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भास्कर एक्सप्लेनर:युद्ध के लिए रिजर्व तेल इस्तेमाल कर महंगाई से निपटेगा अमेरिका; रूस, सऊदी अरब जैसे देश क्यों कर रहे विरोध?

6 दिन पहले

अमेरिका समेत दुनिया के कई देशों में महंगाई के रिकॉर्ड टूट रहे हैं। इससे निपटने के लिए अमेरिका की बाइडेन सरकार अपने स्ट्रैटजिक पेट्रोलियम रिजर्व (SPR) के इस्तेमाल पर विचार कर रही है। अगर ऐसा होता है तो तेल की कीमतें कम होंगी। तेल की कीमतें कम होने से महंगाई पर भी नियंत्रण हो सकता है।

एक्सपर्ट्स का कहना है कि अमेरिका का ये कदम अमेरिकी तेल की कीमतों पर लॉन्ग टर्म इम्पैक्ट नहीं डालेगा, जो अक्टूबर में ही पिछले सात साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई थीं। उस वक्त अमेरिकी तेल 85 डॉलर प्रति बैरल हो गया था।

अमेरिका पेट्रोलियम पदार्थों में कितनी हिस्सेदारी रखता है? क्या अमेरिका के इस कदम से महंगाई कम हो सकती है? क्या पहले भी अमेरिका कभी इस तरह के कदम उठाए हैं, अगर हां तो उसका असर क्या हुआ है? भारत समेत दुनिया के बाकी देशों पर इसका क्या असर पड़ेगा? जो अन्य तेल उत्पादक देश हैं उन पर इसका क्या असर होगा? आइये जानते हैं...

दरअसल, अमेरिका में अगले साल मध्यावधि चुनाव होने हैं। उससे पहले बाइडेन प्रशासन महंगाई को लेकर हो रही आलोचना को कम करने में लगा हुआ है। ये कदम उसी कड़ी में उठाया गया है। इसके साथ ही बाइडेन सरकार को ये कहने का भी मौका मिल जाएगा कि अमेरिका रूस और सऊदी अरब के दबाव में नहीं आया। ये दोनों देश तेल निर्यातक देशों के समूह ओपेक+ का हिस्सा हैं। दोनों ही देशों ने वैश्विक बाजार में अधिक तेल पंप करने के अमेरिकी कॉल का विरोध किया था।

कब बनाया गया SPR?

अमेरिका ने 1975 में SPR का गठन किया था। उस वक्त अरब देशों के तेल प्रतिबंधों ने कच्चे तेल का दाम में भारी इजाफा किया। इससे अमेरिकी अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा। इसके बाद से जब भी युद्ध जैसे हालात हुए तब-तब अमेरिकी राष्ट्रपतियों ने इस SPR का इस्तेमाल किया। इसके जरिए अमेरिका उत्पादन बढ़ाकर तेल के बाजार में कीमतों को नियंत्रण में रखता है।

SPR के पास कितने तेल का नियंत्रण होता है?

अमेरिका के लूसियाना और टेक्सास कोस्ट स्थित चार बेहत सुरक्षित स्थानों पर तेल के 606 मिलियन बैरल इस रिजर्व में हैं। ये इतना तेल है जिससे अमेरिका की 1 महीने की जरूरत को पूरा किया जा सकता है। टेक्सस की इंजीनियरिंग और कंस्ट्रक्शन कंपनी फ्लूओर कॉर्प SPR को मैनेज करती है और उसका ऑपरेशन देखती है। इसके साथ ही अमेरिका देश के उत्तर-पूर्व में हीटिंग ऑयल और गैसोलीन का रिजर्व भी रखता है।

SPR का तेल बाजार में कैसे आता है?

अमेरिकी रिफाइनरी और पेट्रोकैमिकल सेंटर के पास होने की वजह से SPR हर रोज 4.4 मिलियन बैरल तेल सप्लाई कर सकता है। राष्ट्रपति के फैसला लेने के बाद SPR का तेल अमेरिकी बाजार में आने केवल 13 दिन लगते हैं।

इसके लिए वहां का एनर्जी डिपार्टमेंट आमतौर पर ऑनलाइन ऑक्शन करता है। इसमें एनर्जी कंपनियां बोली लगाती हैं। इसमें ये करार होता है कि तेल कंपनियां क्रूड लेंगी, लेकिन उन्हें बाद में इसे इंट्रेस्ट समेत लौटाना होगा।

1975 से गठन के बाद अमेरिकी राष्ट्रपतियों ने तीन बार SPR से इमरजेंसी रिलीज किया है। अंतिम बार 2011 में ऐसा किया गया था। उस वक्त ओपेक देश लीबिया के खिलाफ अमेरिका युद्ध लड़ रहा था। इसी तरह 1991 के खाड़ी युद्ध और 2005 में आए विनाशकारी तूफान कैटरीना के बाद भी तेल की कीमतों को काबू में रखने के लिए SPR से तेल रिलीज किया गया। हालांकि, तेल की अदला-बदली काफी बार हुई है। बीते सितंबर में हैरीकेन तूफान के बाद भी ऐसा हुआ था।

इस बार क्या अलग होने जा रहा है?

अमेरिकी कांग्रेस ने हाल के वर्षों में SPR के मॉर्डनाइजेशन और सरकारी कार्यक्रमों के भुगतान से जुड़े दो कानून पास किए हैं। इन कानूनों के बाद सरकार को ये अधिकार मिल गया कि वो SPR को केवल इमरजेंसी के हालात में सेल करने की जगह कभी भी बेच सकती है। कांग्रेस ने ये भी कहा है कि 30 मिलियन बैरेल SPR को 2025 तक बेचना होगा। हालांकि, कांग्रेस ने ये तय नहीं किया कि ये कब बेचा जाए।

दूसरे देश भी क्या इस तरह के स्ट्रैटजिक रिजर्व रखते हैं?

अमेरिका के अलावा इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) के 29 सदस्य देश भी इमरजेंसी रिजर्व रखते हैं। इन देशों के पास 90 दिन के नेट ऑयल इम्पोर्ट के बराबर का तेल इमरजेंसी रिजर्व में होता है। इन देशों में ब्रिटेन, जर्मनी, जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे देश शामिल हैं। इस रिजर्व की पहली बार नीलामी इस साल सितंबर में हुई।

भारत भी IEA का सदस्य है। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऑयल इम्पोर्टर और उपभोक्ता है। भारत भी अपने पास रिजर्व रखता है।

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