लादेन और जवाहिरी जैसा खूंखार है अल आदेल:‘ब्लैक हॉक डाउन’ से अमेरिकियों में फैलाई दहशत, खेतों में आतंकियों को बम बनाना सिखाता था

16 दिन पहलेलेखक: नीरज सिंह/ अनुराग आनंद

2 मई 2011: अमेरिका ने दुनिया के सबसे खतरनाक आतंकी और अल कायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन को पाकिस्तान के ऐबटाबाद में मार गिराया।

अल कायदा प्रमुख बना- अयमान अल जवाहिरी

31 जुलाई 2022: अमेरिका ने अल कायदा प्रमुख अयमान अल जवाहिरी को काबुल में मिसाइल हमले में मार गिराया।

नया अल कायदा प्रमुख- कौन?

वाशिंगटन डीसी के थिंक टैंक मिडिल ईस्ट इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट के मुताबिक नया अल कायदा प्रमुख बनने की रेस में सबसे आगे सैफ अल आदेल है। आज एक्सप्लेनर में हम बता रहे हैं कि आदेल कैसे लादेन और जवाहिरी जैसा ही खूंखार है…

मिस्र का वो कर्नल जो खेतों में आतंकियों को विस्फोटक बनाने की ट्रेनिंग देता था
अल कायदा के एक्सप्लोसिव एक्सपर्ट सैफ अल आदेल का जन्म 1960 के दशक की शुरुआत में मिस्र में हुआ। माना जाता है कि उसका असली नाम मोहम्मद सलाह अल-दीन जैदान है, लेकिन सैफ अल-आदेल नाम के पीछे एक कहानी है। सैफ अल-आदेल का अर्थ है ‘सोर्ड ऑफ जस्टिस’ यानी न्याय की तलवार। इसीलिए उसने अपना नाम बदला।

सैफ अल आदेल मिस्र की सेना में कर्नल रह चुका है। 1988 में मिस्त्र के राष्ट्रपति अनवर अल सादात की हत्या के बाद वह मिस्र छोड़ कर अफगानिस्तान में मुजाहिदीन के साथ सोवियत सेना को बाहर करने में जुट गया था। माना जाता है कि वह यहां से लेबनान गया। खारतूम के खाली खेतों में आतंकियों को विस्फोटक बनाने और इस्तेमाल करने की ट्रेनिंग दी।

आदेल अल कायदा के मजलिस-ए-शूरा और मिलिट्री कमेटी का मेंबर है। उसने अफगानिस्तान, सूडान और पाकिस्तान में कई ट्रेनिंप कैंप भी चलाए। सोमालिया के रास कंबोनी में केन्या की सीमा के पास उसने ट्रेनिंग कैंप भी खोला था।

अल कायदा का एक्सप्लोसिव एक्सपर्ट, जो अमेरिकियों की जान का दुश्मन
4 अक्टूबर 1993 का दिन था। अमेरिकी रेंजर्स और सोमालिया में अल कायदा से जुड़े मिलिशिया के बीच जबरदस्त युद्ध छिड़ा था। इस दौरान मिलिशिया लीडर जनरल आइदीद के लड़ाकों ने राजधानी मोगादिशु में दो अमेरिकी हेलिकॉप्टर गिरा डाले।

इसमें 18 अमेरिकी सैनिक मारे गए। इस दौरान अमेरिकी सैनिकों की लाशों के साथ भी क्रूरता की गई। लाशों को सड़कों पर घसीटा गया। इस घटना को ‘ब्लैक हॉक डाउन’ के नाम से भी जाना जाता है। इस हमले का मास्टरमाइंड सैफ अल आदेल ही था। आदेल ने ही विस्फोटक बनाने और मिसाइलों को गिराने की ट्रेनिंग दी थी।

7 अगस्त 1998 को नैरोबी, केन्या और तंजानिया के दार एस सलाम में अमेरिकी दूतावासों के सामने एक साथ कई धमाके हुए। 224 लोग मारे गए, जिनमें 12 अमेरिकी थे। इन हमलों को भी सैफ अल आदेल ने ही अंजाम दिया। इसी के बाद से आदेल को अमेरिकियों की जान का दुश्मन कहा जाने लगा।
7 अगस्त 1998 को नैरोबी, केन्या और तंजानिया के दार एस सलाम में अमेरिकी दूतावासों के सामने एक साथ कई धमाके हुए। 224 लोग मारे गए, जिनमें 12 अमेरिकी थे। इन हमलों को भी सैफ अल आदेल ने ही अंजाम दिया। इसी के बाद से आदेल को अमेरिकियों की जान का दुश्मन कहा जाने लगा।

अमेरिका में 9/11 हमले के लिए लादेन को मना किया था
अमेरिका में 9/11 हमले से पहले सैफ अल आदेल कंधार शहर का रक्षा प्रमुख था। आदेल ने अमेरिका में वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हुए हमले का विरोध किया था। हमले से ठीक 2 महीने पहले आदेल ने बिन लादेन को ऐसा न करने की सलाह दी थी।

आदेल के अलावा अल कायदा प्रमुख बनने की रेस में शामिल 3 और आतंकियों के बारे में जानते हैं...

