकों में छुपे होने की खबरें आती रहीं। कहते हैं कि अमेरिका से रिश्ते खराब होने के बाद भी लादेन के पाकिस्तान से रिश्ते बेहतर बने रहे। आखिरकार 2 मई 2011 को अमेरिकी नेवी के सील कमांडोज ने लादेन को पाकिस्तान के एबटाबाद में मार गिराया।

लादेन की मौत के बाद अल-कायदा का क्या हुआ?
बिन लादेन की मौत के बाद अल कायदा की कमान मिस्र के अयमान अल-जवाहरी के पास आ गई। बताया जाता है कि इस वक्त जवाहरी का प्रभाव इस आतंकी संगठन पर कम हुआ है। उसकी सेहत भी खराब रहती है। लादेन के बाद उसका बेटा हमजा अल कायदा का बड़ा चेहरा बना, लेकिन बाद में उसे भी मार दिया गया।

लादेन ने अमेरिका पर हमले क्यों किए?
नवंबर 2002 में लादेन ने अमेरिका के नाम एक लेटर लिखा था। इस लेटर में उसने अमेरिका पर किए हमले का कारण बताया था। लादेन ने हमले की वजह जियोनिस्ट क्रुसेडर अलायंस को बताया। उसका आरोप था कि ये अलायंस कई देशों में मुस्लिमों के खिलाफ हमले करता है। इसमें सोमालिया, बोस्निया हर्जेगोविना और लेबनान जैसे देश शामिल हैं।

इसके साथ ही लादेन ने सऊदी अरब में अमेरिकी सैनिकों की उपस्थिति, इजराइल को अमेरिका के समर्थन और कुवैत पर हमले के बाद इराक पर लगाए अमेरिकी प्रतिबंधों पर भी नाराजगी जताई थी।

9/11 हमले के बाद दुनिया में क्या बदला?
भारत इस आतंकवाद के मुद्दे को लंबे समय से उठा रहा था उसे लेकर दुनिया गंभीर हुई। अमेरिका ने आतंकवाद के खिलाफ अपना अभियान शुरू किया। अमेरिका ने अफगानिस्तान और इराक में युद्ध शुरू किया। उस वक्त के अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश ने इसे आतंकवाद के खिलाफ युद्ध घोषित किया।

इस हमले ने अमेरिका की फॉरेन पॉलिसी में बड़ा बदलाव किया। इसके साथ ही दुनिया के कई और देशों ने भी आतंकवाद के खिलाफ कड़े कदम उठाए। अमेरिका में भी गैर-अमेरिकियों के खिलाफ भावानाएं प्रबल हुईं।

इस वक्त अल-कायदा की क्या स्थिति है?
रिपोर्ट्स के मुताबिक सीरिया स्थित अल-कायदा की ब्रांच को विरोधियों ने खत्म कर दिया है, वहीं यमन में भी उसकी हालत खराब है। उनका नेता अल-जवाहरी लंबे समय से गायब है। अक्सर उसके मारे जाने की खबरें भी आती रहती हैं। हालांकि सोमालिया और माली में अल-कायदा की पकड़ काफी मजबूत मानी जाती है, वहीं अफगानिस्तान के तालिबान नेताओं से भी अल-कायदा के अच्छे संबंध बताए जाते हैं। कई रिपोर्ट्स में तो यहां तक दावा किया गया है कि तालिबान के साथ अमेरिका और अफगान सरकार के युद्ध में भी अल-कायदा के लड़ाकों ने तालिबान का साथ दिया है।

अल-कायदा और तालिबान के रिश्ते कैसे हैं?
सत्ता में आने के बाद तालिबान यह दावा करता रहा है कि वो अल-कायदा समेत किसी भी आतंकी ग्रुप को अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल नहीं करने देगा। हालांकि, तालिबान के अफगानिस्तान की सत्ता में आने के बाद माना जा रहा है कि अल-कायदा फिर से मजबूत होगा। अमेरिकी मिलिट्री अधिकारियों ने भी इस बात की चेतावनी दी है।

2001 के बाद भले अल-कायदा कमजोर पड़ा है, लेकिन उसके लड़ाके अब भी अफगानिस्तान में हैं। अप्रैल में आई अमेरिकी इंटेलिजेंस की रिपोर्ट में भी माना गया था कि अल-कायदा आने वाले समय में अलग-अलग इलाकों में हमले कर सकता है।

जून में संयुक्त राष्ट्र ने इस बात की चेतावनी दी थी कि अफगानिस्तान के 34 में से 15 प्रोविंस में अल-कायदा का दखल है। इस रिपोर्ट में कहा गया था कि तालिबान और अल-कायदा के बीच अभी भी नजदीकी संबंध हैं। तालिबान ये रिश्ते खत्म करने वाला है इसके भी कोई संकेत नहीं हैं।

वहीं, अफगानिस्तान के एनालिस्ट अब्दुल सैयद ने वॉशिंगटन पोस्ट को बताया कि इन दोनों के बीच संबंध पहले से ज्यादा मजबूत हुए हैं।

नई तालिबान सरकार का अल-कायदा को लेकर क्या स्टैंड है?
सत्ता में आने के बाद तालिबान आतंकवाद के लिए अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल नहीं होने देने की बात करता है, लेकिन उसके प्रवक्ताओं के बयान विरोधाभाषी रहे हैं। जैसे- उसके ही एक प्रवक्ता ने कहा कि इस बात का कोई सबूत नहीं है कि 11 सितंबर 2001 के आतंकी हमले में ओसामा बिन लादेन शामिल था।

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