पहला: अल-जवाहिरी का दामाद अब्द अल-रहमान अल-मघरेबी
इस रेस में एक और शातिर आतंकी अब्द अल-रहमान अल-मघरेबी का नाम भी आगे चल रहा है। अमेरिकी रक्षा एजेंसी के मुताबिक मघरेबी न सिर्फ अल कायदा का सीनियर मेंबर बल्कि संगठन का बेहद शातिर मेंबर भी है। मघरेबी इस वक्त ईरान में अल कायदा का प्रमुख नेता है।

अल-जवाहिरी का दामाद होने की वजह से संगठन में भी मघरेबी का खास दबदबा है। मघरेबी इराकी सुन्नी विद्रोही ग्रुप जमात अनसर अल सुन्ना और लिबियान इस्लामिक फाइटिंग ग्रुप का भी एक्टिव सदस्य रहा है।

अमेरिकी एजेंसी FBI के मुताबिक मघरेबी मोरक्को का रहने वाला है। वह 2012 में अफगानिस्तान और फिर पाकिस्तान में अल कायदा की जड़ों को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभा चुका है। जर्मनी से सॉफ्टवेयर प्रोग्रामिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद मघरेबी अफगानिस्तान पहुंचा था, जहां उसे अल कायदा का मीडिया प्रमुख बनाया गया था। एक तरह से मघरेबी अल कायदा का मास्टर माइंड है।

दूसरा: अल शबाब का सरगना अहमद दीरिए
अल कायदा चीफ बनने की दौड़ में तीसरा नाम अहमद दीरिए का सामने आ रहा है। अहमद दीरिए को अबू उबैदाह के नाम से भी जाना जाता है। उबैदाह सोमालिया के इस्लामिक ग्रुप अल-शबाब का भी सदस्य रह चुका है। अमेरिकी रक्षा एजेंसी ने अप्रैल 2015 में इसके नाम को दुनिया के टॉप खतरनाक आतंकियों की लिस्ट में शामिल किया है। यही नहीं अमेरिकी सरकार ने इसके बारे में जानकारी देने वाले को 47 करोड़ रुपए इनाम के तौर पर देने की घोषणा भी की है।

अल शबाब का सरगना अहमद दीरिए दुनिया के खूंखार आतंकियों में से एक है।
अल शबाब का सरगना अहमद दीरिए दुनिया के खूंखार आतंकियों में से एक है।

इसे सोमालिया और ईस्ट अफ्रीका में एक्टिव आतंकी संगठन अल-शबाब के प्रमुख के रूप में सितंबर 2014 में नियुक्त किया गया था। इससे पहले यह अल-शबाब संगठन के प्रमुख अहमद आब्दी गोदाने का प्रमुख सलाहकार भी रह चुका है।

तीसरा: 54 करोड़ का इनामी आतंकी यजीद मेबराक
अल्जीरियाई आतंकी यजीद मेबराक का जन्म 1969 में हुआ था। यजीद को अबू उबैदा यूसुफ अल-अन्नाबी के नाम से भी जाना जाता है। अल्जीरियाई इस्लामिक आतंकी समूह अल कायदा इस्लामिक माघरेबी यानी AQIM का वह 2020 से प्रमुख है। अमेरिका ने आतंकी यजीद मेबराक पर 54 करोड़ रुपए का इनाम घोषित कर रखा है। यजीद को जवाहिरी का खास सहयोगी माना जाता है।

अल्जीरियाई आतंकी यजीद मेबराक अलकायदा के टॉप मोस्ट आतंकियों में से एक है।
अल्जीरियाई आतंकी यजीद मेबराक अलकायदा के टॉप मोस्ट आतंकियों में से एक है।

अब बात अलकायदा की हो रही है इसलिए इसके बनने से लेकर अब तक की हिस्ट्री को भी जान लीजिए..

1986 में सोवियत रूस की सेना के खिलाफ जंग के लिए बना अल कायदा
ये 1980 का दौर था। ठीक एक साल पहले 1979 में सोवियत रूस की सेना ने अफगानिस्तान सरकार की तरफ से अफगान मुजाहिदीनों के खिलाफ जंग की शुरुआत की थी। 9 साल चली इस जंग में सोवियत रूस की सेना अफगानिस्तान की सैय्यद मोहम्मद नजीबुल्लाह के नेतृत्व वाली कम्युनिस्ट सरकार को बचाने के लिए लड़ रही थी।

पब्लिक इंटीग्रिटी डॉट ओआरजी के मुताबिक अमेरिका इस जंग में अफगान मुजाहिदीनों को समर्थन दे रहा था। इसी दौरान 1986 में आतंकवादी ओसामा बिन लादेन और अब्दुल्ला आजम ने इस आतंकी संगठन की शुरुआत की थी। बाद में जब सोवियत रूस ने अपनी सेना अफगानिस्तान से वापस ले ली तो लोकतांत्रिक सरकार स्थापित करवाने के नाम पर अमेरिकी सेना ने यहां एंट्री मारी।

इसके बाद अल कायदा ने एक के बाद एक कई हमले अमेरिका समेत दुनिया के कई देशों में किए। इसकी वजह से नाटो, यूरोपीय संघ, अमेरिका, ब्रिटेन, भारत, रूस और कई देशों ने इसे आतंकवादी ग्रुप करार दिया।

आपने पूरी खबर पढ़ ली है तो आइए अब पोल में हिस्सा लेते हैं...

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